लेखिका 


माँ क्या होती है 

भीगी आँखों को मेरी
जो पोछती है,
मेरे अशान्त अन्तर्मन को
टटोलती है।
हर पहर का आरम्भ,
मेरे मन की आस,
प्यारी न्यारी
वह माँ होती है।

जो धूप में छाँव दे
मेरे मन को,
जो गोद में भर ले
मेरे तन को।
जो खुद
नम धरती पर सोये,
मेरे ग़म के
हर अश्क़ को धोये।

गिरती हूँ तो
थामने को माँ होती है,
रात की तन्हाई में
साथ माँ होती है।
अपनी रोटी
मेरी थाली में सरकाये,
मैं पेटभर जब खाऊँ
वह मुस्कुराये।

नयनों में
शीतल धारा जैसी,
गगन में
चमकीले तारा जैसी।
मेरी हकलाती जुबाँ को
शब्द देती है,
माँ, हर गिरते शब्द को
थाम लेती है।

मेरे आँसुओं को
आँचल में पिरोती है,
माँ संसार में
सबसे अनमोल होती है।
अब किन शब्दों में बयाँ करूँ,
कि- माँ क्या होती है?


अनुभूति गुप्ता, लखीमपुर खीरी, उत्तरप्रदेश

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परिचय


अनुभूति गुप्ता, लखीम पुर खीरी , उत्तरप्रदेश की निवासी हैं। उच्च शिक्षित बहुमुखी प्रतिभा की धनी हैं। साहित्य सेवा में कविता, कहानी, लघुकथा, हाइकु, क्षणिकाएं आदि लिखने के साथ प्रकाशन एवं संपादन, स्वतंत्र लेखिका एवं चित्रकार (रेखाचित्र, जलरंग चित्र, पेस्टल ड्राइंग), नेचर फोटोग्राफर, कवर डिज़ाइन एवं logo डिजाइन.. आदि में भी आपको महारत हासिल है। विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में आपकी रचनाएँ प्रकाशित होती रहती हैं। काव्य कोष में भी आपकी कविताओं का संग्रह है।
बाल सुमन (बाल-काव्य संग्रह), कतरा भर धूप (काव्य संग्रह), अपलक (कहानी संग्रह) आदि का प्रकाशन हो चुका है। पत्थर की संवेदनाएं (रेखाचित्र संग्रह) शीघ्र प्रकाशित होने वाला है। आपके रेखा चित्र भी विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहते हैं। आपको अनेक सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। कई पुस्तक एवं पत्रिकाओं का संपादन भी आपके द्वारा किया जा चुका है। एमपी मीडिया पॉइंट पर आपका स्वागत है।
संपादक
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