लेखिका 

'सहमी -सहमी सी सुबह'

 सुबह की सैर में अभिवादन के स्वर गुडमार्निगं किसी शोर में खोते चले गये-----अभिवादन को अभी सहेज भी ना पायी थी कि देखा आवारा कुत्तों का एक झुंड विदेशी नस्ल के एक कुत्ते पर कातिलाना हमले को तैयार थे,हमला भी किसी आंतकी हमले से कम नहीं था ---अलसाई सुबह के सहमे से आलम में सुबह की ताजगी और ओस की बूंदो सी खुशनुमा शांति कहां गुम होती चली गई भान ही नही रहा फिर वही घटना मेरी रचना बनती चली गई---स्टाईल स्टेटमेंट और प्रतिष्ठा के प्रतीक मोबाईल मंहगी गाड़ीया और विदेशी नस्ल के गबरू कुत्ते भी अब हमारे स्टेट्स में शामिल है,वॉक या रन जैसी रेग्यूलर एक्सरसाईज मालिक के साथ साथ कुतों के लिये भी फायदेमंद है ,रिहाईशी इलाकों और सार्वजनिक स्थलो पर पालतू कुत्ते के साथ सैर जंहा आपका स्टाईल या शगल होता है,वही जंजीरो से जकड़ा अपनी आजादी के लिये जंजीर छुड़ाता,भागता कुता राहगीरो के लिये किसी शेर से कम नहीं हाेता ,आपकी हिम्मत और साहस को ललकारती उसकी गुर्राहट आपके कलेजे को मुहं तक ले आने में समर्थ होती है----कोई ताज्जुब भी नहीं की किसी कमजोर दिल वाले का दिल धड़कना ही बंद कर दे ---परंतु इस सबसे बेखबर कुत्ता और मालिक दोनो अपने में व्यस्त और मस्त ---------लेकिन व्यस्त और मस्त शैली में दूसरो की सुविधा ,असुविधा का ध्यान ररवना ,सामाजिक शिष्टाचार है,कई बार तो समझना जरा मुशकिल हो जाता है कि कुत्ता मालिक को रन करा रहा ,या मालिक कुत्ते को----दोनों एक दूसरे को दौड़ाते नजर आते है,माना की कुत्ता आपका वफादार है,बगैर वेतन का चौकीदार है,फिर पडोसी डर से खस्ताहाल है---उसकी सैर का बुरा हाल है ,हर कुत्ते वाले से सवाल है ? क्या यही मार्निगं वॉक है-----

मंजु श्रीवास्तव, छिंदवाड़ा, मप्र

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