विभीषण और श्रीराम की मित्रता का ट्विट


कल्पना कीजिए कि किसी दिन आपको किष्किन्धा नरेश सुग्रीव के ट्वीट से सूचना प्राप्त हो, कि भगवान राम और विभीषण के मध्य मित्रता हो गई है तथा रावण को परास्त करने के बाद लंका का नया महाराज विभीषण को बनाया जाएगा। तो आप कैसा महसूस करेंगे? दरअसल रामायण और महाभारत के युग में यदि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म होते तो शायद इसी तरह से आर्यवृत्त और लंका के नागरिकों को युद्ध से संबंधित सूचना प्राप्त हो रही होतीं। एक कल्पना और कीजिए जब दुर्योधन पांडवों के शान्ति प्रस्ताव को अस्वीकार करने का ट्वीट करता, तो प्रतिउत्तर में युधिष्ठिर युद्ध की विभीषिका का जिम्मेदार दुर्योधन को ठहराते हुए ट्वीट करते। इससे भी बढ़कर श्रीकृष्ण के प्रेम के लिए राधा और रुकमणी का रोचक संवाद भी ट्विटर जैसे प्लेटफार्म पर ट्रेंड हो रहा होता।

खैर यह एक कल्पना है जिससे पौराणिक गाथाओं की रोचकताओं को अनुमानित किया जा सकता है। दरअसल जब से लॉक डॉउन प्रारंभ हुआ है तब से टेलीविजन पर कईँ पौराणिक धारावाहिकों का प्रसारण हो रहा है, जिससे इनसे जुड़े प्रसंग आमजन के मध्य चर्चा का विषय बन गए हैं।  एक ओर यह धारावाहिक टीआरपी के नए कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं, तो वहीं दूसरी ओर लगातार सोशल मीडिया पर ट्रेंड भी हो रहे हैं।
इन धारावाहिकों के प्रसारण और सोशल मीडिया ट्रेंड से न सिर्फ युवा पीढ़ी का जुड़ाव अतीत से बढ़ा दिया है अपितु शुद्ध और अच्छी हिंदी में सोशल मीडिया पर संवाद भी पहले की तुलना में अधिक देखने को मिल रहा है। वर्तमान में सोशल मीडिया पर इन पौराणिक चरित्रों के नाम से कईं हैन्डल सक्रिय हैं जो टीवी पर प्रसारण के अनुसार अपनी-अपनी भूमिका का रोचकता से निर्वहन कर रहे हैं। इन सब के ट्वीट के मध्य की जुगलबंदी से कई बार महाभारत और रामायण युग की कल्पना जीवंत सी प्रतीत होने लगती है। इनमें से कुछ चरित्रों के हैंडल पर फॉलोअर्स की संख्या हज़ारों में पहुँच गई है जो इनकी रोचकता का पर्याय है।

हालांकि काल्पनिक पात्र कुछ व्यक्तियों को धार्मिक भावनाओं पर प्रहार प्रतीत हो रहे हैं तथा वह इस पर अपनी आपत्ति दर्ज करा रहे हैं। किंतु इस बात को समझना होगा कि हमारे यहां प्राचीन काल से नौटंकी और नाटकों के रूप में इन प्रसंगों को रोचकता से प्रस्तुत किए जाने की परंपरा रही है। इसके साथ ही बदलते समय में अपने अतीत को नवीन माध्यम से प्रचारित करना आवश्यक भी है। इन धारावाहिकों के प्रसारण से पौराणिक कथाओं से जुड़े रहस्य और गहराई युवा पीढ़ी को इनके अध्ययन की ओर आकर्षित कर रही है। वैसे भी पिछले कुछ वर्षों में मिथक या संस्कृति से जुड़े पहलुओं पर लेखन और अध्ययन बढ़ चुका है। इन सब के मध्य प्राचीन सभ्यता में ट्विटर की कल्पना रोमांच और रोचकता का रसास्वादन कराती है। वर्तमान में अपनी लोक संस्कृति और इतिहास से युवा पीढ़ी को अन्तर्सम्बन्धित करने के लिए सोशल मीडिया से अच्छा कोई माध्यम नहीं हो सकता है।

अमन आर गुप्ता(लेखक और टिप्पणीकार)सीहोर, मप्र

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