बाल विवाह मे सहयोग देने पर होगी 2 वर्ष की सजा एवं एक लाख का जुर्माना
सीहोर 25 जून,2020
एमपी मीडिया पाइंट 

     लाडो अभियान अंतर्गत गुरुवार को बाल विवाह को रोकने के संबंध में कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान जानकारी दी गई कि इस वर्ष 29 एवं 30 जून को विवाह हेतु अंतिम शुभ मोहर्त होने के कारण बाल विवाह होने की प्रायिकता अधिक है। इस अवसर पर बाल विवाह को रोकने विकासखण्ड, परियोजना स्तर पर अधिकारी, कर्मचारीयों की ड्यूटी लगाई गई है। साथ ही शासकीय भवनों मंदिरों आदि पर दीवार लेखन किया गया है।
     18 वर्ष से कम उम्र की लड़की एवं 21 वर्ष से कम उम्र के लडके का विवाह बाल विवाह की श्रेणी मे आता है। भारतीय संविधान मे बाल विवाह को दण्डनीय अपराध माना गया है। बाल विवाह निषेध अधिनियम के तहत बाल विवाह कराने वाले माता पिता, भाई बहन, एवं परिवारजन सम्मिलित बाराती, एवं सेवा देने वाले जैसे टेंट हाउस, प्रिन्टर्स, ब्यूटी पार्लर, हलवाई, मेरिज गार्डन, घोड़ी वाले, बैंड बाजे वाले, कैटर्स, धर्मगुरू, पण्डित, समाज के मुखिया, आदि के विरूद्ध कानूनी कार्यवाही की जाने के साथ उन्हे जेल भेजने का प्रावधान भी किया गया है। 
     बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 अंतर्गत 18 साल से कम उम्र की लड़की और 21 साल से कम उम्र का लडका बच्चा होता है। बच्चे का विवाह कराना अपराध है। बाल-विवाह कराने पर व्यक्ति को जमानत नही मिलेगी। बाल विवाह मे दो वर्ष की सजा एवं एक लाख का जुर्माना है। बाल विवाह होने पर कोई भी व्यक्ति इसकी रिपोर्ट पुलिस, बाल विवाह निषेध अधिकारी, प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट और जिला मजिस्ट्रेट को दे सकता है।
     दुष्परिणाम-  जब बच्चों का विवाह होता है तो उनके शरीर और दिमाग दोनो बहुत कमजोर होते है। लड़किया कम उम्र मे गर्भवती हो जाती है। समय से पूर्व बच्चे पैदा होते है जिससे प्रसव के समय शिशु मृत्यू दर अधिक होती है। कम उम्र मे विवाह से षिक्षा के अधिकारों का हनन होता है। बाल विवाह के कारण बच्चे अनपढ और अकुशल रह जाते है। जिससे उन्हे रोजगार नहीं मिलता। दोषियों मे निम्नलिखित शामिल लड़के लडकी के अभिभावक, पादरी पण्डित मौलवी, दोनों तरफ के रिष्तेदार, समस्त सेवा प्रदाता, सामूहिक विवाह समारोह कराने वाले।
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