बिना इलाज के ठीक हो गएसंक्रमण के असर को बेअसर करती इम्युनिटी 

नई दिल्ली, एम पी मीडिया पॉइंट 

देश में कोरोना के असली असर का पता लगाने के लिए ICMR ने  सीरोलॉजिकल सर्वे कराया। इस सर्वे के मुताबिक एकत्रित किए गए सेम्पल से शरीर में एंटी बॉडी का पता लगाना था। यानि हॉट स्पॉट वाले क्षेत्रों में इंफेक्शन के बाद रिकवर हो चुके लोगों की संख्या के बारे में जानकारी जुटाई गई। जिसकी प्राथमिक रिपोर्ट चोंकाने वाली है। जिन क्षेत्रों से सेम्पल लिए गए तो वहाँ के अधिकांश नमूनो में एंटी बॉडीज पाए गए। यानि जिन लोगों का कोरोना का इलाज नही हुआ वो भी बिना इलाज के ही ठीक हो गए। बताया गया है कि संक्रमित क्षेत्र वाले हॉट स्पॉट वाली एक तिहाई आबादी कोरोना से मुक्त हो चुकी है। जो संक्रमित हुए लोगों की सूची से कहीं ज्यादा है। न्‍यू इंडियन एक्‍सप्रेस ने अधिकारियों के हवाले से रिपोर्ट के शुरुआती नतीजे छापे हैं। इसके मुताबिक, हाटस्पॉट शहरों की एक-तिहाई आबादी में संक्रमण फैला था। यह मरीज खुद-ब-खुद रिकवर हो गए। उनके शरीर से ऐंटीबॉडीज मिली हैं। सर्वे की शुरुआती रिपोर्ट कैबिनेट सचिव और प्रधानमंत्री कार्यालय से साझा की गई है।ICMR के सीरोलॉजिकल सर्वे में देश के विभिन्न जिलों से करीब 24 हजार लोगों के सैंपल लिए गए थे। सीरोसर्वे में,  ऐंटीबॉडीज की पहचान के लिए ब्‍लड सैंपल लिए जाते हैं। ब्‍लड सैंपल का ऐंटीबॉडी टेस्‍ट बड़ी अहम जाानकारी देता है। इससे शरीर में ऐंटीबॉडीज का पता चलता है, जो बताती हैं कि आप वायरस के शिकार हुए थे या नहीं। ऐंटीबॉडीज दरअसल वो प्रोटीन्‍स हैं जो इन्‍फेक्‍शंस से लड़ने में मदद करती हैं। सीरो सर्वे के लिए पुणे के नेशनल इंस्‍टीट्यूट ऑफ वायरॉलजी (NIV) की बनाई कोविड कवच एलिसा किट्स इस्‍तेमाल की गई हैं।इस बार टेस्‍ट IgG ऐंटीबॉडीज का पता लगाने के लिए था जो SARS-CoV-2 से लड़ती हैं। यह इन्‍फेक्‍शन के 14 दिन बाद शरीर में मिलने लगती हैं और महीनों तक ब्‍लड सीरम में रहती हैं। ICMR ने पाया कि हाई केसलोड वाले जिलों के कई कंटेनमेंट एरियाज में 15 से 30 फीसदी आबादी को इन्‍फेक्‍शन हो चुका है।इनमें मुंबई, दिल्‍ली, अहमदाबाद और इंदौर जैसे शहर हैं। यानी जो केसेज रिपोर्ट हो रहे हैं, असल में कोरोना उससे कहीं ज्‍यादा आबादी में फैल है। ICMR रिपोर्ट कहती है कि टियर 2 और टियर 3 शहरों में वायरस का प्रसार कम रहा है।
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