कीट प्रकोप के बाद बाढ़ से चौपट हुई खरीफ फसल - एसडीएम के आदेश के बाद शुरु हुआ सर्वे का कार्य - एक सप्ताह में पटवारी सर्वे कर सौंपेगे रिपोर्ट 

नसरुल्लागंज, सोनू खंडेलवाल एमपी मीडिया पाइंट  

जून व जुलाई माह सूखा जाने के बाद 20 अगस्त से 22 अगस्त तक हुई झमाझम बारिश से क्षेत्र के नदी-नालो सहित नर्मदा नदी ऊफान पर पहुंच गई। नर्मदा के तटीय गांवो के अलावा संपूर्ण क्षेत्र की फसल बारिश व कीट प्रकोप से नष्ट हो चुकी हैं। लगातार किसानों की मांग के बाद प्रशासन द्वारा अब फसलों के साथ-साथ बाढ़ से हुए नुकसान के आंकलन के लिए समस्त हल्का पटवारियों को अपने-अपने हल्के में सर्वे किये जाने के निर्देश दे दिये गए। जिसके चलतें पटवारियों द्वारा मौके पर पहुंचकर फसलों का सर्वे का कार्य शुरु कर दिया हैं। लेकिन अब सर्वे कार्य कब तक पूर्ण होगा और किसानों को किस हिसाब से फसलों के नुकसान का मुआवजा दिया जायेगा यह अभी भी भविष्य की गर्त में हैं। 
उल्लेखनीय हैं कि इस वर्ष खरीफ फसल पर अचानक से कीट का रोग लगने से खरीफ फसल खड़ी-खड़ी ही सूख गई। जिसने किसानों को चिंता में डाल दिया था। किसान लगातार फसलों का सर्वे कराने की मांग कर ही रहा था। अचानक से मौसम विभाग की चेतावनी के बाद बीते दिवस क्षेत्र सहित प्रदेश में हुई जोरदार बारिश के चलतें बाढ़ के हालात निर्मित हो गए। बीरपुर डेम, बरगी व तवा बांध भराने के बाद गेट खुलते ही नर्मदा नदी ऊफान पर पहुंच गई, जिसने चलतें नर्मदा तटीय गांवो को अपनी चपेट में ले लिया। बाढ़ के हालात का दृश्य देखने के लिए क्षेत्र के भाजपा नेताओं के साथ जिला व स्थानीय प्रशासन द्वारा नाव से प्रभावित गांवो का भ्रमण कर बाढ़ में फंसे लोगों से रूबरू होकर उनके लिए उचित इंतजाम भी किये। सोमवार को नर्मदा तटीय खेतों के हालात तो यह हैं कि बाढ़ का पानी उतरने के बाद किसानों से फसलों का हाल देखते ही नही बन रहा था। नर्मदा के तेज बहाव के चलतें अधिकांश किसानों की फसलें उखडक़र नर्मदा में बह गई। वहीं क्षेत्र के लगभग 50 फीसदी से अधिक गांवो में सोयाबीन, मूंग व उड़द की फसल बरसात के पानी में डूबे रहने से पूरी तरह से बर्बाद हो गई। 
 किसानों ने सौंपा ज्ञापन 
क्षेत्र के गांव इटारसी, इटावाकलां, बगवाड़ा  व गिल्हरी के किसानों ने एक ज्ञापन मुख्यमंत्री सहित प्रशासन को सौंपा। जिसमें उन्होंने मांग की हैं कि उनके द्वारा बोई गई सोयाबीन की फसल में कीटनाशक दवाओं के छिडक़ाव के बाद भी अचानक से फसल पीली पड़ गई। और फसल सूख गई। फसल में दाने का अंकुरण बनना बंद हो गया। फसल की बुआई से लेकर कीटनाशक दवाओं के छिडक़ाव में किसानों का काफी पैसा खर्च हो चुका है। किसान आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं। जिसके चलतें किसानों को फसलों का मुआवजा दिया जाये।  
संपूर्ण फसल व हानि का किया जा रहा सर्वे - 
एसडीएम डीएस तोमर ने जानकारी में बताया कि बाढ़ का पानी उतरने के बाद समस्त हल्का पटवारियों को अपने-अपने हल्कों में पहुंचकर सर्वे किया जाकर सर्वे रिर्पोट शीघ्र अति शीघ्र जमा किये जाने के निर्देश दिये गए। बाढ़ से प्रभावि हुई फसलों के अलावा, मकानों में हुई क्षति, जनहानि, पशु हानि का सर्वे ग्रामीणों व जनप्रतिनिधियों को साथ में रख किया जाये। वहीं मौके पर पंचनामा बनवाकर उस पर ग्रामीणों के हस्ताक्षर लिये जाये, जिससे कि उनके प्रकरण बनाकर अग्रिम कार्रवाई के लिए जिला प्रशासन को प्रेषित किये जा सके। 
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चना बेचे 3 माह बीते, नहीं पहुंची खातों में राशि - आर्थिक तंगियो से परेशान किसानों ने सौंपा एसडीएम को ज्ञापन

नसरुल्लागंज, एमपी मीडिया पाइंट 

127 किसानों के खातो में जमा होना है 1 करोड़ 6 लाख से अधिक की राशि
 नसरुल्लागंज। बीते जून माह में किसानों द्वारा रबी विपणन वर्ष 2020-21 में समर्थन मूल्य पर अपनी चने की उपज का विक्रय क्षेत्र की इटावा व लाडक़ुई शाखा के तहत आने वाले खरीदी केंद्रों पर किया गया था। लेकिन तीन माह बीतने के बाद किसानों के खातों में आज तक चने की राशि जमा नहीं हो सकी। किसान लगातार बैंको में पहुंचकर अपने खातो का बैलेंस चेक कर मायूस होकर लौट रहा हैं। तीन माह से लगातार मायूसी के बाद आखिरकर परेशान किसानों द्वारा सोमवार को एक ज्ञापन एसडीएम व तहसीलदार के नाम सौंपकर चने की राशि दिलाये जाने की मांग की।   इटावा शाखा के तहत आने वाली सेवा सहकारी समिति (खरीदी केंद्र) बालागांव में 8 किसानों को 548438, छिपानेर के 16 किसानों को 1499062, डोभा के 8 किसानों को 953062, इटारसी के 52 किसानों को 2871448, निमोटा के 23 किसानों को 2771437 व बाईबोड़ी के 5 किसानों को 341249 रुपए इसी प्रकार लाडक़ुई केंद्र के 15 किसानों को 1703809 रुपए का भुगतान आज तक नहीं किया गया हैं। इस प्रकार कुल 127 किसानों के खातो में तीन माह बीत जाने के बाद भी एक करोड़ 6 लाख 88 हजार 506 रुपए का भुगतान होना शेष बचा हुआ हैं। इस संबंध में शाखा प्रबंधक राजेंद्र गौर ने बताया कि किसानों की सूची बनाकर वरिष्ठ कार्यालय को प्रेषित की जा चुकी हैं। राशि जमा होते ही किसानों के खातो में समायोजित कर दी जाएगी।
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