लेखिका 

देखो तुम मेरा जी ना दुखाया करो 
हाले दिल कभी तुम भी समझ जाया करो

यूंही कब तक निभाऊं मैं साथ तुम्हारा 
कभी तुम भी तो साथ निभाया करो

जिंदगी नहीं चलती इक दूसरे के बिन
मैं बनाऊं चाय तुम पिलाया करो

सिक्के के दो पहलू होते हैं जीवन साथी
कभी खाना तुम बनाओ और मुझे खिलाया  करो

बस झाड़ू पोंछा मत करना मैं कर लूंगी
मां कहती थी आदमी के हाथों में झाड़ू अच्छी नहीं लगती

बस इतना करना बच्चों का टिफिन पैक करके 
उन्हें स्कूल छोड़ आया करो

सौम्या दुआ हल्द्वानी नैनीताल

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परिचय 

 सौम्या दुआ(सीमा चांदना) हल्द्वानी नैनीताल(उत्तराखण्ड) की निवासी हैं। साहित्य सेवा के पथ पर निरंतर अग्रसर हैं। आपका 
एक उपन्यास 2019" सोचा तो नहीं था"
एक काव्य संग्रह 11 जनवरी 2020 ""दस्तक लफ्जों की"" एक सांझा व्यंग्य संग्रह चाटुकारिता" कई सांझा काव्य संग्रह पराणी इत्यादि प्रकाशित हो चुके हैं। विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में आपकी रचनाएँ प्रकाशित होती रहती हैं। आप काव्य मंचों सहित रेडियो के कई कार्यक्रमों में भाग लेती आई हैं। आप अच्छी लेखिका के साथ अच्छी गायिका भी हैं। आपको विभिन्न मंचों से सम्मान प्राप्त हुआ है। इसके अलावा आप एक संस्था - मेरा हक मुझे दो  , का संचालन भी करती हैं जो महिलाओं के अधिकारों के लिए काम करती है। आपका एमपी मीडिया पॉइंट पर हार्दिक स्वागत है। 
संपादक
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