आईएएस ओपी श्रीवास्तव का "सुशासन भवन" घोटाला,
सीएम के खास अधिकारी हैं घोटालेबाज
सुशासन भवन घोटाला जाँच पर मौन क्यों हैं सरकार
लेखिका
था l आज ऐसे घोटालेबाज अधिकारी का मुख्यमंत्री कार्यालय में बैठना ही कल्पना से परे हैं एवं जाँच करने लायक बात हैं कि वहां इनका कार्यालय कैसा चल रहा हैं l
ओ पी श्रीवास्तव वहीं अफसर है जो कमलनाथ सरकार में जनसंपर्क विभाग में संचालक जैसे पद पर बैठकर सरकार की सीएम कमलनाथ की छवि को धूमिल कर चुके है l आखिर में कमलनाथ सरकार ने ओ पी श्रीवास्तव को वहां से हटा दिया गया था l सब जानते हैं कि कमलनाथ की मीडिया जगत में छवि खराब करने में महत्वपूर्ण योगदान
था l जब तक श्रीवास्तव का वंश चलता था वहां मीडिया के लोगों को कमलनाथ तक भटकने नहीं देते थे l कुछ वैसा ही अब काम अब वे शिवराज जी के साथ कर रहे हैं l सीएम से मीडिया की दूरी बनाने का षड्यंत्र चल रहा है l
ताज्जुब की बात है कि ज्ञात होने के बाद भी श्रीवास्तव पर भरोसा किया जा रहा है l उसके कारनामों पर पर्दा डाला जा रहा है l ऐसे अफसर का सीएम हाउस जैसी जगह पर रहना किसी खतरे से खाली नहीं है l
ऐसे अफसर दीमक की तरह काम करते हैं l मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और कमलनाथ में काफी अंतर है l शिवराज जी जननेता है l उनमें मेल- मिलाप करने की प्रवृत्ति है लेकिन ओ पी श्रीवास्तव जैसे अधिकारी यदि सी एम के आस पास रहेंगे तो निश्चित रूप से जननेता की छवि को कभी भी निखरने नहीं देंगे l
समय रहते शिवराज जी को अपने करीबियों से सतर्कता बरतने की जरूरत है l
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लेखिका मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकारों मे शुमार हैं। एमपी मीडिया पाइंट आपके लेखन का स्वागत करता है।
सीएम के खास अधिकारी हैं घोटालेबाज
सुशासन भवन घोटाला जाँच पर मौन क्यों हैं सरकार
लेखिका
विजया पाठक
क्या राज्य के एक और प्रमोटी आईएएस भ्रष्टाचार में डूबकर अधिकारी वर्ग को कलंकित करेगे l दरअसल 2018 में प्रमोटी आईएएस ऑफिसर ओ पी श्रीवास्तव मंदसौर के कलेक्टर थे l ओ पी श्रीवास्तव इसी समय मंदसौर में नए कलेक्टर भवन का निर्माण करवाया था l जिसका नाम रखा गया था "सुशासन भवन"l इस सुशासन भवन का निर्माण और शुभारंभ श्रीवास्तव ने बड़े धूमधाम से करवाया था l जैसे मानो किसी देवालय का शुभारंभ हो रहा हों l कलेक्टर ने इस भवन के निर्माण में बहुत रुचि ली थी l मंदसौर का नया कलेक्टर भवन जिला सुशासन भवन नाम दिया गया था l उसका निर्माण 13 करोड़ 71 लाख की लागत से हुआ था l इस भव्य भवन की पोल 6 माह के भीतर ही खुलने लगी थी l घटिया निर्माण के चलते जगह-जगह से टाइल्स उखड़ने लगी l छत से पानी टपकने लगा l दीवारें दरकने लगी l मतलब साफ था कि इस निर्माण में भारी घोटाला हुआ था l ओ पी श्रीवास्तव ने जानबूझकर एक बड़े घोटाले को अंजाम दियाथा l आज ऐसे घोटालेबाज अधिकारी का मुख्यमंत्री कार्यालय में बैठना ही कल्पना से परे हैं एवं जाँच करने लायक बात हैं कि वहां इनका कार्यालय कैसा चल रहा हैं l
ओ पी श्रीवास्तव वहीं अफसर है जो कमलनाथ सरकार में जनसंपर्क विभाग में संचालक जैसे पद पर बैठकर सरकार की सीएम कमलनाथ की छवि को धूमिल कर चुके है l आखिर में कमलनाथ सरकार ने ओ पी श्रीवास्तव को वहां से हटा दिया गया था l सब जानते हैं कि कमलनाथ की मीडिया जगत में छवि खराब करने में महत्वपूर्ण योगदान
था l जब तक श्रीवास्तव का वंश चलता था वहां मीडिया के लोगों को कमलनाथ तक भटकने नहीं देते थे l कुछ वैसा ही अब काम अब वे शिवराज जी के साथ कर रहे हैं l सीएम से मीडिया की दूरी बनाने का षड्यंत्र चल रहा है l
ताज्जुब की बात है कि ज्ञात होने के बाद भी श्रीवास्तव पर भरोसा किया जा रहा है l उसके कारनामों पर पर्दा डाला जा रहा है l ऐसे अफसर का सीएम हाउस जैसी जगह पर रहना किसी खतरे से खाली नहीं है l
ऐसे अफसर दीमक की तरह काम करते हैं l मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और कमलनाथ में काफी अंतर है l शिवराज जी जननेता है l उनमें मेल- मिलाप करने की प्रवृत्ति है लेकिन ओ पी श्रीवास्तव जैसे अधिकारी यदि सी एम के आस पास रहेंगे तो निश्चित रूप से जननेता की छवि को कभी भी निखरने नहीं देंगे l
समय रहते शिवराज जी को अपने करीबियों से सतर्कता बरतने की जरूरत है l
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लेखिका मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकारों मे शुमार हैं। एमपी मीडिया पाइंट आपके लेखन का स्वागत करता है।


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