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जानिए कोरोना और हर्ड इम्युनिटी का खेल 

Herd मतलब ग्रुप और immunity मतलब प्रतिरोधक  शक्ति से लिया जाता है। 
कोई इनफेक्शियस बीमारी किसी ग्रुप में कितने लोगों को होगी और कितने लोगों को नहीं होगी यह हार्ड यूनिटी से पता करा जा सकता है।
कोरोनावायरस में 30% से  40% लोगों को हार्ड इम्यूनिटी है मतलब 60 %से 70% परसेंट लोगों को यह बीमारी के होने के अनुमान है।
सरल शब्दों में कहें तो हार्ड इम्यूनिटी अगर ज्यादा है तो वायरस धीरे फैलेगा और अगर  कम है तो ज्यादा फैलेगा।
इसकी रोकथाम के लिए चिकित्सा विज्ञान इस सिद्धांत पर विचार करता है कि अगर कोई बीमारी खतरनाक होती है तो उसके लिए वैक्सीन बनाया जाता है जिससे हार्ड इम्यूनिटी बढ़ जाए और अगर बीमारी खतरनाक नहीं है तथा उसका इलाज संभव है तो ऐसी बीमारियों को फैलने दिया जाता है जिससे कि हार्ड इम्यूनिटी बढ़ जाए।
स्वीडन देश में  कोरोनावायरस को फैलने दिया जा रहा है जिससे कि हार्ड इम्यूनिटी बढ़ जाए कई देशों ने इस मॉडल को गलत बताया है। 
अगर कोरोनावायरस की स्पीड भारत में धीरे है और यह वायरस इतना खतरनाक नहीं है उस स्थिति में  स्वीडन का मॉडल भारत के लिए सही रहेगा।
अब बात करते हैं कि कोरोनावायरस कितना खतरनाक है या फिर सामान्य सर्दी जुखाम जैसा है।
पूरी दुनिया में अभी तक तकरीबन जो टेस्ट हुआ है उसके अनुसार एक करोड़ केस हो चुके हैं जिसमें कि 54 लाख लोग ठीक हो गए है।
पूरी दुनिया से जो डाटा आ रहा है मृत्यु का वह करीबन 5 लाख के आसपास है।
यह जो 5 लाख मृत्यु का आंकड़ा दिया गया है इसे 3 तरीके से समझना चाहिए।

1.  जिन लोगों की मृत्यु केवल और केवल कोरोनावायरस के कारण हुई है उनकी संख्या मात्र 5 से 7 हजार है।

2. जिन लोगों की मृत्यु कोरोनावायरस और अन्य बीमारियां दो या दो से अधिक बीमारियां के कारण हुई हैं यह करीबन 50 से 70% के आसपास है।

3. जिन लोगों की मृत्यु कोरोनावायरस के साथ हुई है मतलब कि उनको कोरोनावायरस था उस दौरान उनकी मृत्यु हो गई।

अब अगर इस वायरस की तुलना सामान्य सर्दी जुखाम और बुखार से की जाए तो यह सर्दी जुखाम से 5 गुना ज्यादा होगी।

तो जो लोग इसको सामान्य सर्दी जुखाम समझ रहे हैं वह थोड़ा ध्यान रखें और जो लोग इसको बहुत ही ज्यादा गंभीर बीमारी समझ रहे हैं वे अपना डर कम करने की कोशिश करें। इस बीमारी को लेकर आंखें बंद करना लापरवाही रहेगी और बहुत ज्यादा डरना बहुत बड़ी गलती रहेगी। वायरस और उसके चरित्र को सही समय से समझना ही समझदारी होगी। अब अपनी समझेंगे कि हमारे देश में जो कोरोनावायरस के केस हैं वह अमेरिका से कम क्यों आ रहे हैं

1. हमारे देश में जनवरी फरवरी और मार्च के आसपास विदेश से आना-जाने वाले यात्रियों की संख्या करीबन 14 से 15 लाख के आसपास रही  वहींअमेरिका USA में यह विदेशी यात्रियों की आवाजाही करीबन इन्हीं महीनों में 4.5 करोड़ के आसपास रही इसमें 43 लाख लोगों ने करीबन चीन से आना-जाना करा।
तो अगर हम माने कि 14 लाख में से करीबन 1000 केस होंगे भारत के पास शुरू में 
वही यह संख्या अमेरिका यूएसए में करीबन दो या तीन लाख रही होगी।
और दूसरा कारण यह हो सकता है भारत में 70 से 80 परसेंट लोग गांव में या छोटे शहरों में रहते हैं वही अमेरिका में 60 से  70 % लोग शहरों में रहते हैं जहां एयरपोर्ट रहता है।
इन आंकड़ों की बात इसलिए की जा रही है कि कम केस को हम अपनी succes ना समझें यह समझें कि यह वायरस 70 परसेंट जनसंख्या तक पहुंचना लगभग निश्चित है बीमारी बहुत खतरनाक नहीं है लेकिन उसमें इलाज और केयर की बहुत जरूरत पड़ेगी कहने का मतलब यह है कि इतनी जल्दी केस आना बंद नहीं होंगे।
जितना साफ-साफ हम लोगों को बताएंगे उतना लोग इस बीमारी को सही से समझ पाएंगे किसी भी तरह की गलत जानकारियां अफवाहों को हवा देंगी। और उन अफवाहों से बचने का सही तरीका यही है कि हम बीमारी को ठीक तरीके से समझ लें। ताकि डर से नहीं हम सावधानी से उसका मुकाबला कर सकें। 

डॉ आशीष आर्य, सीहोर

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परिचय 

डॉ आशीष आर्य क्षेत्र के सुप्रसिद्ध चिकित्सक हैं। साथ ही मेडिकल साईंस की ताजा तरीन जानकारियों से खुद को अप डेट रखते हैं। यही वजह है कि रोग को पहचानने की अद्भुत क्षमता आपके पास रहती है। साथ ही वर्तमान में आप उस चिकिस्तकीय पेनल में शामिल हैं जो देश के कोरोना रोगियो को अपना ऑन लाइन परामर्श उपलब्ध करा रही है। आपके पेशेगत मित्र विदेश में भी हैं जिनसे नित प्रति संपर्क में आप रहते हैं और कोरोना की नूतन जानकारियां आपके पास आती हैं। उसी अनुभव के आधार पर डॉ साहब ने एमपी मीडिया पॉइंट के पाठकों के लिए उक्त आलेख तैयार किया है। आपका एम पी मीडिया पॉइंट पर हार्दिक स्वागत है। 
संपादक
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