लेखक
कोरोना का प्रश्न:
बोल रे मानव, तेरी औकात क्या है?
एक लघुतम वायरस
जो नग्न आंखों से न देता है दिखाई
वह चुनौती दे रहा है
और तू भय की अंधेरी कोठरी में
एक दुर्बल क्षीण तन लेकर खड़ा है।
काँपतीं तेरी शिराएं
हांफती सब कोशिकाएं
बोल रे मानव, तेरी औकात क्या है?
मनुष्य का उत्तर:
पूछते हो प्रश्न तो उत्तर सुनो यह-
यही मानव है कि जिसने
सृष्टि नित नूतन रची है।
धरा, अंबर, ग्रह, समंदर
कौन ऐसी जगह जो इससे बची है।
पर्वतों पर यह चढ़ा है
आँधियों से यह लड़ा है
प्रबल झंझावात में भी
अडिग तनकर यह खड़ा है।
चर-अचर सबसे पृथक
यह सर्वदा दिखता रहा है।
ध्वंस से बढ़कर
नवल निर्माण यह लिखता रहा है।
एक लघुतम वायरस की भी चुनौती
को किया स्वीकार इसने।
कौन ऐसा युग रहा है
जबकि मानी हार इसने।
एक जीवन में कई संग्राम यह लड़ता रहा है
और अपनी महामेधा से विजय पथ पर
सतत बढ़ता रहा है।
क्षणिक है इसकी समस्या
अभी औषधि अस्त्र हित
यह कर रहा कुछ दिन तपस्या।
हस्तगत ज्यों ही इसे यह अस्त्र होगा।
वायरस निज प्राण से निर्वस्त्र होगा।
सूर्यकुमार पांडेय
--------------------परिचय
सूर्यकुमार पांडेय लखनऊ उत्तर प्रदेश के निवासी हैं। देश विदेश के कवि सम्मेलनों के मंच पर आपकी गरिमामयी उपस्थिति सभी चाहते हैं। आप मूलतः हास्य व्यंग्य के कवि के रूप में प्रतिष्ठित हैं। टीवी के " वाह वाह क्या बात है" के मंच पर भी अपनी रचनाओं से दर्शकों को हंसगुल्ले परोस चुके हैं। इसके अलावा आप ने हास्य-व्यंग्य के साथ साथ बालकविताएँ भी लिखी हैं, जो कई राज्यों के पाठ्यक्रमों में शामिल हैं। इन्होंने अनेक गीत भी लिखे हैं। कुछ धारावाहिकों के शीर्षक गीत आपकी कलम से जन्में हैं। उसके साथ ही संजीदा कविताओं का सृजन भी आपके द्वारा किया जाता रहा है। अभी तक आपकी कुल 23 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं और पाठक वर्ग में अपनी गहरी पैठ बना चुकी हैं। आपका एम पी मीडिया पॉइंट पर हार्दिक स्वागत है।संपादक


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