श्रम कानूनों में किए गए बड़े बदलाव,
हड़ताल पर जाने के साठ दिन पहले देना होगा नोटिस
लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी बीते दिन तीन श्रम बिल पास किये गए हैं। श्रम कानून मरण बड़े बदलाव वाले ये तीन बिल विपक्ष के सदन से वाक् आउट किए जाने के दौरान पारित किए गए हैं। बिलो के पारित हो जाने के बाद विभिन्न श्रम संगठनों ने जहाँ इनका विरोध किया है। वहीं भारतीय मजदूर संघ ने भी बिल पारित करने में जल्दबाजी की जाने की बात कही है। जबकि सरकार इन बिलों को नियोक्ता और श्रमिक दोनों के लिए लाभदायक बता रही है। इन बिलों की मुख्य बातों को समझते हैं।
बिना मंजूरी 300 से कम कर्मचारी वाली कंपनियों कर सकेंगे छंटनी-
अब जिन कंपनियों में कर्मचारियों की संख्या 300 से कम है, वे सरकार से मंजूरी लिए बिना ही कर्मचारियों की छंटनी कर सकेंगी। अब तक ये प्रावधान सिर्फ उन्हीं कंपनियों के लिए था, जिसमें 100 से कम कर्मचारी हों। अब नए बिल में इस सीमा को बढ़ाया गया है।
छंटनी या शटडाउन की इजाज़त उन्हीं ऑर्गनाइज़ेशन को दी जाएगी, जिनके कर्मचारियों की संख्या पिछले 12 महीने में हर रोज़ औसतन 300 से कम ही रही हो। सरकार अधिसूचना जारी कर इस न्यूनतम संख्या को बढ़ा भी सकती है।
इसके अलावा ये बिल कहता है कि किसी भी संगठन में काम करने वाला कोई भी कामगार बिना 60 दिन पहले नोटिस दिए हड़ताल पर नहीं जा सकता. फिलहाल ये अवधि छह हफ्ते की है।
ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशन बिल- 2020
ये बिल कंपनियों को छूट देगा कि वे अधिकतर लोगों को कॉन्ट्रैक्ट बेसिस पर नौकरी दे सकें। साथ ही कॉन्ट्रैक्ट को कितनी भी बार और कितने भी समय के लिए बढ़ाया जा सकेगा। इसके लिए कोई सीमा तय नहीं की गई है। वो प्रावधान भी अब हटा दिया गया है, जिसके तहत किसी भी मौजूदा कर्मचारी को कॉन्ट्रैक्ट वर्कर में तब्दील करने पर रोक थी।
महिलाओं के लिए काम के घंटे सुबह 6 बजे से लेकर शाम 7 बजे के बीच ही रहेगे। शाम 7 बजे शाम के बाद अगर काम कराया जा रहा है, तो सुरक्षा की जिम्मेदारी कंपनी की होगी।
कोई भी कर्मचारी एक हफ्ते में छह दिन से ज्यादा काम नहीं कर सकता। ओवरटाइम कराने पर उस दिन का दोगुना पैसा देय होगा। बिना अपॉइंटमेंट लेटर के किसी की भर्ती नहीं की जा सकेगी।
हड़ताल पर जाने के साठ दिन पहले देना होगा नोटिस
दिल्ली, एमपी मीडिया पॉइंट
लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी बीते दिन तीन श्रम बिल पास किये गए हैं। श्रम कानून मरण बड़े बदलाव वाले ये तीन बिल विपक्ष के सदन से वाक् आउट किए जाने के दौरान पारित किए गए हैं। बिलो के पारित हो जाने के बाद विभिन्न श्रम संगठनों ने जहाँ इनका विरोध किया है। वहीं भारतीय मजदूर संघ ने भी बिल पारित करने में जल्दबाजी की जाने की बात कही है। जबकि सरकार इन बिलों को नियोक्ता और श्रमिक दोनों के लिए लाभदायक बता रही है। इन बिलों की मुख्य बातों को समझते हैं। इंडस्ट्रियल रिलेशन बिल- 2020
बिना मंजूरी 300 से कम कर्मचारी वाली कंपनियों कर सकेंगे छंटनी-
अब जिन कंपनियों में कर्मचारियों की संख्या 300 से कम है, वे सरकार से मंजूरी लिए बिना ही कर्मचारियों की छंटनी कर सकेंगी। अब तक ये प्रावधान सिर्फ उन्हीं कंपनियों के लिए था, जिसमें 100 से कम कर्मचारी हों। अब नए बिल में इस सीमा को बढ़ाया गया है।
छंटनी या शटडाउन की इजाज़त उन्हीं ऑर्गनाइज़ेशन को दी जाएगी, जिनके कर्मचारियों की संख्या पिछले 12 महीने में हर रोज़ औसतन 300 से कम ही रही हो। सरकार अधिसूचना जारी कर इस न्यूनतम संख्या को बढ़ा भी सकती है।
इसके अलावा ये बिल कहता है कि किसी भी संगठन में काम करने वाला कोई भी कामगार बिना 60 दिन पहले नोटिस दिए हड़ताल पर नहीं जा सकता. फिलहाल ये अवधि छह हफ्ते की है।
ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशन बिल- 2020
ये बिल कंपनियों को छूट देगा कि वे अधिकतर लोगों को कॉन्ट्रैक्ट बेसिस पर नौकरी दे सकें। साथ ही कॉन्ट्रैक्ट को कितनी भी बार और कितने भी समय के लिए बढ़ाया जा सकेगा। इसके लिए कोई सीमा तय नहीं की गई है। वो प्रावधान भी अब हटा दिया गया है, जिसके तहत किसी भी मौजूदा कर्मचारी को कॉन्ट्रैक्ट वर्कर में तब्दील करने पर रोक थी।
महिलाओं के लिए काम के घंटे सुबह 6 बजे से लेकर शाम 7 बजे के बीच ही रहेगे। शाम 7 बजे शाम के बाद अगर काम कराया जा रहा है, तो सुरक्षा की जिम्मेदारी कंपनी की होगी।
कोई भी कर्मचारी एक हफ्ते में छह दिन से ज्यादा काम नहीं कर सकता। ओवरटाइम कराने पर उस दिन का दोगुना पैसा देय होगा। बिना अपॉइंटमेंट लेटर के किसी की भर्ती नहीं की जा सकेगी।


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