चिटफंड कम्पनियों ने किसानों के हड़पे लाखों रूपये,
सरकार ने भी गेंहू-चने का अबतक नहीं कियाभुगतान,
राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ ने मुख्यमंत्री के नाम दिया कलेक्ट्रेट में ज्ञापन...

सीहोर, एमपी मीडिया पाइंट 

 चिटफंड कम्पनियों ने किसानों को रोजगार देने के नाम पर एजेंट बनाया और किसानों को हीं लुभावने सपने दिखाकर निवेशक बनाकर लाखों  रूपया लूट लिया। प्रदेश सरकार ने भी किसानों से समर्थन मूल्य पर गेंहू चना खरीदा पर अबतक भुगतान नहीं किया। फसल बीमा के नाम  पर प्रीमियम जमा कराया लेकिन किसानों को आज तक खरीब 2019 का बीमा धन नहीं दिया। 
एक्त बात किसानों द्वारा मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन मे कही गई।

सोमवार को राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के सदस्यों ने प्रांतीय उपाध्यक्ष विक्रम सिंह पटेल के नेतृत्व में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नाम डिप्टी कलेक्टर प्रगति वर्मा को दस सूत्रीय मांगों का ज्ञापन दिया। कलेक्ट्रेट में किसानों के समक्ष ज्ञापन का वाचन ब्लाक अध्यक्ष बलराम मुकाती ने किया। उन्होने कहा कि राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ द्वारा किसान-मजदूर हित में दस मांगे सरकार से लगातार की जा रहीं है।   
जिस में किसानों के साथ  धोखाधड़ी करने  वाले सभी चिटफंड कम्पनियों के मालिकों और डायरेक्टरों  पर सख्त  कार्रवाहीं कर निवेशक किसानों का  पैसा वापस दिलाने। अति वर्षा तथा उक्टा रोग एवं पीला मोजक के कारण सोयाबीन उडद , मूंग , अरहर आदि फसलें पूरी तरह से नष्ट हो जाने पर शीघ सर्वे कराकर राहत राशि के साथ बीमा राशि शीघ्र प्रदान किए जाने। समर्थन मूल्य पर खरीदा गया गेंहू  चने का भुगतान शेष रह गए किसानों को किए जाने। फसल बीमा खरीफ 2019 का भुगतान किसानों को किया जाने। खरीब फसल 2019 की केवल 25 प्रतिशत राशि 75 दी गई शेष राहत राशि दिए जाने। किसान कर्ज माफी 2 लाख रुपये किए जाने । 
ग्रामीण क्षेत्रों में जले हुए घरेलू बिजली के केबल ट्रान्सफार्मर बदले जाने। गांवों  में की जा रही बिजली कटोती बंद किए जाने। बिजली के कृषि पम्प कनेक्शन दादा पर दादा के नाम है नामातरण किए जाये । खरीब की फसल सोयाबीन सुखे के कारण या तो सुख गई है या अफलन कि स्थिति निर्मित हुई किसानों को राहत राशि और बीमा राशि  दिए  जाने की मांग की  गई  है। ज्ञापन सौंपने वालों मे राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ जिला मंत्री  सुरेश दुबे,  बाबूलाल पाटीदार, बाबूलाल पटेल, मांगीलाल पटेल, देवकरण सिंह,कन्हैयालाल इटावलिया, देवकरण मेवाड़ा, रामनारायण मीणा सहित अनेक किसान शामिल रहे।
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