कक्काजी कहिन- सुधीर पाठक
परजातंत्र में मजा ही मजा हैं, नाना प्रकार की आजादी। सरकार अपना हिसाब से सोचे ने जनता अपना हिसाब से। दोनो की सोच आपस में टकरावे, सरकार की घोषणा खे जनता माने या न माने पर कानून बनी जावे। तो माननो पडे। उपर से तुर्रो यो कि सरकार जनता की सेवक। मतलब यो की परजातंत्र याने वोटर की रिस्क? योईज परजातंत्र को मजों हैं। अबे देखों अपनी कार, फटफटी स्कूटर, सायकल में हवा भरने वाले दुकान मालिक ने बड़ा-बड़ा अक्षर में लिखवायों हैं, वाहन मालिक अपनी रिस्क पर हवा भरवाए। मतलब साफ दुकानदार की कोई रिस्क नही। फिर लोग पूछे कि दुकानदार कई करे? उत्तर हैं हवा भरे और मीटर से चैक करना का पैसा ले। एक और उदाहरण झेलों- दो से लईके चार पहिया वाहन पार्किंग में खड़ी करों, वहा भी अंग्रेजी में लिखियों हैं- व्हीकल स्टेंड ओन आनर रिस्क। यहा भी वोईज बात वाहन मालिक अपनी जोखिम पर वाहन खडा करे। बापड़ा वाहन मालिक की गाड़ी चोरी चली जावे तो वो हल्लों मचावे भीड जमा होवे और फिर अंतिम व्यक्ति की तरह पुलिस आवे ने झट मामलों सुलझावे, देखों तडाक से अतिक्रमण में रखी गुमटियों का बीच में लिखी सूचना हल्लामचाने वाला खे बतावे ने पुलिस ओसे बोले बाचों (पढों) कई लिखियों हैं। वाहन मालिक पढे व्हीकल स्टेंड ओन आनर रिस्क ऐका बाद मामलों खुद निपटीजावे। या रिस्क अस्पताल में भी हैं, दवाई खई ने रियेक्शन हुई गयों, बेहोशी की दवा दी ने पेशेंट होश में ही नी आयो, सीधी की जगह उलटी आख को आपरेशन करी दियों। घर से बाहर निकलिया ने ऐक्सीडेंट हुई गयों। नोकरी पर गया ने मकान धसी गयों, मतलब यो की रिस्क सब दूर हैं, तो फिर सरकार खे कोसना से कई फायदों। परजातंत्र में सरकार भी वोटर की रिस्क हैं, वोटर खे रिस्क लेनी हैं तो सोची समझी खे रिस्क लो नी तो फिर पछताओगा?
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लेखक
गौरमेंट इस वोटर रिस्क
प्रजातंत्र को योईज कमाल हैं, एक राबड़ी थी, तो दूसरी ईमरती एक ने कुर्सी पर कब्जों जमायों, तो दूसरी ने कुर्सी हिलई दी। अब तम पढिया लिखियां कई भी बोलो पर वोटरहोण तम्हारा हाथ से तो बाजी और पाव का नीचे की जमीन खिसकी गई। सारी गलत फहमी दूर हुई गई कि हम वोटरहोण सरकार बनावा हा। ऐका बाद भी फजीता (परेशानी) की बात या हैं कि गौरमेंट (गवर्नमेंट) इस वोटर रिस्क ....?परजातंत्र में मजा ही मजा हैं, नाना प्रकार की आजादी। सरकार अपना हिसाब से सोचे ने जनता अपना हिसाब से। दोनो की सोच आपस में टकरावे, सरकार की घोषणा खे जनता माने या न माने पर कानून बनी जावे। तो माननो पडे। उपर से तुर्रो यो कि सरकार जनता की सेवक। मतलब यो की परजातंत्र याने वोटर की रिस्क? योईज परजातंत्र को मजों हैं। अबे देखों अपनी कार, फटफटी स्कूटर, सायकल में हवा भरने वाले दुकान मालिक ने बड़ा-बड़ा अक्षर में लिखवायों हैं, वाहन मालिक अपनी रिस्क पर हवा भरवाए। मतलब साफ दुकानदार की कोई रिस्क नही। फिर लोग पूछे कि दुकानदार कई करे? उत्तर हैं हवा भरे और मीटर से चैक करना का पैसा ले। एक और उदाहरण झेलों- दो से लईके चार पहिया वाहन पार्किंग में खड़ी करों, वहा भी अंग्रेजी में लिखियों हैं- व्हीकल स्टेंड ओन आनर रिस्क। यहा भी वोईज बात वाहन मालिक अपनी जोखिम पर वाहन खडा करे। बापड़ा वाहन मालिक की गाड़ी चोरी चली जावे तो वो हल्लों मचावे भीड जमा होवे और फिर अंतिम व्यक्ति की तरह पुलिस आवे ने झट मामलों सुलझावे, देखों तडाक से अतिक्रमण में रखी गुमटियों का बीच में लिखी सूचना हल्लामचाने वाला खे बतावे ने पुलिस ओसे बोले बाचों (पढों) कई लिखियों हैं। वाहन मालिक पढे व्हीकल स्टेंड ओन आनर रिस्क ऐका बाद मामलों खुद निपटीजावे। या रिस्क अस्पताल में भी हैं, दवाई खई ने रियेक्शन हुई गयों, बेहोशी की दवा दी ने पेशेंट होश में ही नी आयो, सीधी की जगह उलटी आख को आपरेशन करी दियों। घर से बाहर निकलिया ने ऐक्सीडेंट हुई गयों। नोकरी पर गया ने मकान धसी गयों, मतलब यो की रिस्क सब दूर हैं, तो फिर सरकार खे कोसना से कई फायदों। परजातंत्र में सरकार भी वोटर की रिस्क हैं, वोटर खे रिस्क लेनी हैं तो सोची समझी खे रिस्क लो नी तो फिर पछताओगा?
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