लेखिका

ऊं नमःशिवाय.... 

सावन आया संदेशा लाया
शिव पूजन का भाव जगाया

माया की  नगरी  है  प्यारी 
सबसे बढ़कर तुम त्रिपुरारी 

निष्काम रहित भावना जगायें
करूँ मैं पूजन दिल में समायें ।

हे नंदीश्वर औढ़रदानी उमापति
अवचेतन में भी सदा हूँ जपती।

भस्म रमैया हे महाकालेश्वर शिव
दुखहर्ता सुखकर्ता विघ्नहर्ता हैं पुत्र।

उमा भवानी जगदीश्वरी कल्याणी
सदा विराजत शिव संग भवानी ।

सुनें प्रार्थना हे भोले शंकर दानी
तुम समान नहीं कोई औढ़रदानी ।

नमः शिवाय का जाप जो करते
मोहमाया से वो सभी हैं निकलते ।

जल नहीं भांग नहीं मंदिर नहीं पास में
बेलपत्र भी कहाँ आसपास में ?

बस सुमिरन स्वीकार करें प्रभु
सावन मास दुख हरें हे जगत गुरू


आरती रॉय, मनीला (फिलीपींस)

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