किले से गिरी फोरव्हील गाड़िया ।बड़ा हादसा टला ।
दिनेशशर्मा, आष्टा
एमपी मीडिया पाइंट
बीते दिवस जहाँ पूरा शहर भारी बारिश की चपेट में होकर बाड़ ग्रस्त था ।वही शहर में बहुत ऊँचाई लिए स्थित किले की मिट्टी धसकने से ओर साथ मे जैन मंदिर के दीवार गिरने से ऊपर खड़ी चार पहिया वाहनों में से 2 वाहन बड़ी कार ऊपर बहुत ऊँचाई से नीचे गिर गयी ।लेकिन नीचे जगह खाली थी इसलिए कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ ।
नीचे भी निकलने की जगह न होने से ऊपर किले पर से क्रेन लगाकर दोनो गाड़ियों को निकाल गया ।
शुक्रवार-शनिवार की रात जब पूरा शहर बारिश से तरबतर था, और चारो तरफ पानी ही पानी नजर आ रहा था , उस समय अत्यधिक पानी से शनिवार को सुबह सुबह भारी बारिश के चलते किले की मट्टी गीली होकर धसल गयी , ओर साथ में किले स्थित जैन मन्दिर की बाउंड्री दीवाल का एक हिस्सा भी साथ मे मिट्टी के साथ गिर गया । ओर किले पर खड़े दर्जनों वाहनों में से 2 फोरव्हीलर गाड़ियां मट्टी के साथ साथ नीचे आ गयी । जैन मन्दिर से लगे इस कंक्रीट निर्मित जगह एवं मन्दिर जाने वाले दर्शनार्थी यहाँ वाहन खड़े करते है ।, आज जो वाहन गिरे है उसके मालिक वीरेंद्र देशलहरा, नाकोड़ा इंटरप्राइजेस, मनीष सेठिया, पारस जनरल स्टोर, बड़ा बाजार है ,। जिनके वाहन किले से मिट्टी धसलने से नीचे गिरे है ।
बता दें कि किले के चारो तरफ हजारों मकान ऊपरी किले के साथ या बाउंड्री पर अतिक्रमण हो कर बने हुए है ओर उन मकानों में हजारों परिवार रहते है , अपनी जान की परवाह किये बगैर इन लोगो ने प्रशासन की उदासीनता के चलते इस तरह के बे-तरतीब निर्माण कर रखे है ,जो आये दिन किसी बड़ी घटना को निमंत्रण दे रहे है, खास कर बारिश के मौसम में तो इन मकानों ने रह रहे लोगो की जान जोखिम में रहती है ।पर आज भी प्रशासन का ध्यान इस ओर नही है ।हजारों मकान बगेर पट्टे के बने होकर जहाँ रहने वालों की जान के दुश्मन बन हुए है वही सरकार की नीतियों इर नियमो कानूनों का भी खुला मखोल उड़ा रहे है , शंकर मन्दिर मार्ग पर यह नजारा देखा जा सकता है , की लोग किस तरह अपनी जान खतरे में डाल कर रह रहे है ।
किले पर जैन मन्दिर के पास बनी यह रोड पूरी तरह से किले की ऊपरी सतह वाली मिट्टी के किनारे पर बनी हुई है , ऐसे में भारी बारिश में मिट्टी का धसलना स्वभाविक रहता है ।
यह यह जानना भी आवश्यक है कि इतनी जोखिम वाली साथ पर कंक्रीटक पक्का निर्माण किया किसने , ? यह इंजीनियर की काबलियत पर भी प्रश्न चिन्ह लग रहा है ,
यह तो अच्छा रहा कि कल हुए हादसे में जान माल का नुकसान नही हुआ , नही तो बहुत बड़ी घटना घटित हो जाती ।
नीचे भी पर्याप्त जगह न होने से दोनो गाड़ियों को क्रेन से शनिवार को दोपहर के वक्त बहुत आम नागरिकों के सहयोग से निकाला गया ।
दिनेशशर्मा, आष्टा
एमपी मीडिया पाइंट
बीते दिवस जहाँ पूरा शहर भारी बारिश की चपेट में होकर बाड़ ग्रस्त था ।वही शहर में बहुत ऊँचाई लिए स्थित किले की मिट्टी धसकने से ओर साथ मे जैन मंदिर के दीवार गिरने से ऊपर खड़ी चार पहिया वाहनों में से 2 वाहन बड़ी कार ऊपर बहुत ऊँचाई से नीचे गिर गयी ।लेकिन नीचे जगह खाली थी इसलिए कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ ।
नीचे भी निकलने की जगह न होने से ऊपर किले पर से क्रेन लगाकर दोनो गाड़ियों को निकाल गया ।
शुक्रवार-शनिवार की रात जब पूरा शहर बारिश से तरबतर था, और चारो तरफ पानी ही पानी नजर आ रहा था , उस समय अत्यधिक पानी से शनिवार को सुबह सुबह भारी बारिश के चलते किले की मट्टी गीली होकर धसल गयी , ओर साथ में किले स्थित जैन मन्दिर की बाउंड्री दीवाल का एक हिस्सा भी साथ मे मिट्टी के साथ गिर गया । ओर किले पर खड़े दर्जनों वाहनों में से 2 फोरव्हीलर गाड़ियां मट्टी के साथ साथ नीचे आ गयी । जैन मन्दिर से लगे इस कंक्रीट निर्मित जगह एवं मन्दिर जाने वाले दर्शनार्थी यहाँ वाहन खड़े करते है ।, आज जो वाहन गिरे है उसके मालिक वीरेंद्र देशलहरा, नाकोड़ा इंटरप्राइजेस, मनीष सेठिया, पारस जनरल स्टोर, बड़ा बाजार है ,। जिनके वाहन किले से मिट्टी धसलने से नीचे गिरे है ।
बता दें कि किले के चारो तरफ हजारों मकान ऊपरी किले के साथ या बाउंड्री पर अतिक्रमण हो कर बने हुए है ओर उन मकानों में हजारों परिवार रहते है , अपनी जान की परवाह किये बगैर इन लोगो ने प्रशासन की उदासीनता के चलते इस तरह के बे-तरतीब निर्माण कर रखे है ,जो आये दिन किसी बड़ी घटना को निमंत्रण दे रहे है, खास कर बारिश के मौसम में तो इन मकानों ने रह रहे लोगो की जान जोखिम में रहती है ।पर आज भी प्रशासन का ध्यान इस ओर नही है ।हजारों मकान बगेर पट्टे के बने होकर जहाँ रहने वालों की जान के दुश्मन बन हुए है वही सरकार की नीतियों इर नियमो कानूनों का भी खुला मखोल उड़ा रहे है , शंकर मन्दिर मार्ग पर यह नजारा देखा जा सकता है , की लोग किस तरह अपनी जान खतरे में डाल कर रह रहे है ।
किले पर जैन मन्दिर के पास बनी यह रोड पूरी तरह से किले की ऊपरी सतह वाली मिट्टी के किनारे पर बनी हुई है , ऐसे में भारी बारिश में मिट्टी का धसलना स्वभाविक रहता है ।
यह यह जानना भी आवश्यक है कि इतनी जोखिम वाली साथ पर कंक्रीटक पक्का निर्माण किया किसने , ? यह इंजीनियर की काबलियत पर भी प्रश्न चिन्ह लग रहा है ,
यह तो अच्छा रहा कि कल हुए हादसे में जान माल का नुकसान नही हुआ , नही तो बहुत बड़ी घटना घटित हो जाती ।
नीचे भी पर्याप्त जगह न होने से दोनो गाड़ियों को क्रेन से शनिवार को दोपहर के वक्त बहुत आम नागरिकों के सहयोग से निकाला गया ।


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