गजल
लेखक
खुद को जलाते रहे....
गंदगी मन में अपने बसाते रहे,
फिर भी हम खुद को अच्छा बताते रहे,
खुद को देखा नहीं आइने में मगर,
आइना हम सभी को दिखाते रहे,
खुद की देखी नहीं है बुराई मगर,
दूसरो की बुराई गिनाते रहे,
दिल दुखेगा किसी का ना सोचा कभी
इस तरह सबको हम आजमाते रहे,
हमने सोचा नहीं क्या है अच्छा बुरा,
इस तरह औरो को, हम सताते रहे
जब लगा हमको, हमने गलत है किया,
आग की लौ में खुद को जलाते रहे ।।


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