लेखिका

दिल पर क्या गुजरती है......


 दिल पर क्या गुज़रती है।
तुम तो कुछ भी कह जाते हो,
और जरा ना पछताते हो,
आँखों की गंगा जमुना जब,
रुख़सार भिगो उतरती है
तुम क्या जानों उस वक्त,
दिल पर क्या गुजरती है।

पेट भरा हो,प्यास बुझी हो,
तो आती है नींद सुहानी,
और यहाँ आँसू पीकर जब
मेरी सारी रात गुजरती है
तुम क्या जानो उस वक्त,
दिल पर क्या गुजरती है।

तेरी ख़ातिर खुद को बदला,
बदल दिए सब शौक पुराने,
अपनों को भी भूल गई मैं,
फिर भी सुनने पड़ते ताने,
तीखे तीखे शब्द वाण की,
जब वर्षा घायल करती है।
तुम क्या जानो उस वक्त,
दिल पर क्या गुजरती है।

मेरे अपनों के आगे जब,
नीचा तुम मुझे दिखाते हो,
और शान से कहते फिरते,
ना तुम झूठा प्यार जताते हो।
दिल से लंबी आह निकलती है
लेकिन तुम क्या जानों
दिल पर क्या गुजरती है।

रानी सोनी "परी"

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 परिचय

 रानी सोनी"परी"  जयपुर राजस्थान की निवासी हैं। साहित्य के प्रति आकर्षण ने साहित्य सृजन शुरू करवा दिया। अभी तक आपके लगभग आठ साझा संकलन प्रकाशित हो चुके हैं। विभिन्न पत्र पत्रिकाओं मे भी रचनाएँ प्रकाशित होती रहती हैं। आपको विभिन्न साहित्यिक मंच से सम्मान प्राप्त हो चुका है। आपका एमपी मीडिया पॉइंट पर स्वागत है।
संपादक

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