टाइगर जिंदा है..... शिकारी मुस्तैद
इछावर के टाइगर का दर्द.....
टाइगर स्टेट के नाम से पहचाने जाने वाले प्रदेश में..... क्रिकेट की दुनिया के टाइगर... पटोदी की पूर्व रियासत में..... टाइगर जिंदा है... का डायलॉग गूंजे तो आश्चर्य क्या...? लेकिन जब पूर्व राजस्व मंत्री और इछावर के विधायक... जिनके बारे में यह सर्व विदित है कि... वह प्रेस से आवश्यक नजदीकी रखने में भी परहेज करते हैं.... ऐसे करण सिंह वर्मा ने बीते दिनों .... एक प्रेस काँफ्रेंस आयोजित करते हैं... वह भी खर्चीले इंतजाम के साथ... जो उनके स्वभाव से मेल नहीं खाती....? सवाल यह भी उठता है कि.... आखिर उन्हें प्रेस काँफ्रेंस करने की नौबत क्यों आई.... क्या केवल इतना बता देने के लिए..... कि मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने पर भी वह खुश हैं....? या फिर मंत्री पद से दूर हो जाने के गम को... पत्रकारों के साथ बाँटा गया...? कहते हैं दर्द बाँटने से... गम कम हो जाता है... आदमी हल्का हो जाता है.....? कारण क्या रहे... ये विधायक वर्मा जाने....? लेकिन इसी पीसी में उन्होंने शिवराज और सिंधिया को.... असली टाइगर बताया.... दिग्गी राजा के बारे में इशारे में कुछ कह दिया....। जो कहा गया वह सबको मालूम हो गया... यही इनका खास अंदाज है.... कि अनजान बनकर सारी जानकारी दे देना....।
बात जब टाइगर के जिंदा होने की छिड़ ही गई है तो... इसकी पृष्ठ भूमि को टटोलते हुए... आगे बढ़ते हैं....। इस डायलॉग का पहला प्रयोग... बुधनी की एक रैली के दौरान... मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उस समय किया था... जब वह सीएम की कुर्सी कांग्रेस की विजय से 2018 में खो बैठे थे... बाद में यह डायलॉग उन्होंने कई बार प्रयोग किया... उनके मंत्री मंडल के विस्तार के बाद... कांग्रेस से भाजपा में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस्तेमाल कर.... इसको पुनर्जीवित कर दिया...। आज हम इसके निहितार्थ के दर्शन की तरफ चलते हैं....।
शिवराज सिंह चौहान... कमलनाथ की सरकार को सिंधिया सहित अन्य कांग्रेस बागियों की मदद से अपदस्थ कर.... पुनः सीएम की कुर्सी पर काबिज हो गए...। लगा टाईगर जिंदा है.... लेकिन कोरोना काल में पहले अकेले ही मंत्रिमंडल रहे... फिर पांच को और शामिल कर लिया.... जिनमें दो सिंधिया खेमे से रहे.....। मंत्री मंडल का विस्तार करने का विचार विमर्श करने आला कमान के पास पहुंचे.... वहाँ मोदी और शाह के हंटर के सामने... टाईगर को सर्कस का टाईगर बनते दुनिया ने देखा... और शिवराज ने खुद भी महसूस करते हुए.... ट्विटर पर लिखा... शिव ने विषपान कर लिया...। यानि जो करने की मंशा थी वह नहीं हुआ.... और वह हुआ जो उनकी मर्जी के खिलाफ था...। सौदेबाजी का मूल्य चुकाया गया....। अब फिर पेंच फंस गया... विभाग के बंटवारे का.... इसमें क्या निकलकर सामने आता है... उसकी प्रतीक्षा है... बहरहाल टाईगर बेबस नजर आ रहा है...।
मंत्री मंडल का विस्तार हुआ... और फौरन बाद कांग्रेस से भाजपा के हुए... सिंधिया ने फिर का दिया टाईगर जिंदा है.. उनका इशारा कांग्रेस से बगावत कर भाजपा में शामिल हुए... 22 में 14 को मंत्री बनवा लेने की तरफ था... या शिवराज से कहा गया.... या फिर अपने पुराने कांग्रेसियों से कहना था... निहितार्थ वही जाने... हम तो चुप रहेंगे...। लेकिन यह जरूर उल्लेख करेंगे कि... टाईगर अकेले शिकार करता है.. बिना किसी की मदद के... यहाँ तो कमलनाथ सरकार का शिकार.... ऐसे तो नही किया गया....। खैर टाईगर की असल पहचान और मुख्य परीक्षा के लिए उप चुनाव बाकी हैं.... । अपने कांग्रेस साथियों को भाजपा सरकार में 14 पद दिलाकर.... 41 प्रतिशत मंत्री पद तो हथिया लिए.... इनमें से कोई भी अभी विधानसभा सदस्य नहीं है....। जब उप चुनाव होंगे... इन्हें जिताने का जिम्मा उन पर ही होगा.... जिन सिंधिया को भाजपा के पुराने नेता अपने बेनर पोस्टर में जगह देने से कतरा रहे हैं....। वो उपचुनाव में कांग्रेस से बागी होकर भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने वालों का कितना साथ देंगे....। अगर ये नव भाजपाई उनके लिए काँटा हैं तो... क्या इन काँटों को निकालने के लिए... उप चुनाव... एक सिद्ध मुहूर्त की तरह आने वाले हैं..? अगर हाँ तो सिंधिया खेमे के मंत्री बने... लोग कितने अपने मंत्री पद को सुरक्षित रख पाएंगे... कितनों को हाथ धोना होगा.... इस पर हर खेमे में चिंतन, मंथन के दौर के साथ.. आवश्यक रण नीति पर विचार विमर्श चल रहा होगा...।
इन सब से कांग्रेस भी अछूती नही रहने वाली... उसकी नजर भाजपा के बागियों पर हो सकती है... जो अपने विधान सभा क्षेत्र से अन्य प्रत्याशियों को... भाजपा के चुनाव चिन्ह पर... चुनाव लड़ते देख कर... क्या योजना बनाते हैं....। वैसे कांग्रेसियों का इस विस काल खंड में दोबारा सरकार बनाना... हाल फिलहाल असंभव लगता है...। क्योंकि भाजपा की सरकार को... अपनी स्थिरता के लिए 24 उपचुनाव में से दस सीटें जीत लेना भी पर्याप्त होगा...। तो क्या करण सिंह वर्मा की प्रेस काँफ्रेंस... भाजपा की रण नीति का हिस्सा थी... या उनका अपना निजी दर्द...। जो भी हो.... टाईगर जिंदा है... तो इसका सबूत देना होगा.... इसकी शुभ घडी उपचुनाव ही होंगे.....।
इछावर के टाइगर का दर्द.....
टाइगर स्टेट के नाम से पहचाने जाने वाले प्रदेश में..... क्रिकेट की दुनिया के टाइगर... पटोदी की पूर्व रियासत में..... टाइगर जिंदा है... का डायलॉग गूंजे तो आश्चर्य क्या...? लेकिन जब पूर्व राजस्व मंत्री और इछावर के विधायक... जिनके बारे में यह सर्व विदित है कि... वह प्रेस से आवश्यक नजदीकी रखने में भी परहेज करते हैं.... ऐसे करण सिंह वर्मा ने बीते दिनों .... एक प्रेस काँफ्रेंस आयोजित करते हैं... वह भी खर्चीले इंतजाम के साथ... जो उनके स्वभाव से मेल नहीं खाती....? सवाल यह भी उठता है कि.... आखिर उन्हें प्रेस काँफ्रेंस करने की नौबत क्यों आई.... क्या केवल इतना बता देने के लिए..... कि मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने पर भी वह खुश हैं....? या फिर मंत्री पद से दूर हो जाने के गम को... पत्रकारों के साथ बाँटा गया...? कहते हैं दर्द बाँटने से... गम कम हो जाता है... आदमी हल्का हो जाता है.....? कारण क्या रहे... ये विधायक वर्मा जाने....? लेकिन इसी पीसी में उन्होंने शिवराज और सिंधिया को.... असली टाइगर बताया.... दिग्गी राजा के बारे में इशारे में कुछ कह दिया....। जो कहा गया वह सबको मालूम हो गया... यही इनका खास अंदाज है.... कि अनजान बनकर सारी जानकारी दे देना....।
बात जब टाइगर के जिंदा होने की छिड़ ही गई है तो... इसकी पृष्ठ भूमि को टटोलते हुए... आगे बढ़ते हैं....। इस डायलॉग का पहला प्रयोग... बुधनी की एक रैली के दौरान... मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उस समय किया था... जब वह सीएम की कुर्सी कांग्रेस की विजय से 2018 में खो बैठे थे... बाद में यह डायलॉग उन्होंने कई बार प्रयोग किया... उनके मंत्री मंडल के विस्तार के बाद... कांग्रेस से भाजपा में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस्तेमाल कर.... इसको पुनर्जीवित कर दिया...। आज हम इसके निहितार्थ के दर्शन की तरफ चलते हैं....।
शिवराज सिंह चौहान... कमलनाथ की सरकार को सिंधिया सहित अन्य कांग्रेस बागियों की मदद से अपदस्थ कर.... पुनः सीएम की कुर्सी पर काबिज हो गए...। लगा टाईगर जिंदा है.... लेकिन कोरोना काल में पहले अकेले ही मंत्रिमंडल रहे... फिर पांच को और शामिल कर लिया.... जिनमें दो सिंधिया खेमे से रहे.....। मंत्री मंडल का विस्तार करने का विचार विमर्श करने आला कमान के पास पहुंचे.... वहाँ मोदी और शाह के हंटर के सामने... टाईगर को सर्कस का टाईगर बनते दुनिया ने देखा... और शिवराज ने खुद भी महसूस करते हुए.... ट्विटर पर लिखा... शिव ने विषपान कर लिया...। यानि जो करने की मंशा थी वह नहीं हुआ.... और वह हुआ जो उनकी मर्जी के खिलाफ था...। सौदेबाजी का मूल्य चुकाया गया....। अब फिर पेंच फंस गया... विभाग के बंटवारे का.... इसमें क्या निकलकर सामने आता है... उसकी प्रतीक्षा है... बहरहाल टाईगर बेबस नजर आ रहा है...।
मंत्री मंडल का विस्तार हुआ... और फौरन बाद कांग्रेस से भाजपा के हुए... सिंधिया ने फिर का दिया टाईगर जिंदा है.. उनका इशारा कांग्रेस से बगावत कर भाजपा में शामिल हुए... 22 में 14 को मंत्री बनवा लेने की तरफ था... या शिवराज से कहा गया.... या फिर अपने पुराने कांग्रेसियों से कहना था... निहितार्थ वही जाने... हम तो चुप रहेंगे...। लेकिन यह जरूर उल्लेख करेंगे कि... टाईगर अकेले शिकार करता है.. बिना किसी की मदद के... यहाँ तो कमलनाथ सरकार का शिकार.... ऐसे तो नही किया गया....। खैर टाईगर की असल पहचान और मुख्य परीक्षा के लिए उप चुनाव बाकी हैं.... । अपने कांग्रेस साथियों को भाजपा सरकार में 14 पद दिलाकर.... 41 प्रतिशत मंत्री पद तो हथिया लिए.... इनमें से कोई भी अभी विधानसभा सदस्य नहीं है....। जब उप चुनाव होंगे... इन्हें जिताने का जिम्मा उन पर ही होगा.... जिन सिंधिया को भाजपा के पुराने नेता अपने बेनर पोस्टर में जगह देने से कतरा रहे हैं....। वो उपचुनाव में कांग्रेस से बागी होकर भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने वालों का कितना साथ देंगे....। अगर ये नव भाजपाई उनके लिए काँटा हैं तो... क्या इन काँटों को निकालने के लिए... उप चुनाव... एक सिद्ध मुहूर्त की तरह आने वाले हैं..? अगर हाँ तो सिंधिया खेमे के मंत्री बने... लोग कितने अपने मंत्री पद को सुरक्षित रख पाएंगे... कितनों को हाथ धोना होगा.... इस पर हर खेमे में चिंतन, मंथन के दौर के साथ.. आवश्यक रण नीति पर विचार विमर्श चल रहा होगा...।
इन सब से कांग्रेस भी अछूती नही रहने वाली... उसकी नजर भाजपा के बागियों पर हो सकती है... जो अपने विधान सभा क्षेत्र से अन्य प्रत्याशियों को... भाजपा के चुनाव चिन्ह पर... चुनाव लड़ते देख कर... क्या योजना बनाते हैं....। वैसे कांग्रेसियों का इस विस काल खंड में दोबारा सरकार बनाना... हाल फिलहाल असंभव लगता है...। क्योंकि भाजपा की सरकार को... अपनी स्थिरता के लिए 24 उपचुनाव में से दस सीटें जीत लेना भी पर्याप्त होगा...। तो क्या करण सिंह वर्मा की प्रेस काँफ्रेंस... भाजपा की रण नीति का हिस्सा थी... या उनका अपना निजी दर्द...। जो भी हो.... टाईगर जिंदा है... तो इसका सबूत देना होगा.... इसकी शुभ घडी उपचुनाव ही होंगे.....।



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