फिर जनता के साथ इतनी सख्ती क्यों...!!
कोविड-19: आम नागरिकों और सत्ताधारियों के बीच अंतर क्यों ?
कोरोना संक्रमण को लेकर जिस तरह से शासन, प्रशासन के नुमाइंदे शोशल मीडिया पर, ओर रूबरू होकर बचाव के तरीकों को आवश्यक रूप से अपनाने का ढिंढोरा पीटते रहते है क्या स्वयं पालन कर रहे है? यह बड़ा सवाल है? इसके उत्तर स्वरूप आम जनता अब कर रही है-------
आम पब्लिक को पर्याप्त शारीरिक दूरी, रखते हुए मास्क, सेनेटाइजर आदि का सख्ती से आम दिनचर्या में भी इस्तेमाल करने का पाठ पढ़ाया जा रहा है ,
आम लोगो के लिए नियम सख्त है - कोरोना संक्रमण, कोविड- 19 से बचाव के लिए उल्लेखित, सभी साधनों, ओर नियमों का पालन अति आवश्यक है। इनके बगैर , तथा नियमानुसार उपस्थिति के अलावा कोई भी आयोजन , कार्यक्रम किसी भी स्थिति में सम्पन्न नहीं होगा । इस तरह आम पब्लिक को शासन की पूरी नियमावली पढ़ाई और बताई जा रही है, पालन नहीं होने पर कार्यवाही भी सम्भव हो जाती है,
परन्तु जिस तरह से राजनीतिक कार्यक्रम और सभाएं, व प्रशासनिक आयोजन हो रहे है इन सब को देखते हुए , आम लोगो के लिए भी गाईड लाइन का पालन करते हुए आयोजन- कार्यक्रम सम्पन्न करने की अनुमति मिलना चाहिए , ऐसा अब जनता में सुगबुगाहट सुनाई देने लगी है ।
गाइडलाइंस का पालन नहीं होने पर कार्यवाही होने की शर्त पर अब सांस्कृतिक, व धार्मिक आयोजनों की स्वीकृति मिलना चाहिए ।
क्या नेताओं , व अधिकारियों, के लिए अलग से नियम बने है, क्योंकि यह इसलिए महसूस हो रहा है कि राजनीतिक, और प्रशासनिक आयोजन ,कार्यक्रम बिंदास, सम्पन्न हो रहे है, यहाँ कोई नियम, कानून नजर ही नही आता है, कोरोना की नियमावली दूर तक नजर नहीं आती है ।
क्या नेताओं और अधिकारियों के लिए नियम अलग है ? ओर जनता के लिए अलग से, इस तरह का दोगला व्यवहार क्यों ?
आम जनता क्या अब मौलिक अधिकार से वंचित हो गयी? या भारत वासी नही रही ? सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक संगठनों को अनुमति न मिलना , और राजनीतिक आयोजन बेखौफ़ सम्पन्न होने का कौनसी नियमावली में लिखा है ?
इस समय गणेश उत्सव चल रहा है, रमजान पर्व भी चल रहा है , जनता अपने घरों में इन त्योहारों को मना रही है , प्रशासन के सख्त निर्देशों का पालन करते हुए यह त्योहार सम्पन्न होने जा रहे है। लेकिन लगातार राजनीतिक कार्यक्रमों में किस तरह नियमावलियों का मखौल उड़ रहा है किसी से भी छिपा नहीं है, मंत्री-संत्रियों के कार्यक्रम ऐसे हो रहे है , देखकर ऐसा लगता ही नहीं कि हम भारत वासी कोरोना कोविड-19 जैसी भयावह संक्रमण वाली बीमारी से जूझ रहे हैं।
वही आम जनता और सत्ताधारियों के मध्य चल रहे नियमों के भारी अंतर के कारण अब सांस्कृतिक कर्मियों, मूर्तिकारों, ओर भी वे लोग जो धार्मिक त्योहारों पर विभिन तरीको से रोजी रोटी कमाते है'' 'की,... हालतें अवसादग्रस्त हो चुकी है । आखिर अपना जीवन यापन कैसे करें? वहीं धर्मावलम्बियों की भावनाओ को भी ठेस पहुंच रही है ।
प्रदेश के मुखिया ,आम जनता की परेशानियों, एवं आवश्यकताओं को समझे, मुख्यमंत्री शिवराजसिंह जी चौहान आपका ध्यान इस तरफ अपेक्षित है।
नियम सबके लिए समान होना चाहिए । क्योंकि-- यह लोकतांत्रिक राष्ट्र है , सभी को समान अधिकार प्राप्त है। तो सभी पर समान नियम- कानून लागू है । फिर जनता के साथ इतनी सख्ती क्यों..!!
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दिनेशशर्मा
कोविड-19: आम नागरिकों और सत्ताधारियों के बीच अंतर क्यों ?
कोरोना संक्रमण को लेकर जिस तरह से शासन, प्रशासन के नुमाइंदे शोशल मीडिया पर, ओर रूबरू होकर बचाव के तरीकों को आवश्यक रूप से अपनाने का ढिंढोरा पीटते रहते है क्या स्वयं पालन कर रहे है? यह बड़ा सवाल है? इसके उत्तर स्वरूप आम जनता अब कर रही है-------
शासन, प्रशासन, ओर सत्ताधिशों से एक निवेदन:--
जिस तरह से आये दिन देखने मे आ रहे कि शासन, प्रशासन और सभी तरह के राजनीतिक कार्यक्रम, आयोजन, 50 लोगो की उपस्थिति क्या बल्कि भारी संख्या, ओर बड़े बड़े जनता के हुजूम में किये जा रहे है, ओर शहर में अन्य सामाजिक संस्थाओं को पूरी तरह से शोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराया जा रहा है ,आम पब्लिक को पर्याप्त शारीरिक दूरी, रखते हुए मास्क, सेनेटाइजर आदि का सख्ती से आम दिनचर्या में भी इस्तेमाल करने का पाठ पढ़ाया जा रहा है ,
आम लोगो के लिए नियम सख्त है - कोरोना संक्रमण, कोविड- 19 से बचाव के लिए उल्लेखित, सभी साधनों, ओर नियमों का पालन अति आवश्यक है। इनके बगैर , तथा नियमानुसार उपस्थिति के अलावा कोई भी आयोजन , कार्यक्रम किसी भी स्थिति में सम्पन्न नहीं होगा । इस तरह आम पब्लिक को शासन की पूरी नियमावली पढ़ाई और बताई जा रही है, पालन नहीं होने पर कार्यवाही भी सम्भव हो जाती है,
परन्तु जिस तरह से राजनीतिक कार्यक्रम और सभाएं, व प्रशासनिक आयोजन हो रहे है इन सब को देखते हुए , आम लोगो के लिए भी गाईड लाइन का पालन करते हुए आयोजन- कार्यक्रम सम्पन्न करने की अनुमति मिलना चाहिए , ऐसा अब जनता में सुगबुगाहट सुनाई देने लगी है ।
गाइडलाइंस का पालन नहीं होने पर कार्यवाही होने की शर्त पर अब सांस्कृतिक, व धार्मिक आयोजनों की स्वीकृति मिलना चाहिए ।
क्या नेताओं , व अधिकारियों, के लिए अलग से नियम बने है, क्योंकि यह इसलिए महसूस हो रहा है कि राजनीतिक, और प्रशासनिक आयोजन ,कार्यक्रम बिंदास, सम्पन्न हो रहे है, यहाँ कोई नियम, कानून नजर ही नही आता है, कोरोना की नियमावली दूर तक नजर नहीं आती है ।
क्या नेताओं और अधिकारियों के लिए नियम अलग है ? ओर जनता के लिए अलग से, इस तरह का दोगला व्यवहार क्यों ?
आम जनता क्या अब मौलिक अधिकार से वंचित हो गयी? या भारत वासी नही रही ? सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक संगठनों को अनुमति न मिलना , और राजनीतिक आयोजन बेखौफ़ सम्पन्न होने का कौनसी नियमावली में लिखा है ?
इस समय गणेश उत्सव चल रहा है, रमजान पर्व भी चल रहा है , जनता अपने घरों में इन त्योहारों को मना रही है , प्रशासन के सख्त निर्देशों का पालन करते हुए यह त्योहार सम्पन्न होने जा रहे है। लेकिन लगातार राजनीतिक कार्यक्रमों में किस तरह नियमावलियों का मखौल उड़ रहा है किसी से भी छिपा नहीं है, मंत्री-संत्रियों के कार्यक्रम ऐसे हो रहे है , देखकर ऐसा लगता ही नहीं कि हम भारत वासी कोरोना कोविड-19 जैसी भयावह संक्रमण वाली बीमारी से जूझ रहे हैं।
वही आम जनता और सत्ताधारियों के मध्य चल रहे नियमों के भारी अंतर के कारण अब सांस्कृतिक कर्मियों, मूर्तिकारों, ओर भी वे लोग जो धार्मिक त्योहारों पर विभिन तरीको से रोजी रोटी कमाते है'' 'की,... हालतें अवसादग्रस्त हो चुकी है । आखिर अपना जीवन यापन कैसे करें? वहीं धर्मावलम्बियों की भावनाओ को भी ठेस पहुंच रही है ।
प्रदेश के मुखिया ,आम जनता की परेशानियों, एवं आवश्यकताओं को समझे, मुख्यमंत्री शिवराजसिंह जी चौहान आपका ध्यान इस तरफ अपेक्षित है।
नियम सबके लिए समान होना चाहिए । क्योंकि-- यह लोकतांत्रिक राष्ट्र है , सभी को समान अधिकार प्राप्त है। तो सभी पर समान नियम- कानून लागू है । फिर जनता के साथ इतनी सख्ती क्यों..!!
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