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हद से ज़्यादा तुम किसी से बात मत करना।
वक्त पर घर आना , ज्यादा रात मत करना।
फिक्र होती है तुम्हारी , हर घड़ी मुझको-
बात बढ़ जाए वैसे हालात मत करना।
जिसका हल हो ही न,तुम ऐसा वैसा कुछ भी-
उस जगह पर सच कहूँ सावालात मत करना।
क्या पता कब कौन क्या से क्या समझ बैठे-
तुम ऐसी कोई भी खुरआफात मत करना।
शैल तुमसे जो मिलेगा प्रेम से मिलना-
जो न चाहे मिलना , तुम मुलकात मत करना।
हद से ज़्यादा तुम किसी से बात मत करना।
वक्त पर घर आना , ज्यादा रात मत करना।
फिक्र होती है तुम्हारी , हर घड़ी मुझको-
बात बढ़ जाए वैसे हालात मत करना।
जिसका हल हो ही न,तुम ऐसा वैसा कुछ भी-
उस जगह पर सच कहूँ सावालात मत करना।
क्या पता कब कौन क्या से क्या समझ बैठे-
तुम ऐसी कोई भी खुरआफात मत करना।
शैल तुमसे जो मिलेगा प्रेम से मिलना-
जो न चाहे मिलना , तुम मुलकात मत करना।



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