लेखिका

 दिल का कैनवस 

---------------------
ऊब गयी हूँ मैं,
ये ब्लैक एंड वाइट् जिंदगी से
अब कुछ रंगीन ख़्वाब सजाने है
इस दिल के कैनवस पर। 
बिखेरने है कुछ सतरंगी रंग
रंगना है छोटी छोटी ख़्वाहिशों को
तोड़ कर रंगहीन बेड़ियों को,
अब जीना है रंगीन जीवन ।

लाल रंग से रंगना है अंतर्मन,
ताकि महकती रहूँ, मुहब्बत की खुशबू से।
नीले रंग से रंग दूँगी हर सपने को,
ताकि हौसला बने आसमाँ को छूने का,
फिर रंग दूँगी पीले रंग से अपने दिल को
हिम्मत, उम्मीद,  सकारात्मकता  के,
खूबसूरत गोलाकार में।
दिल के इसी गोलाकार आकृति में
छिटक दूँगी मैं कुछ लाल छींटे,
जो प्रतीत होगी सूर्य की लालिमा सी
ये महज एक गोलाकार नही
हर रोज दिल में उदित होने वाला सूर्य है
जो देगा उम्मीद नित आगे बढ़ने की। 

और आखिर में
दिल के कैनवास पे वो रंग बिखेरने है
जो गुज़रे कल की
दर्द भरी यादों से दूर ले जाकर
मेरे आज के क्षितिज पर,
मेरे आने वाले कल को रौशन कर सके।


कोमल 'वाणी'

---------------

परिचय

कोमल वाणी, फरीदाबाद, हरियाणा की निवासी हैं। अभी छात्र जीवन में हैं लेकिन साहित्य के प्रति आकर्षण ने अब समर्पण का भाव धारण कर लिया है। जिसका परिणाम 
एकल काव्य संग्रह के रूप में "अधूरी ख़्वाहिश"  बनकर पाठकों के हाथों में पहुँच चुका है। इसके अलावा लगभग 8 साँझा संग्रह भी प्रकाशित हो चुके हैं। आपको विभिन्न साहित्यिक मंचों से सम्मानित किया जा चुका है। आपका एमपी मिडिया पॉइंट पर स्वागत है। 
संपादक
Share To:

Post A Comment: