राजेश शर्मा 

श्रद्धेय महेश श्रीवास्तव जी की दैनिक भास्कर मे प्रकाशित संपादकीय आज याद आ गई। पढ़ा था कभी जिसमें लिखा था कि विज्ञान जगत मे आजकल कृन्तकीकरण (क्लोनिंग) को लेकर बड़ी चर्चा है। वैज्ञानिकों ने एक मादा भेड़ के स्तन की कोशिका और दूसरी मादा भेड़ के डिम्ब को मिलाकर विद्युत प्रवाह किया और नई भेड़ तैयार हो गई।
पुरुष भेड़ें अब काटने के अलावा किस काम आएंगी?
चिंता का कारण यह है कि यदि मनुष्य मे भी कृन्तकीकरण प्रक्रिया चल निकली तो पुरुषों की क्या उपयोगिता रहेगी?
सबने अपने-अपने विवेक से नापा लेकिन फिलहाल जो घटनाक्रम राजस्थान मे हुआ वह क्या जनता अपने पैमाने से नाप नहीं रही क्या ? उलट-पुलट के लिए पूरे देश मे मशहूर हैं राजस्थान के मतदाता।
वंशवाद के आशीर्वादिक नेता सचिन पायलट ने चुनौती दी खुद के ही पार्टी की सरकार को, अपनाया था-- "सिंधियायी" फार्मूले को लेकिन मध्यप्रदेश और राजस्थान की माटी मे बेहद फर्क है। वहां मुख्यमंत्री "अशोक" हैं वीर गाथा सम्राट "अशोक" की सर्वविदित है। 

अकुशल,अनाड़ी,अपरिपक्व,अनुभवहीन  सचिन आखिर नतमस्तक हुए गांधी फैमिली मे जिसने उनके पिताश्री को पहचान दी थी।

सूत्रों के अनुसार उन्हें उनका कद समझाया गया जबकि समाचार पत्रों मे खबर प्रकाशित की गई कि मनाया गया।
एक नेता पुत्र ने मध्यप्रदेश मे जनता से चुनी सरकार को खुद के स्वार्थ चलते गिराया जबकि यह शख्स खुद के ही गड़ मे अपने ही शिष्य से चुनाव हार गया था। समर्थक(छर्रों) से इस्तीफे दिलवाए और घटिया राजनीति का वह उदाहरण पेश किया जैसे मामला रानी झांसी का हो। झांसा देकर फिर उप चुनाव मे गुर्गे लड़ाए जाएंगे लेकिन सत्य तो जनता की ऊंगली से बंधा है.....बटन ही तो दबाना है।
पैसे से चुनाव जीत सकते थे तो खुद ही जीत जाते__छर्रो को कैसे जिताओगे ? हाथ की कलाई नाप लेना या किसी से नपवा लेना__पता चल जाएगा।

खैर बात राजस्थान की चल रही है यह पायलट तो क्या ड्राइवर भी नहीं है। अशोक गहलोत वह व्यक्ति है जिनकी तिरछी नज़र हरेभरे वृक्षों को सुखा देती है।

 सचिन सौभाग्यशाली हैं कि उन्हें गांधी परिवार का आशीर्वाद प्राप्त है क्योंकि वह स्व. राजेश पायलट के पुत्र है जिनकी गहरी मित्रता स्व. राजीव गांधी से रही है।
कुलमिलाकर राजस्थान स्थिर है और राजस्थान राजनीति के मामले मे स्थिर रहेगा।
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