लेखिका
जाने क्यूँ
ये भाव ,,
कभी कभी ___
अवरुद्ध से हो जाते हैं ...
शायद ,,
इन भावों को भी चाहिए होता है
कुछ देखभाल
कुछ अपनापन ...
उपेक्षित किये जाने पर
साथ छोड़ जाते हैं ये
फिर ,,,,,,
बिखराव सा महसूस होता है ..
और फिर,
एक मंथन ______
सत्य और भरम के बीच
कुछ दुविधाएं भी
होना ,
या फिर नहीं होना ...
मन कहता है
क्यूँ होता है ऐसा
हर बार
बार बार ...
विचारों का
बनना.. बिगड़ना ...
कुछ चूक
या फिर ,,,
इस अंतर्मन का
बेवजह का विलाप...
और फिर
एक ,,,
जबरदस्त अट्टहास
अपनी विवशताओं पर ..।
नमन् तो है ही
उस जीवटता को
कितनी जटिलताओं के बावजूद
स्थिर रहता है ,,,
तन कर खड़ा रहता है
उस बूढ़े ,,,
विशालकाय
बरगद के माफ़िक ....
आँधी तूफान
यहाँ तक की
ओलावृष्टि के बावजूद
बिल्कुल ही प्रभावहीन
चित्त का बदलाव
आसान भी तो नहीं न ...
ये झेल चुके होते हैं
कितने झंझावात ...
इतना आसान तो नहीं होता है न ..
इस मन का ,,
इस बरगद का
अकंपित
यानि कि ,,,,
जड़त्व हो जाना ........
संपादक
#मन_का_जड़त्व_हो_जाना ....
जाने क्यूँ
ये भाव ,,
कभी कभी ___
अवरुद्ध से हो जाते हैं ...
शायद ,,
इन भावों को भी चाहिए होता है
कुछ देखभाल
कुछ अपनापन ...
उपेक्षित किये जाने पर
साथ छोड़ जाते हैं ये
फिर ,,,,,,
बिखराव सा महसूस होता है ..
और फिर,
एक मंथन ______
सत्य और भरम के बीच
कुछ दुविधाएं भी
होना ,
या फिर नहीं होना ...
मन कहता है
क्यूँ होता है ऐसा
हर बार
बार बार ...
विचारों का
बनना.. बिगड़ना ...
कुछ चूक
या फिर ,,,
इस अंतर्मन का
बेवजह का विलाप...
और फिर
एक ,,,
जबरदस्त अट्टहास
अपनी विवशताओं पर ..।
नमन् तो है ही
उस जीवटता को
कितनी जटिलताओं के बावजूद
स्थिर रहता है ,,,
तन कर खड़ा रहता है
उस बूढ़े ,,,
विशालकाय
बरगद के माफ़िक ....
आँधी तूफान
यहाँ तक की
ओलावृष्टि के बावजूद
बिल्कुल ही प्रभावहीन
चित्त का बदलाव
आसान भी तो नहीं न ...
ये झेल चुके होते हैं
कितने झंझावात ...
इतना आसान तो नहीं होता है न ..
इस मन का ,,
इस बरगद का
अकंपित
यानि कि ,,,,
जड़त्व हो जाना ........
सुष्मिता महथा, दिल्ली
-------------------------परिचय
सुष्मिता महथा 'सुमी' विज्ञान से स्नातक.. दिल्ली निवासी हैं। आप सभी विधाओं में साहित्य सृजन करना पसंद करती हैं परंतु अतुकांत कविताएं और ग़ज़ल लिखना मुझे ज़्यादा पसंद है । आपको कई प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। आपके चार साझा संग्रह.. खिली धूप हैं हम ..ग़ुलनार ..मधुबन ..अंज़ुमन में मेरी रचनाएँ.. आदि प्रकाशित हो चुके हैं। आपका एमपी मीडिया पॉइंट पर स्वागत है।संपादक


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