लेखिका
खून के रिश्ते
स्वार्थ के रिश्ते
आदर्शवादी रिश्ते
भावनात्मक रिश्ते
रिश्ते कैसे भी हों.. रिश्ते होते हैं। नन्हें पौधे को सींचने के लिए खाद और पानी की ज़रूरत है वहीं रिश्ते को सींचने के लिए प्रेम, लगाव और समय की ज़रूरत है। ये ज़रूरत हर तरह के रिश्ते की होती है चाहे वो खून का रिश्ता हो, आदर्शवादी या भावनात्मक रिश्ता हो। स्वार्थ के रिश्ते की बात मैं नहीं करूँगी क्योंकि उनका कोई अस्तित्व ही नहीं।
#आखिर_क्यों_टूट_जाते_हैं_रिश्ते
#अहम --- सबसे बड़ा कारण है रिश्ते के टूटने का अहम। जब अहम हावी होता है तब इंसान अपनी गलती मानना नहीं चाहता। सामने वाले पर उँगली उठा कर खुद को सही साबित करने के लिए जी तोड़ कोशिश कर लेता है और इसके चलते भूल जाता है कि जिस रिश्ते को वक़्त और प्रेम के साथ सींचा था वो रिश्ता टूट रहा है। अलग हो जाने कर बाद अहसास होता है पर अहम इतना हावी होता है कि दोनों बात नहीं करना चाहते और इस तरह एक लम्बी खामोशी के बाद आखिर वो मज़बूत रिश्ता टूट जाता है।
#बात_न_करना --- कभी कभी दोनों में से कोई एक अंतर्मुखी स्वभाव का होता है और बात करने में संकोची स्वभाव के कारण खुल कर अपनी समस्या कह नही पाता। वो जानता है उसके साथ ये समस्या है पर उसे चाह कर भी दूर नहीं कर पाता। अगर उसका साथी अपने साथी की इस समस्या को पहचानता हो तो रिश्ते बिगड़ने से पहले सुधारे जा सकते हैं पर अगर एक की खामोशी पर दूसरा भी खामोश रह जाए तो नतीजा वही... रिश्ते का आखिरकार टूट जाना।
#उम्मीद_और_सच्चाई --- किसी भी रिश्ते में दो व्यक्ति हमेशा एक जैसे नहीं होते। परिस्थितियां भी भिन्न भिन्न होती हैं। समस्याएं भी अलग अलग होती हैं। विवाद भी हो सकते हैं। रिश्ते हमेशा खुशी या सुख ही नहीं देते। रिश्ते उलझनें भी देते हैं। ऐसे में परिस्थिति से भाग जाना रिश्ते के टूटने का बड़ा कारण बनता है। ऐसे में चाहिए कि एक साथी दूसरे को सच्ची उम्मीद दे और साथ दे जिससे दूसरे साथी का भरोसा मज़बूत हो और आपसी समझ का विकास हो।
#इंकार --- रिश्ता गहराई से बनाया और निभाया जाना आवश्यक है। यदि आप अपने रिश्ते को स्वीकारने से डरते हैं, समाज या परिवार के आगे उसे नकारते हैं तो नकारात्मक ऊर्जा आपके रिश्ते को नकारात्मकता से भर देती है और नतीजा आप वो रिश्ता खो देते हैं। अपने रिश्ते को स्वीकारिये और उसे पनपने दीजिए।
#प्राथमिकता --- अक्सर रिश्ता अपने मुकाम लर पहुँच कर अपनी रफ्तार खो देता है। जीवन शैली के आगे प्राथमिकताएं बदलने लगती हैं। और यहीं से रिश्ते की मजबूती कमज़ोर पड़ने लगती है। ये जानना हम सबके लिए बेहद ज़रूरी है कि जब पतंग ऊँचे आकाश पर हो तब डोर को मजबूती से थामे रखना बेहद ज़रूरी है और इसलिए रिश्ते की प्राथमिकता को पूर्वव्रत बनाये रखने के लिए पहले से ज़्यादा समय और लगाव की आवश्यकता होती है और इसके अभाव में रिश्ता कमज़ोर पड़ने लगता है।
#प्यार --- सबसे आखिर में रिश्ते के लिए जो जरूरी है वो है प्यार। समय के साथ अक्सर ऐसा होता है कि ज़िम्मेदारियाँ बढ़ने पर प्रेम का प्रतिशत कम होने लगता है। ऐसे में ज़रूरी होता है ये जानना कि प्रेम क्यों कम होने लगा। मिलकर बैठकर बात करने से हम ये जान सकते हैं कि किन कारणों से प्रेम कम होने लगा या खत्म होने लगा। कोशिश करनी चाहिए उन कारणों को मिलकर दूर करने की और अपने जीवन में प्रेम को वापिस लाने की।
प्रेम को अपने जीवन में वापिस कैसे लाएं इस पर चर्चा एक अलग लेख के द्वारा आपके सामने रखूँगी।
संपादक
#रिश्ते
खून के रिश्ते
स्वार्थ के रिश्ते
आदर्शवादी रिश्ते
भावनात्मक रिश्ते
रिश्ते कैसे भी हों.. रिश्ते होते हैं। नन्हें पौधे को सींचने के लिए खाद और पानी की ज़रूरत है वहीं रिश्ते को सींचने के लिए प्रेम, लगाव और समय की ज़रूरत है। ये ज़रूरत हर तरह के रिश्ते की होती है चाहे वो खून का रिश्ता हो, आदर्शवादी या भावनात्मक रिश्ता हो। स्वार्थ के रिश्ते की बात मैं नहीं करूँगी क्योंकि उनका कोई अस्तित्व ही नहीं।
#आखिर_क्यों_टूट_जाते_हैं_रिश्ते
#अहम --- सबसे बड़ा कारण है रिश्ते के टूटने का अहम। जब अहम हावी होता है तब इंसान अपनी गलती मानना नहीं चाहता। सामने वाले पर उँगली उठा कर खुद को सही साबित करने के लिए जी तोड़ कोशिश कर लेता है और इसके चलते भूल जाता है कि जिस रिश्ते को वक़्त और प्रेम के साथ सींचा था वो रिश्ता टूट रहा है। अलग हो जाने कर बाद अहसास होता है पर अहम इतना हावी होता है कि दोनों बात नहीं करना चाहते और इस तरह एक लम्बी खामोशी के बाद आखिर वो मज़बूत रिश्ता टूट जाता है।
#बात_न_करना --- कभी कभी दोनों में से कोई एक अंतर्मुखी स्वभाव का होता है और बात करने में संकोची स्वभाव के कारण खुल कर अपनी समस्या कह नही पाता। वो जानता है उसके साथ ये समस्या है पर उसे चाह कर भी दूर नहीं कर पाता। अगर उसका साथी अपने साथी की इस समस्या को पहचानता हो तो रिश्ते बिगड़ने से पहले सुधारे जा सकते हैं पर अगर एक की खामोशी पर दूसरा भी खामोश रह जाए तो नतीजा वही... रिश्ते का आखिरकार टूट जाना।
#उम्मीद_और_सच्चाई --- किसी भी रिश्ते में दो व्यक्ति हमेशा एक जैसे नहीं होते। परिस्थितियां भी भिन्न भिन्न होती हैं। समस्याएं भी अलग अलग होती हैं। विवाद भी हो सकते हैं। रिश्ते हमेशा खुशी या सुख ही नहीं देते। रिश्ते उलझनें भी देते हैं। ऐसे में परिस्थिति से भाग जाना रिश्ते के टूटने का बड़ा कारण बनता है। ऐसे में चाहिए कि एक साथी दूसरे को सच्ची उम्मीद दे और साथ दे जिससे दूसरे साथी का भरोसा मज़बूत हो और आपसी समझ का विकास हो।
#इंकार --- रिश्ता गहराई से बनाया और निभाया जाना आवश्यक है। यदि आप अपने रिश्ते को स्वीकारने से डरते हैं, समाज या परिवार के आगे उसे नकारते हैं तो नकारात्मक ऊर्जा आपके रिश्ते को नकारात्मकता से भर देती है और नतीजा आप वो रिश्ता खो देते हैं। अपने रिश्ते को स्वीकारिये और उसे पनपने दीजिए।
#प्राथमिकता --- अक्सर रिश्ता अपने मुकाम लर पहुँच कर अपनी रफ्तार खो देता है। जीवन शैली के आगे प्राथमिकताएं बदलने लगती हैं। और यहीं से रिश्ते की मजबूती कमज़ोर पड़ने लगती है। ये जानना हम सबके लिए बेहद ज़रूरी है कि जब पतंग ऊँचे आकाश पर हो तब डोर को मजबूती से थामे रखना बेहद ज़रूरी है और इसलिए रिश्ते की प्राथमिकता को पूर्वव्रत बनाये रखने के लिए पहले से ज़्यादा समय और लगाव की आवश्यकता होती है और इसके अभाव में रिश्ता कमज़ोर पड़ने लगता है।
#प्यार --- सबसे आखिर में रिश्ते के लिए जो जरूरी है वो है प्यार। समय के साथ अक्सर ऐसा होता है कि ज़िम्मेदारियाँ बढ़ने पर प्रेम का प्रतिशत कम होने लगता है। ऐसे में ज़रूरी होता है ये जानना कि प्रेम क्यों कम होने लगा। मिलकर बैठकर बात करने से हम ये जान सकते हैं कि किन कारणों से प्रेम कम होने लगा या खत्म होने लगा। कोशिश करनी चाहिए उन कारणों को मिलकर दूर करने की और अपने जीवन में प्रेम को वापिस लाने की।
प्रेम को अपने जीवन में वापिस कैसे लाएं इस पर चर्चा एक अलग लेख के द्वारा आपके सामने रखूँगी।
महक छाबड़ा, नई दिल्ली
--------------परिचय
मधु छाबड़ा 'महक' एम. ए. हिंदी साहित्य से हैं। स्वछंद लेखन, छंदमुक्त कविताएं, मुक्तक, ग़ज़ल, गीत, लघुकथा, कहानी, उपन्यास , लेख, संस्मरण आदि विधाओं में साहित्य सेवा कर रही हैं। आपका उपन्यास -- 'सफ़र- मेरी रूह का' सहित 8 साझा संग्रह में कविताएं, कहानियां, ग़ज़लें, संस्मरण प्रकाशित हो चुके हैं। साहित्य सागर राष्ट्रीय मंच द्वारा 'काव्य सागर सम्मान', साहित्य सागर सम्मान', युग सुरभि सम्मान, साहित्य सागर सारथी सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है। आपका एमपी मीडिया पॉइंट पर स्वागत है।संपादक


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