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हद  से  ज़्यादा तुम किसी से बात मत करना।
वक्त  पर  घर  आना , ज्यादा रात मत करना।

फिक्र  होती   है   तुम्हारी ,  हर   घड़ी मुझको-
बात   बढ़  जाए   वैसे   हालात   मत  करना।

जिसका हल हो ही न,तुम ऐसा वैसा कुछ भी-
उस जगह पर सच कहूँ सावालात मत करना।

क्या  पता  कब  कौन क्या से क्या समझ बैठे-
तुम  ऐसी  कोई  भी  खुरआफात  मत करना।

शैल   तुमसे   जो   मिलेगा   प्रेम   से  मिलना-
जो न चाहे  मिलना , तुम मुलकात मत करना।

शैलेश प्रजापति शैल..✍️जमालपुर (बिहार)

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