संदेशे आते हैं... जाते हैं
लेकिन न इंतजार, न तड़प 

                             लेखिका 
जब से ये मैसेजेज , लास्टसीन , स्टेटससीन , ब्लाक का दौर शुरू हुआ है प्रेमियों का तो जैसे जीना हराम हो गया है । आपको नहीं लगता ऐसा । मुझे तो लगता है भई । लास्टसीन हाइड कर लिया तो शक , मैसेज न देखा तो बैचेनी मन में तरह तरह के सवाल , आनलाइन रहते हुए भी अगर रिप्लाई नहीं दिया तो गुस्सा , स्टेट्स में ऐसे ऐसे quote डालेंगे कि कलेजा ही छलनी हो जाए और ब्लाक अगर कर दिया तो समझो मौत ही आ गयी । जाने कितनी बार सर्च मारेंगे कभी फेसबुक पर कभी इंस्टाग्राम पर तो कभी ट्विटर पर । अरे भ्ई इतनी बैचेनी पालकर क्या करोगे दिमाग ही खराब होगा आप परेशान होंगे आप परेशान हुए मतलब आपका परिवार परेशान हो जाएगा । किसी को पता भी नहीं कि आप क्यों परेशान हो तो कोई आपकी मुश्किल हल भी कैसे करें । अगर कोई सलाह भी दे तो बताओ मुझे मानोगे आप । सर्च पर सर्च करोगे ही । है न । जिसे आपकी सच में परवाह होगी , जो सच में आपको समझता होगा/ होगी वो इन सब चीजों का मोहताज होगा ही नहीं । कोई इतना भी व्यस्त नहीं होता कि आपके मैसेज का जबाब न दे पाये । आपके मैसेज का जबाब न देना , आपकी मजबूरी न समझना , आपको इतना इगनोर कर देना कि आप मानसिक रूप से पागल होने की कगार पर आ जाओ तब इन सब चीजों का साफ मतलब होता है उस शख्स के लिए आप कोई भी मायने नहीं रखते , मर चुके हो आप उसके लिए,  कोई आपसे भी बेहतर मिल गया/ गयी है उसे । मत करो खुद को इतना परेशान कि आपकी वजह से आपके अपने परेशान हो जाए । खुद को इन सब चीजों से परेशान करने का मतलब है खुद को बेइज्जत करना अपनेआप को खुद की ही नजर में गिराना । जिसने कभी भी एक सेकेंड के लिए भी आपसे प्यार किया होगा वो कभी भी आपको इगनोर नहीं करेगा खुद तकलीफ सह लेगा/ लेगी पर आपके मन को ठेस नहीं पहुंचाएगा इसलिए इस बात को अच्छे से समझकर कि आप मर चुके हो उस शख्स के लिए उसके रास्ते से हट जाओ इसी में आपकी और आपके परिवार की भलाई है ।

आज के दौर से अच्छा तो वो समय था जब फोन ही नहीं हुआ करते थे होती थी चिट्ठियां या फिर आंखों की बातें एक गुदगुदापन एक दुसरे को देखकर न देख पाने पर बैचेनी । एक दुसरे की तकलीफ को बिना बोले समझ जाना इतना प्यार करना कि दुआओं में हर पल उसकी खुशियाँ मांगना । खैर ये तो फिर भी बहुत पुरानी बात है तब तो मैं पैदा भी नहीं हुई थी । मेरे समय में Nokia फोन हुआ करते थे जिससे local , std ,और ISD के अलग अलग चार्जेज होते थे । local मैसेज के 30 पैसे और Std के 1:30 रूपये लगते थे । बड़ा महंगा था सच में ये फोन वोन करना उन दिनों में बड़ो से इजाजत भी नहीं होती थी मोबाइल यूज करने की । जब सगाई हो गयी तभी फोन मिलते थे वो भी 300 के रिचार्च के साथ । ग्रिटींग कार्ड , गिफ्ट ये सब चलता था । कार्ड पर आइ लव यू लिखने में ही पसीने छूट जाते थे । पर सच कहूँ प्यार तो तब ही हुआ करता था एकदम सच्चा वाला , खुबसूरत एहसासों से भरा हुआ । छत से हो या गली से गुजरते हुए अगर वो दिख भी जाये तो हवा थम जाती थी फिर पुरा दिन खुशगवार गुजरता था । ये खुबसूरत एहसास इसलिए था क्योंकि तब ये मोबाइल का चक्कर ज्यादा न था । बिना कहे ही लोग उम्र भर एक दूसरे को जी लेते थे । अगर दो लोगों ने इजहार कर दिया है प्रेम का तो परिवार के लिए प्रेम की बलि चढ़ा देते थे हंसते हुए । वो कभी भी एक दुसरे से एक दुसरे की खुशियों के सिवा कुछ चाहते ही नहीं थे ।अगर धोखा भी मिल गया तो ताउम्र उस शख्स से नफरत में गुजार देते थे मतलब एक शख्स से ही प्यार करने में ही जीवन गुजार देना कमाल है न । पर अब शायद ये संभव नहीं है । अब न चिट्ठीयां है , न वो शुकून भरी छत न ही वो गलियों का शुकून । अब तो प्रपोज किया ना कहा तो कहीं और चल दिये । फुरसत कहा है किसी को किसी के इंतजार करने की । जरा सी अनबन ब्लाक और मैसेज का रिप्लाय न करके मानसिक तौर पर परेशानी । उफ कितना मुश्किल है न सब । जितनी तेज गति से दुनिया भाग रही है नेट के समय में प्रेम वहीं कही न कही खोखला होता जा रहा है क्षणभंगुर होता जा रहा है । ऐसा नहीं है कि अब भी सच्चे प्रेम करने वाले नहीं है है पर सच्चे प्रेम को सच्चा कदरदान नहीं मिल रहा अब । आजकल की पिढ़ी इन सब चीजों में सिमट कर रह गयी है जो वाजिब भी तो है पर अगर कोई आपको इगनोर कर रहा है तो खुद को परेशान करने से अच्छा है समझ लिजीए जैसा कि पहले भी कहा मैंने कि आप मर चुके हो उसके लिए । उसके रास्ते से हट जाओ और खुश रहने की कोशिश करो क्योकिं प्यार के अलावा भी बहुत सी चीजें है करने के लिए जो आपके भविष्य के लिए जरूरी है आपके परिवार की खुशियों के लिए जरूरी है जो कि आपकी खुशियों से जुड़ी हुई है ।

प्रेम स्थिरता है न कि बैचेनी , प्रेम प्रेम करना सिखाता है न कि मुश्किलों में डालता है चाहे वो मानसिक तौर पर हो या भावनात्मक तौर पर । प्रेम हमारे अन्दर सम्मान पैदा करता है न कि हमें इस कदर उलझाता है कि हम खुद से ही नफरत करने लगे । प्रेम वो है जो हमारी चेहरे की सुन्दरता को नहीं सराहता बल्कि हमें खुद में  इतना प्रेममयी कर देता है कि हम अपनेआप से प्यार करने लगते है ।

रूबी प्रसादसिलीगुड़ी (पश्चिम बंगाल)

Share To:

Post A Comment: