ग़ज़ल 

                             लेखिका
अपना  कोई  नहीं  बचा  अब   इस ज़माने में।
अक्सर  गिरी  मैं , दूसरों   को   ही  उठाने  में।

क्या  कुछ  नहीं  किया  मैंने  उसको बनाने में।
वो  तो  लगा   रहा  मेरी   क़िस्मत  मिटाने  में।

दिन - रात  मांगी  हमने   दुआ  जिसके  वास्ते,
कमबख्त  बाज़   आया   नहीं   आज़माने  में।

संघर्ष   मायने   नहीं    रखते   यहाँ   पे   अब,
बस  दाँव - पेंच  लगते  हैं   मंचों  पे  आने  में।

साहित्य  इस  धरा  से  न  गुम  हो  जाये कहीं,
चल अंजु  लग जा  तू  जरा  इसको बचाने में। 

अंजु दास गीतांजलि, पूर्णियाँ (बिहार)

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किसान 

सर पे है कर्जा 
मुश्किलों में जान है 
कितना बेबस 
आज देखो किसान है 

चक्कर पर चक्कर 
लगाते दफ्तरों के 
न ई योजनाओं से 
होता परेसान है 
कितना बेबस 
आज देखो किसान है 

उठी जब जब डोली 
गिरवी हुआ खेत खलिहान है
कभी सूखा कभी बाढ़ 
करता फसल नुकसान है 
कितना बेबस 
आज देखो किसान है

दर्द किसे सुनाएं वो अपनी 
जुवां होते हुए वो बेजुबान है 
कितना बेबस
आज देखो किसान है 

सेठ साहूकार उसी को देते कर्जा
जिस घर में कोई बेटी जवान है 
किसान हौसला रखता बहुत 
नहीं बेचता वो स्वाभिमान है 
किसान से अच्छा नहीं कोई इंसान हैं 
सच कहूं तो वही धरती पर भगवान है ।।

अंजु दास गीतांजलि पूर्णियाँ बिहार

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परिचय

अंजु कुमारी दास गीतांजलि, बैसा ( पूर्णियाँ ) बिहार की रहने वाली हैं। आप सरकारी स्कूल में शिक्षिका का दायित्व निभा रही हैं। साहित्य के प्रति इनका गहरा लगाव है। जिसके कारण यह स्वयम् तो साहित्य सेवा कर ही रही हैं। साथ ही नव पीढी को भी साहित्य की विधाओ का ज्ञान कराने के लिए ऑन लाइन क्लास संचालित करती रही हैं। 
 आपकी हिन्दी ग़ज़ल , कविता ,कहानी ,  भजन , आलेख , समीक्षा लिखना , गीत गाना एवं सुनना , समाज सेवा , ख़ासकर बुजुर्गों का , ग्रामीण कला आदि में विशेष रुचि है। 
आपकी रचनाओं का आकाशवाणी भागलपुर एवं पूर्णिया से निरंतर  प्रसारण होता रहता है। विभिन्न पत्र - पत्रिकाओं एवं विभिन्न समाचार पत्रों  में रचनाएँ प्रकाशित होती रही हैं। टी० वी० चैनलों पर काव्य-पाठ एवं इंटरव्यू भी प्रसारित हुए हैं। आप अंगिकाँ की सहयोगी संपादक भी रही हैं। भारतीय जन लेखक संघ सहित आप अन्य संगठनों से भी जुड़ी हैं। आपके कहानी, कविता, ग़ज़ल आदि के संग्रह भी प्रकाशित हुए है। चार संग्रह शीघ्र प्रकाशित होने जा रहे हैं। आपको साहित्य के अनेक मंचों से सम्मानित किया जा चुका है और कोरोना काल के दौरान आपके साहित्यिक योगदान काफी चर्चा में रहा है।ज्योतिर्गमय अंजुमन साहित्य ग्रुप की आप अध्यक्ष हैं। जहाँ नवांकुरों को अवसर दिया जाता है। आपका एमपी मीडिया पर स्वागत है।
संपादक 
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