कुर्सी पर बैठे बैठे रुक गई युवक की सांसे
इछावर, एमपी मीडिया पाइंट
बाबू मोशाए,
जिंदगी और मौत ऊपर वाले के हाथ मे है जहांपना,
जिसे न आप बदल सकते हैं ना हम,
इंसान तो रंगमंच की एक कठपुतली है, जिसकी डोर ऊपर वाले ऊँगलियों से बंधी है,
... कौन,कब,कैसे उठेगा कोई नहीं बता सकता।
फिल्म "आनंद" का यह डायलॉग मध्यप्रदेश के सीहोर जिला अंतर्गत ग्राम बिलकिसगंज मे उस समय चरितार्थ हो गया जब एक व्यक्ति सांची दूध कार्नर पर बातचीत करते जिंदगी को अंतिम सलाम ठोंक गया।
कहते हैं जिंदगी की सांसे किसकी कब कहां रुक जाएं कहा नहीं जा सकता।
लेकिन मौत ऐसे भी आती है. जैसे सीहोर जिले के अंतर्गत बिलकिसगंज में कुर्सी पर बैठे बैठे व्यक्ति की सांसें रुक गई और उसकीे मोके पर ही मौत हो गई।
ग्राम खुरचनी के निवासी जमनाप्रसाद का अंतिम समय का यह वाकया सांचीे दूध कलेक्शन सेंटर पर लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गया। जहां कुर्सी पर बैठे बैठे जमुना प्रसाद अचानक मौत के घाट उतार गया।
मौके पर पहुँची बिलकिसगंज पुलिस ने पंचनामा बनाकर शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
बाबू मोशाए,
जिंदगी और मौत ऊपर वाले के हाथ मे है जहांपना,
जिसे न आप बदल सकते हैं ना हम,
इंसान तो रंगमंच की एक कठपुतली है, जिसकी डोर ऊपर वाले ऊँगलियों से बंधी है,
... कौन,कब,कैसे उठेगा कोई नहीं बता सकता।
फिल्म "आनंद" का यह डायलॉग मध्यप्रदेश के सीहोर जिला अंतर्गत ग्राम बिलकिसगंज मे उस समय चरितार्थ हो गया जब एक व्यक्ति सांची दूध कार्नर पर बातचीत करते जिंदगी को अंतिम सलाम ठोंक गया।
लेकिन मौत ऐसे भी आती है. जैसे सीहोर जिले के अंतर्गत बिलकिसगंज में कुर्सी पर बैठे बैठे व्यक्ति की सांसें रुक गई और उसकीे मोके पर ही मौत हो गई।
ग्राम खुरचनी के निवासी जमनाप्रसाद का अंतिम समय का यह वाकया सांचीे दूध कलेक्शन सेंटर पर लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गया। जहां कुर्सी पर बैठे बैठे जमुना प्रसाद अचानक मौत के घाट उतार गया।
मौके पर पहुँची बिलकिसगंज पुलिस ने पंचनामा बनाकर शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।


Post A Comment: