लेखिका
नई सुबह बहुत अलग थी। अनजान सी मिहिका चर्चा का विषय बन चुकी थी। मिहिका की वॉल पर अनेक मित्रता अनुरोध उसका इंतजार कर रहे थे। पोस्ट पर कमेंट्स का ढेर लग चुका था और कई शेयर्स हो चुके थे। मुस्कुराती हुई मिहिका का मैसेज बॉक्स संदेशों से अटा हुआ था जिनमें मिहिका की हिम्मत की तारीफ के साथ कुछ सम्पादकों ने उसकी रचनाये भी मांगी थीं।
" मैं बिल्कुल उस तरह की महिला नहीं नितिन जैसा तुमने सोचा था।", मन ही मन कहती हुई मिहिका पोस्ट पर आए कमेंट्स के जबाब देते हुए एक शोषित महिला का चोला ओढ़ कर बैठ गई।
शैलेश तिवारी, संपादक
असलियत
" आप यह क्या कह रहे हैं , मैं उस तरह की महिला नहीं हूँ जैसा आप समझ रहे हैं।", मिहिका ने तुरन्त नितिन को ब्लॉक किया और अपनी चैट सम्पादित करके उसके स्क्रीन शॉट्स सोशल साइट्स पर ' एक साहित्यकार की असलियत ' शीर्षक के साथ पोस्ट कर दिए । पोस्ट के साथ उसने कुछ खास लोगों को टैग भी कर दिया और नेट ऑफ करके आराम से सो गई।नई सुबह बहुत अलग थी। अनजान सी मिहिका चर्चा का विषय बन चुकी थी। मिहिका की वॉल पर अनेक मित्रता अनुरोध उसका इंतजार कर रहे थे। पोस्ट पर कमेंट्स का ढेर लग चुका था और कई शेयर्स हो चुके थे। मुस्कुराती हुई मिहिका का मैसेज बॉक्स संदेशों से अटा हुआ था जिनमें मिहिका की हिम्मत की तारीफ के साथ कुछ सम्पादकों ने उसकी रचनाये भी मांगी थीं।
" मैं बिल्कुल उस तरह की महिला नहीं नितिन जैसा तुमने सोचा था।", मन ही मन कहती हुई मिहिका पोस्ट पर आए कमेंट्स के जबाब देते हुए एक शोषित महिला का चोला ओढ़ कर बैठ गई।
मेघा राठी, भोपाल, मप्र
-------समीक्षा
असलियत....... ये उस लघुकथा का शीर्षक है, जो आज की दुनिया के.. दो सच को एक साथ उजागर करती है....। ठीक सिक्के के दो पहलू की तरह.... रात दिन , सुख दुःख या अंधेरे उजाले जैसे अनेक उदाहरण की तरह....। कथाएँ तो हमारे आसपास की फिजाओं में तैरती हैं... उन्हें पकड़ने का या यूँ कहें समझने का दृष्टि कोण हो....। ऐसा ही इस कथानक के साथ हुआ.... लेखिका की पारखी नजर ने देखा.... उर्वरक मस्तिष्क ने विचार किया.... लेखनी ने पहले शब्द गढ़े... उन्हें वाक्यों में गूँथा... और लघु कथा लिखा गई..... सोशल प्लेटफॉर्म को आधार बना कर.... जिसका पहला बिंदु जो लघु कथा में उल्लेखित है... खुद को शोषित साबित कर... सहानुभूति की सुनामी तैयार करना... रातों रात गुमनाम से नामचीन हो जाना..... जो कि कथानक की नायिका मिहिका ने कर लिया... संभव है कुछ लोग ऐसा हकीकत में कर भी रहे हों.... तो आश्चर्य की बात भी नहीं... प्रसिद्धि पाने के हथकण्डों में से एक यह भी है.... पहले यह राजनैतिक लोगों की या बॉलीवुड के सितारों की संपदा माना जाता था..... लेकिन सोशल मीडिया की लोकप्रियता ने इसे... साहित्य के क्षेत्र में प्रवेश दिला दिया...। और नितिन जैसे लोग... मुफ्त हुए बदनाम.... जैसी स्थिति को प्राप्त हो जाते हैं....। सिक्के का दूसरा पहलू..... यह भी है कि साहित्य क्षेत्र में व्यवसाय के या बाजारवाद के प्रवेश ने.... नवांकुरों के शोषण के रास्ते भी खोल दिये हैं... ऐसी घटनाएं पढ़ने, सुनने में आती भी हैं.....। हर पक्ष अपनी अपनी बुद्धि, स्थिति, सामर्थ्य अनुसार... मन चाहे पहलू का प्रयोग करता है.....। मेघा राठी जी की कलम से जन्मी यह लघु कथा... यही आगाह करती है कि... आप जिस भी स्थिति में हों... पहले तसल्ली कर लें.... आप क्या होने जा रहे हैं...। कहानी आज को न केवल परिभाषित करती है... बल्कि उसकी उचित व्याख्या भी करती है....। लेखिका को बहुत बहुत बधाई... ज्वलंत और आधुनिक विषय... पर कथांकन के लिए.....।शैलेश तिवारी, संपादक



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