कैप्टेन साठे और को पायलट अखिलेश कुमार को आदरांजली एवं शोक के साथ!   

डॉ नरेन्द्र सिंह

 कोझिकोड हादसे में कैप्टेन साठे और उनके साथियों की पूरे मीडिया में तारीफ हो रही है और शोक व्यक्त किया जा रहा है।
काम भी उनका बहादुरी और प्रत्युत्पन्नमति की अभूतपूर्व मिसाल है,जिसने हताहतों की संख्या में काफी कम कर दी।
जैसा कि बताया जा रहा है,कैप्टन साठे ने फ्यूल टैंक खाली कर दिया,और लैंडिंग के पहले इंजिन बंद कर दिया ,जिससे विमान में आग नहीं लगी और हताहतों की संख्या हादसे की गंभीरता के अनुपात में काफी कम रही,सभी को अश्रुपूरित श्रंद्धांजली एवं समस्त स्टाफ की बहादुरी को नमन! जिन्होंने अपनी ट्रेनिंग में सिखाये गए आपातकालीन उपायों का समय रहते ततपरता से उपयोग किया!
इस पूरे प्रकरण में कहीं से भी कोई आवाज नहीं उठी, कि क्या कोई लापरवाही होने की संभावना भी हो सकती है? 
      अब यदि हम तुलना करें,मेडीकल प्रोफेसन से तो आप ने अपनी जान की बाजी लगा कर ,अपने संचित ज्ञान का उपयोग कर के,त्वरित निर्णय ले कर ,आपात स्थिति में ,मरीजों की जान बचाने की कोशिश की हो,और वह पूरी तरह सफल न हो पाई हो,तो सम्पूर्ण मीडिया में और लोगों की जुबान पर एक ही बात सबसे पहले आती है,डॉक्टरों की लापरवाही!
   हर मरीज,हर आपरेशन डॉक्टर के लिए एक आपातकालीन लैंडिंग की तरह ही होता है,जहाँ इस बात की भी पूरी संभावना है कि,मनुष्य की दैहिक कार्यप्रणाली, विज्ञान के उन सिद्धांतों के अनुरूप काम भी न करे जो हमें पढ़ाए गए हैं।ऐसे में लैंडिंग से पहले,ईंधन गिरा देने,इंजिन बंद कर देने जैसे सैद्धांतिक उपाय,जैसे कि कार्डियक मसाज, वेंटिलेटर आदि कारगर हो ही जाएं कहा नहीं जा सकता!
  यदि किसी महामारी के दौरान यदि आप 80 प्रतिशत लोगों को बचा लेते हैं और अन्य को नहीं,तो भी आप लापरवाह ही कहे जाएंगे!
  आज कोरोना काल में 200 से ज्यादा डॉक्टरों की मौत ,कोरोना की फ्लाइट को उड़ाते उड़ाते हो गई है,लेकिन कहीं भी संवेदना के दो शब्द नहीं,उल्टे कुछ प्रदेश की सरकारें तो इसके लिए डॉक्टर्स की लापरवाही को ही कारण ठहरा रही हैं,कुछ को,आंकड़ों पर भरोसा ही नहीं,कुछ इसे उनके कार्य और प्रोफेसन से जुड़े हाज़ार्ड मान रही हैं-ये तो होना ही था।
ऐसे में जब कोई भी सीमा रक्षक शहीद होता है या इस तरह के प्लेन क्रैश में पायलट्स की जान जाती है तो क्या वह प्रोफ़ेसनल हाज़ार्ड नहीं?
     सभी शहीदों और हताहतों से क्षमा सहित,हम आपके योगदान और समर्पण का पूरा सम्मान करते हैं,लेकिन दुःख इस बात का है,हम डॉक्टर्स के प्रति नजरिए को बदलने का प्रयास कब होगा?
हमें तो हर बीमारी के उपचार और आपरेशन के दौरान ,असंभावित लेंडिंग का खतरा हमेशा बना रहता है!

   डॉ नरेन्द्र सिंह, भोपाल (मध्यप्रदेश)

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परिचय 

डा. नरेंद्र सिंह जी भोपाल के एक प्रतिष्ठित अस्पताल मे डारेक्टर होकर हड्डी रोग विशेषज्ञ हैं। आप समय-समय पर अपने अनुभव मीडिया को प्रेषित करते हैं। लेखनी आपको कर्तव्य की तरह प्यारी है।  आपके लेख प्रतिष्ठित अखबारों  और पत्र-पत्रिकाओं मे प्रकाशित होते रहते हैं।एमपी मीडिया पाइंट पर आपका तहदिल से स्वागत है।
संपादक
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