क्या अनिल टुटेजा की अवैध विदेश यात्राओं से प्रदेश को होगा खतरा?
शिकायतकर्ता देवजी भाई पटेल को ही प्रशासन ने थमा दिया नोटिस
वर्तमान परिदृस्य में छत्तीसगढ़ प्रशासन में कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है। सुशासन की राह पर चलने वाले और सच्चाई को प्रदर्शित करने वालों को ही प्रशासन द्वारा परेशान किया जा रहा है। खासकर भ्रष्टाचार में लिप्त आरोपियों के खिलाफ सबूत पेश करने वालों को प्रशासन द्वारा नोटिस थमा कर सवाल जवाब किये जा रहे हैं। 36 हजार के नान घोटाले के प्रमुख आरोपी अनिल टुटेजा के मामले में तो यही हो रहा है। टुटेजा के खिलाफ एक के बाद एक सबूत मिलने के बावजूद प्रशासन कार्रवाई करने के बदले शिकायतकर्ताओं पर ही उंगली खड़ी कर रहा है। भारत के इतिहास में ऐसा मामला पहली बार हुआ होगा जब शिकायतकर्ता के खिलाफ ही प्रशासन ने नोटिस थमा दिया हो, ''कि आपको दस्तावेज कहां से प्राप्त हुए''। बात है छत्तीसगढ़ के छत्तीस हजार करोड़ के नान घोटालों के आरोपी अनिल कुमार टुटेजा की, जो कि वर्तमान में उद्योग विभाग में ज्वाइंट सेक्रेटरी के पद पर पदस्थ हैं। मेरे द्वारा पूर्व आलेखों में मैंने इंगित किया था कि कैसे अनिल टुटेजा की वर्तमान सरकार में तूती बोलती है और सूत्रों के मुताबिक अति महत्वपूर्ण पदस्थापना में इनकी राय रहती है। ऐसे आरोपियों को वर्तमान सरकार में बचाने के लिए कनिष्ठ और अपात्र अधिकारियों को ऊपर की पोस्ट देकर और उपकृत कर अपने हिसाब से उस अधिकारी से काम कराया जा रहा है। इसका एक और उदाहरण देवजी भाई पटेल के मामले में दिखता है। देवजी भाई पटेल पूर्व विधायक ने अपने स्तर पर कुछ छानबीन करके अनिल टुटेजा के खिलाफ कुछ कागजात एकत्र किये और अनिल टुटेजा की शिकायत भारत सरकार की संस्थाओं में की। अब इस मामले में राज्य सरकार का रूख बड़ा ही हास्यास्पद है। सरकार ने आरोपी अधिकारी के खिलाफ विवेचना करने की जगह शिकायतकर्ता श्री देवजी भाई पटेल पर धारा 160 द.प्र.स. पर नोटिस थमा दिया। यह नोटिस कार्यालय नगर पुलिस अधीक्षक सिविल लाईन रायपुर से पत्र क्रमांक रीडर/सीएसपी/सिला/शिसा/07-बी/2020 दिनांक 04/08/2020 एवं पत्र क्रमांक रीडर/सीएसपी/सिला/शिसा/07-ए/2020 दिनांक 04/08/2020 को देवजी भाई पटेल को कथन देने उपस्थित होने बावत् का नोटिस दिया। इस नोटिस में स्पष्ट तौर पर लिखा है कि आपके विरूद्ध अनिल टुटेजा के द्वारा किये गये शिकायत जांच क्रम में अनिल कुमार टुटेजा से संबंधित दस्तावेज आपको कहा से प्राप्त हुए के संबंध में कथन लिया जाना है। अब यह तो देश का पहला मामला होगा जिसमें गंभीर आरोप के साथ संलग्न दस्तावेज की जांच करने की बजाय शिकायतकर्ता के ऊपर दवाब बनाया जा रहा है कि वो दस्तावेज कहा से लाये। श्री देवजी भाई पटेल के आरोप अत्यंत ही गंभीर किस्म के हैं। दरअसल हर सरकार कर्मचारी को विदेश यात्रा करने से पहले सरकार से एनओसी या विभागीय अनुमति लेनी होती है। सर्विस रूल्स एवं ऑर्डर क्रमांक 466-पीएआर (टीआरजी)/एचटी/0/3टी-112/97 दिनांक 18/07/2002 के आदेश में केन्द्र सरकार के सरकारी कर्मचारी स्वयं के व्यय पर विदेश जाने को लेकर पांच नियमावली दी हैं। जैसे सक्षम प्राधिकारी से स्वीकृत अवकाश, एनेक्चर-1 प्रारूप के हिसाब से, अवकाश लेने के बाद कैडर को जानकारी एनेक्चर-2 के प्रारूप में देना, जैसी प्रमुख नियमावली हैं। श्री देवजी भाई पटेल ने शिकायत में स्पष्ट लिखा है कि अनिल टुटेजा ने उपरोक्त नियमावली का पालन न करते हुए चुपचाप कई विदेश यात्राऐं कीं। इसकी सत्यता राज्य शासन द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री श्री रमन सिंह के विधानसभा प्रश्न के उत्तर में जानकारी के रूप में सूची दी, जिसमें अनिल कुमार टुटेजा का नाम नही था। अनिल कुमार टुटेजा ने सक्षम प्राधिकारी से बगैर कोई अनुमोदन लिये 2013 से 2019 तक 7-8 देशों की यात्राऐं चुपचाप कर डाली। ये 7-8 देश टैक्स हैवन, अवैध हथियार प्रदायक के लिये बदनाम है। यह प्रकरण बहुत ही गंभीर किस्म का है। नान घोटाले के आरोपी अनिल कुमार टुटेजा ने कई बार बिना अनुमति लिये इन देशों की यात्राऐं कर डाली। आखिर चुपचाप ऐसी विदेश यात्राओं का अभिप्राय क्या हो सकता है। राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से यह बहुत ही विस्फोटक मामला है। छत्तीसगढ़ राज्य नक्सली घटनाओं के कारण संवेदनशील राज्यों की सूची में आता है। ऐसे में एक आईएएस अधिकारी एक के बाद एक चुपचाप विदेश यात्राऐं किस प्रलोभन से करता है, इसकी सघन जांच करने की आवश्यकता है। कही प्रदेश के खिलाफ ऐसी कोई साजिश तो नही रची जा रही है जिससे जानमाल का खतरा हो जाये। इन अवैध विदेश यात्राओं से इन्होंने अपनी जमानत की नियमावली को तोड़ा है। इससे इनकी जमानत शीघ्र ही निरस्त हो जायेगी। अब यह मामला केन्द्रीय गृह मंत्रालय के पाले में जाता दिखाई दे रहा है। स्पष्ट होना चाहिए कि देश व प्रदेश के खिलाफ क्या साजिश रची जा रही है। निश्चित ही इसकी सघन जांच होनी चाहिए एवं मामले को किसी परिणीति तक पहुंचाना चाहिए।
शिकायतकर्ता देवजी भाई पटेल को ही प्रशासन ने थमा दिया नोटिस
विजया पाठक
एडिटर, जगत विज़नवर्तमान परिदृस्य में छत्तीसगढ़ प्रशासन में कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है। सुशासन की राह पर चलने वाले और सच्चाई को प्रदर्शित करने वालों को ही प्रशासन द्वारा परेशान किया जा रहा है। खासकर भ्रष्टाचार में लिप्त आरोपियों के खिलाफ सबूत पेश करने वालों को प्रशासन द्वारा नोटिस थमा कर सवाल जवाब किये जा रहे हैं। 36 हजार के नान घोटाले के प्रमुख आरोपी अनिल टुटेजा के मामले में तो यही हो रहा है। टुटेजा के खिलाफ एक के बाद एक सबूत मिलने के बावजूद प्रशासन कार्रवाई करने के बदले शिकायतकर्ताओं पर ही उंगली खड़ी कर रहा है। भारत के इतिहास में ऐसा मामला पहली बार हुआ होगा जब शिकायतकर्ता के खिलाफ ही प्रशासन ने नोटिस थमा दिया हो, ''कि आपको दस्तावेज कहां से प्राप्त हुए''। बात है छत्तीसगढ़ के छत्तीस हजार करोड़ के नान घोटालों के आरोपी अनिल कुमार टुटेजा की, जो कि वर्तमान में उद्योग विभाग में ज्वाइंट सेक्रेटरी के पद पर पदस्थ हैं। मेरे द्वारा पूर्व आलेखों में मैंने इंगित किया था कि कैसे अनिल टुटेजा की वर्तमान सरकार में तूती बोलती है और सूत्रों के मुताबिक अति महत्वपूर्ण पदस्थापना में इनकी राय रहती है। ऐसे आरोपियों को वर्तमान सरकार में बचाने के लिए कनिष्ठ और अपात्र अधिकारियों को ऊपर की पोस्ट देकर और उपकृत कर अपने हिसाब से उस अधिकारी से काम कराया जा रहा है। इसका एक और उदाहरण देवजी भाई पटेल के मामले में दिखता है। देवजी भाई पटेल पूर्व विधायक ने अपने स्तर पर कुछ छानबीन करके अनिल टुटेजा के खिलाफ कुछ कागजात एकत्र किये और अनिल टुटेजा की शिकायत भारत सरकार की संस्थाओं में की। अब इस मामले में राज्य सरकार का रूख बड़ा ही हास्यास्पद है। सरकार ने आरोपी अधिकारी के खिलाफ विवेचना करने की जगह शिकायतकर्ता श्री देवजी भाई पटेल पर धारा 160 द.प्र.स. पर नोटिस थमा दिया। यह नोटिस कार्यालय नगर पुलिस अधीक्षक सिविल लाईन रायपुर से पत्र क्रमांक रीडर/सीएसपी/सिला/शिसा/07-बी/2020 दिनांक 04/08/2020 एवं पत्र क्रमांक रीडर/सीएसपी/सिला/शिसा/07-ए/2020 दिनांक 04/08/2020 को देवजी भाई पटेल को कथन देने उपस्थित होने बावत् का नोटिस दिया। इस नोटिस में स्पष्ट तौर पर लिखा है कि आपके विरूद्ध अनिल टुटेजा के द्वारा किये गये शिकायत जांच क्रम में अनिल कुमार टुटेजा से संबंधित दस्तावेज आपको कहा से प्राप्त हुए के संबंध में कथन लिया जाना है। अब यह तो देश का पहला मामला होगा जिसमें गंभीर आरोप के साथ संलग्न दस्तावेज की जांच करने की बजाय शिकायतकर्ता के ऊपर दवाब बनाया जा रहा है कि वो दस्तावेज कहा से लाये। श्री देवजी भाई पटेल के आरोप अत्यंत ही गंभीर किस्म के हैं। दरअसल हर सरकार कर्मचारी को विदेश यात्रा करने से पहले सरकार से एनओसी या विभागीय अनुमति लेनी होती है। सर्विस रूल्स एवं ऑर्डर क्रमांक 466-पीएआर (टीआरजी)/एचटी/0/3टी-112/97 दिनांक 18/07/2002 के आदेश में केन्द्र सरकार के सरकारी कर्मचारी स्वयं के व्यय पर विदेश जाने को लेकर पांच नियमावली दी हैं। जैसे सक्षम प्राधिकारी से स्वीकृत अवकाश, एनेक्चर-1 प्रारूप के हिसाब से, अवकाश लेने के बाद कैडर को जानकारी एनेक्चर-2 के प्रारूप में देना, जैसी प्रमुख नियमावली हैं। श्री देवजी भाई पटेल ने शिकायत में स्पष्ट लिखा है कि अनिल टुटेजा ने उपरोक्त नियमावली का पालन न करते हुए चुपचाप कई विदेश यात्राऐं कीं। इसकी सत्यता राज्य शासन द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री श्री रमन सिंह के विधानसभा प्रश्न के उत्तर में जानकारी के रूप में सूची दी, जिसमें अनिल कुमार टुटेजा का नाम नही था। अनिल कुमार टुटेजा ने सक्षम प्राधिकारी से बगैर कोई अनुमोदन लिये 2013 से 2019 तक 7-8 देशों की यात्राऐं चुपचाप कर डाली। ये 7-8 देश टैक्स हैवन, अवैध हथियार प्रदायक के लिये बदनाम है। यह प्रकरण बहुत ही गंभीर किस्म का है। नान घोटाले के आरोपी अनिल कुमार टुटेजा ने कई बार बिना अनुमति लिये इन देशों की यात्राऐं कर डाली। आखिर चुपचाप ऐसी विदेश यात्राओं का अभिप्राय क्या हो सकता है। राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से यह बहुत ही विस्फोटक मामला है। छत्तीसगढ़ राज्य नक्सली घटनाओं के कारण संवेदनशील राज्यों की सूची में आता है। ऐसे में एक आईएएस अधिकारी एक के बाद एक चुपचाप विदेश यात्राऐं किस प्रलोभन से करता है, इसकी सघन जांच करने की आवश्यकता है। कही प्रदेश के खिलाफ ऐसी कोई साजिश तो नही रची जा रही है जिससे जानमाल का खतरा हो जाये। इन अवैध विदेश यात्राओं से इन्होंने अपनी जमानत की नियमावली को तोड़ा है। इससे इनकी जमानत शीघ्र ही निरस्त हो जायेगी। अब यह मामला केन्द्रीय गृह मंत्रालय के पाले में जाता दिखाई दे रहा है। स्पष्ट होना चाहिए कि देश व प्रदेश के खिलाफ क्या साजिश रची जा रही है। निश्चित ही इसकी सघन जांच होनी चाहिए एवं मामले को किसी परिणीति तक पहुंचाना चाहिए।


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