चौथे दिन उतरा बाढ़ का पानी,
4 गांवों में दिखी भीषण तबाही,
कही शासकीय भवन तो कही नाव में को मनाया रखा आशियाना,
इंतजार शासन की मदद का 
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नसरूल्लागंज, एमपी मीडिया पाइंट 

बाढ़ की भीषण तबाही का मंजर चौथे दिन बाढ़ का पानी उतरने के बाद साफ नजर आया। जो मंजर बाढ़ प्रभावित गांव सातदेव, मंडी, सीलकंठ,छीपानेर, चोरसाखेड़ी में था ठीक वैसे ही हालात नीलकंठ,छिदगांव काछी, चमेटी व मंझली में दिखाई दिए। तबाही के इस मंजर को देख ग्रामीण भी भविष्य की चिंता में डूबे हुए नजर आए। उनकी आंखों से झरते आंसू बर्बादी की दास्ता को बया कर रहे थे। चार दिनों तक पीडि़त ग्रामीणों ने कही शासकीय भवनों तो कही नाव को ही अपना आशियाना बनाकर रात गुजारी। रिपोर्टर ने जब पीडि़तों से चर्चा की तो उन्होंने बताया कि बाढ़ की विभिषिका तो हमने 1963, 1965 व 1973 में भी देखी देखी थी। लेकिन जो बाढ़ 2020 में आई उसने हमारे जख्मों को और हरा कर गई। 
शनिवार 29 अगस्त को नर्मदा का जल स्तर बढऩे से आई बाढ़ ने क्षेत्र के एक दर्जन से भी अधिक गांवों को अपनी चपेट में ले लिया। प्रशासन ने मुस्तैदी के साथ ग्रामीणों को तो बाढ़ से बचा लिया लेकिन उनके भविष्य को नही बचा सका। चार दिन में बाद जब बाढ़ का पानी नीलकंठ, छिदगांव काछी, चमेटी, मंझली से उतरा तो ग्रामीण अपने बर्बाद आशियानों को देख आंसू बहाता हुआ नजर आया। 
चार दिनों तक नाव को बनाए रखा आशियाना 
नीलकंठ के पीडि़त सुरेश केवट ने बताया कि हमारे गांव का एक भी मकान बाढ़ से अछूता नही बचा। गांव में जल स्तर 10 फीट के लगभग था और घर के सिर्फ कबेलू और छत ही नजर आ रहे थे गांव के 145 मकान के 873 लोगों ने इन चार दिनों तक नाव को ही अपना आशियाना बनाए रखा। हालांकि प्रशासन ने इस गांव के ग्रामीणों के लिए विस्थापन हेतु ग्राम चींच के हायर सेकेण्डरी स्कूल में व्यवस्था की थी। लेकिन ग्रामीणों ने अपने घरों को छोडऩा उचित नही समझा और अपने डूबे हुए मकानों के पास ही नाव में आशियाना बनाकर चार दिनों तक रहे। नीलकंठ में 
अनाज, मवेशी व जानवर सहित सैकड़ों परिवारों की गृहस्थी बाढ़ बहा ले गई। इसी पंचायत के तहत आने वाले 950 की आबादी वाले चमेटी गांव के 60 फीसदी आबादी बाढ़ से प्रभावित नजर आई। 
मंझली के ग्रामीणों ने बिताई पंचायत भवन में रात 
225 की आबादी वाले मंझली गांव के 50 मकान पूरी तरह से डूबा हुए थे। यहां के ग्रामीणों को नजदीकी गांव तिलाडिय़ा के पंचायत भवन में शरण दी गई। थी। मंगलवार को जब बाढ़ का पानी उतरा तो ग्रामीण बर्बादी के मंजर को देखकर सहमें हुए नजर आए। किसी का आशियाना बाढ़ कहा ले गई तो किसी के यहां वर्ष भर की व्यवस्था को तबाह कर दिया। यहां के ग्रामीण नागेश दुबे, श्याम सुन्दर, जगदीश व अनसुईया बाई ने बताया कि बाढ़ ने हमें 5 वर्ष पीछे कर दिया है। अब तो शासन की मदद ही एक मात्र उम्मीद का सहारा बची है। 
छिदगांव काछी में 85 मकानों को किया बाढ़ ने तबाह 
2750 की आबादी वाले ग्राम छिदगांव काछी का पुराना गांव बाढ़ में पूरी तरह से जलमग्न था। यहां 85 मकानों को बाढ़ अपनी आगौश में ले चुकी थी। ग्रामीणों को नये छिदगांव में शरण दी गई थी। मंगलवार को यहां भी कुछ मकान अभी तक डूबे हुए नजर आए। घर धराशाही हो चुके थे तो किसी के यहां गृहस्थी का सामान तक नजर नही आया। 
पंचायत एवं राजस्व अमले को दिए निर्देश 
इस मामले में एसडीएम डी.एस.तोमर के द्वारा विकास खंड स्तर पर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में तैनात किए गए अधिकारियों, राजस्व एवं पंचायत अमले को निर्देशित करते हुए कहा है कि अपने-अपने प्रभार क्षेत्र में समस्त कर्मचारी सात दिवस तक पूरी इमानदारी के साथ अपनी सेवाएं दे। साथ ही उन्होंने ग्रामीणों को भोजन सामग्री एवं शुद्ध जल उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए है। ग्रामीणों को हिदायत भी दी गई है कि वह पानी का उपयोग गर्म करके ही करे। 

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