क्या धन्नासेठ नहीं चल सकते डीडब्लूपीएस के रास्ते..!!
ग्रंथों में गुरू ब्रह्मा, गुरू गोविंद और शिक्षक दिवस पर राष्ट्रनिर्माता की उपाधी पाने वाले निजी स्कूल के शिक्षक भोग रहे भारी आर्थिक संकट,
देहली वल्र्ड पब्लिक स्कूल के संचालकों की त्रीमूर्ति ने सरस्वती विद्या मंदिर को सौपा 51 हजार का चेक, स्कूल ने दानहेतु की थी अपील..
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एक तरफ गुरू को ब्रह्मा की उपमा दी जाती हैं, तो दूसरी तरफ गुरू को गोविंद तक पहुंचने का माध्यम भी बताया गया। शिक्षक दिवस पर शिक्षकों की शान में बहुत कुछ कहा जाता हैं, लेकिन कोरोना काल में शिक्षकों की स्थिति सामने हैं, भारी आर्थिक संकट झेल रहे निजी स्कूलों के सामने अब जीवन मरण का प्रश्र हैं। रोटी सबकों चाहिए, लेकिन सरकार के पास यह सोचने का वक्त नही कि मध्यम, सामान्य मध्यम और लघु मध्यम वर्ग किस तरह जीवन यापन कर रहे हैं। बिजली का बिल करंट मार रहा हैं, इस वर्ग को राशन भी नही मिलता। हर सुविधा इस वर्ग को खरीदना पड़ती हैं। ऐसे में स्कूल का बंद होना, फीस का नही आना और सहयोगियों को वेतन देने की नैतिक जिम्मेदारी को उठाते हुए निजी स्कूल संचालक अब त्राही-त्राही करने लगे हैं।
इसी त्रासदी के चलते एक और अकल्पनीय दृश्य सामने आया, जिसकी भी जानकारी में यह आया, वह सिहर उठा। मदद के लिए कोई आगे आए तो वह थी डीडब्लूपीएस के संचालकों की त्रीमूर्ति जिन्होने अपने संस्थान के प्राचार्य के माध्यम से 51 हजार का चेक सरस्वती विद्या मंदिर आष्टा को सौंपा, जो उन्होने स्वीकार किया एवं आभार भी व्यक्त किया।
वैसे शिक्षक दिवस पर कई अवसरवादी लोग शिक्षकों के सम्मान का ढोंग करने से बाज नहीं आते, ऐसे परजीवी कोरोना काल शुरू होते ही अदृश्य हो गए, तब जनसामान्य आगे आए और सेवा कार्य किया।
इधर देहली वल्र्ड पब्लिक स्कूल ने इस मामले में अग्रता हासिल करते हुए अपनी और से जो प्रयास किया हैं, वह स्तुत्य हैं। इस संबंध में देहली वल्र्ड पब्लिक स्कूल की और से जारी विज्ञप्ति के अनुसार देहली वल्र्ड पब्लिक स्कूल का निरंतर यही प्रयास रहता है कि शिक्षा की प्रक्रिया सतत चलती रहे। संचालकों के इस दृढ़संकल्प से शिक्षा के स्तर को एवं इसकी गुणवत्ता में निरन्तर विकास किया जाए। इसी क्रम में विद्यालय संचालकों ने अमेरिका के गूगल से प्रतिष्ठित जी.सुएट खरीदा है जिसमें विद्यार्थियों का ईमेल बनाकर ऑनलाइन लाइव कक्षाएँ लगाई जा रही हैं, जो कि अपने आप में अलग अनुभव है। विद्यार्थी अपने ईमेल में शिक्षकों द्वारा भेजे गए कार्य को भी कभी भी देख सकते हैं एवं अपना कार्य भेज सकते हैं। विद्यालय संचालकों ने यह सुनिश्चित किया कि इस कोरोना काल में भी कोई भी विद्यार्थी पढ़ाई से वंचित ना रहने पाए।
कोरोना काल ने अनेक विद्यालयों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं चल रही हैं। वही विद्यालय प्रशासन एवं शिक्षक इस प्रयास में रत हैं कि बच्चों की शिक्षा रुके नहीं भले ही इसके लिए उन्हें दुगुनी मेहनत से ऑनलाइन कक्षा लेने की तैयारी करनी पड़े या फ़ोन पर बच्चों से संपर्क साध कर पढ़ाना पड़े या घर.घर जाकर उन्हें पढ़ाना पड़े, वहीं दूसरी और बहुत से अभिभावकों का सार्थक सहयोग प्राप्त नही हो रहा है। अभिभावक यह नहीं समझ पा रहे हैं कि नियमित शिक्षा न होने से बच्चों का विकास बाधित होगा और विद्यालयों की ट्यूशन फ़ीस भी नही दे रहे हैं, इस प्रकार अभिभावकों का रवैया असहयोग पूर्ण हैं। जिसके कारण विद्या के मंदिर बंद होने के कगार पर आ गए और शिक्षक वर्ग लाचारी के। इसी बात को ध्यान में रखते हुए तथा समाज में शिक्षा एवं शिक्षकों के महत्व को समझते हुए, देहली वल्र्ड पब्लिक स्कूल आष्टा के संचालकों सैय्यद परवेज़ अली, बहादुर सिंह सेंधव तथा ज्ञान सिंह ठाकुर ने एक मिसाल पेश की है। विद्यालय के संचालकों की इस त्रीमूर्ति ने आष्टा के सरस्वती विद्या मंदिर को आर्थिक मदद करते हुए 51 हजार रुपए की राशि का चेक़ प्रदान किया ताकि इस सहयोग से विद्यालय के शिक्षकों के वेतन में कोई व्यवधान न हो। यह चेक़ को देहली वल्र्ड पब्लिक स्कूल स्कूल के संचालकों की और से विद्यालय की प्राचार्या श्रीमती संगीता सूद ने दो सहयोगी शिक्षकों के साथ स्वयं सरस्वती विद्या मंदिर स्कूल पहुचकर वहाँ मौजूद शिक्षकों के समक्ष प्राचार्य दिनेश शर्मा को सौंपा। जिसे उन्होंने सहर्ष आभार व्यक्त करते हुए ग्रहण किया। आपसी समन्वयता से हर परिस्थिति से पार पाया जा सकता है। संचालकों ने सहृदयता दिखाते हुए शिक्षा के क्षेत्र में इसप्रकार एक और क़दम बढ़ाया है। डीडब्लूपीएस ने जो रास्ता दिखाया हैं उस पर धन्नासेठ भी चल सकते हैं। बशर्ते वे यह कर सके।
लेखक मध्यप्रदेश के आष्टा निवासरत होकर मालवा क्षेत्र के श्रेष्ठ लेखक एवं विचारोत्तेजक कलमकारों मे विशिष्ट स्थान रखते हैं। समय-समय पर आपके लेख विभिन्न पत्र-पत्रकारिता मे भी प्रकाशित होते रहते हैं। एमपी मीडिया पाइंट पर आपका स्वागत है।
संपादक
ग्रंथों में गुरू ब्रह्मा, गुरू गोविंद और शिक्षक दिवस पर राष्ट्रनिर्माता की उपाधी पाने वाले निजी स्कूल के शिक्षक भोग रहे भारी आर्थिक संकट,
देहली वल्र्ड पब्लिक स्कूल के संचालकों की त्रीमूर्ति ने सरस्वती विद्या मंदिर को सौपा 51 हजार का चेक, स्कूल ने दानहेतु की थी अपील..
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क्या धन्नासेठ नहीं चल सकते डीडब्लूपीएस के रास्ते..!!
सुधीर पाठक
एक तरफ गुरू को ब्रह्मा की उपमा दी जाती हैं, तो दूसरी तरफ गुरू को गोविंद तक पहुंचने का माध्यम भी बताया गया। शिक्षक दिवस पर शिक्षकों की शान में बहुत कुछ कहा जाता हैं, लेकिन कोरोना काल में शिक्षकों की स्थिति सामने हैं, भारी आर्थिक संकट झेल रहे निजी स्कूलों के सामने अब जीवन मरण का प्रश्र हैं। रोटी सबकों चाहिए, लेकिन सरकार के पास यह सोचने का वक्त नही कि मध्यम, सामान्य मध्यम और लघु मध्यम वर्ग किस तरह जीवन यापन कर रहे हैं। बिजली का बिल करंट मार रहा हैं, इस वर्ग को राशन भी नही मिलता। हर सुविधा इस वर्ग को खरीदना पड़ती हैं। ऐसे में स्कूल का बंद होना, फीस का नही आना और सहयोगियों को वेतन देने की नैतिक जिम्मेदारी को उठाते हुए निजी स्कूल संचालक अब त्राही-त्राही करने लगे हैं।
इसी त्रासदी के चलते एक और अकल्पनीय दृश्य सामने आया, जिसकी भी जानकारी में यह आया, वह सिहर उठा। मदद के लिए कोई आगे आए तो वह थी डीडब्लूपीएस के संचालकों की त्रीमूर्ति जिन्होने अपने संस्थान के प्राचार्य के माध्यम से 51 हजार का चेक सरस्वती विद्या मंदिर आष्टा को सौंपा, जो उन्होने स्वीकार किया एवं आभार भी व्यक्त किया।
वैसे शिक्षक दिवस पर कई अवसरवादी लोग शिक्षकों के सम्मान का ढोंग करने से बाज नहीं आते, ऐसे परजीवी कोरोना काल शुरू होते ही अदृश्य हो गए, तब जनसामान्य आगे आए और सेवा कार्य किया।
इधर देहली वल्र्ड पब्लिक स्कूल ने इस मामले में अग्रता हासिल करते हुए अपनी और से जो प्रयास किया हैं, वह स्तुत्य हैं। इस संबंध में देहली वल्र्ड पब्लिक स्कूल की और से जारी विज्ञप्ति के अनुसार देहली वल्र्ड पब्लिक स्कूल का निरंतर यही प्रयास रहता है कि शिक्षा की प्रक्रिया सतत चलती रहे। संचालकों के इस दृढ़संकल्प से शिक्षा के स्तर को एवं इसकी गुणवत्ता में निरन्तर विकास किया जाए। इसी क्रम में विद्यालय संचालकों ने अमेरिका के गूगल से प्रतिष्ठित जी.सुएट खरीदा है जिसमें विद्यार्थियों का ईमेल बनाकर ऑनलाइन लाइव कक्षाएँ लगाई जा रही हैं, जो कि अपने आप में अलग अनुभव है। विद्यार्थी अपने ईमेल में शिक्षकों द्वारा भेजे गए कार्य को भी कभी भी देख सकते हैं एवं अपना कार्य भेज सकते हैं। विद्यालय संचालकों ने यह सुनिश्चित किया कि इस कोरोना काल में भी कोई भी विद्यार्थी पढ़ाई से वंचित ना रहने पाए।
कोरोना काल ने अनेक विद्यालयों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं चल रही हैं। वही विद्यालय प्रशासन एवं शिक्षक इस प्रयास में रत हैं कि बच्चों की शिक्षा रुके नहीं भले ही इसके लिए उन्हें दुगुनी मेहनत से ऑनलाइन कक्षा लेने की तैयारी करनी पड़े या फ़ोन पर बच्चों से संपर्क साध कर पढ़ाना पड़े या घर.घर जाकर उन्हें पढ़ाना पड़े, वहीं दूसरी और बहुत से अभिभावकों का सार्थक सहयोग प्राप्त नही हो रहा है। अभिभावक यह नहीं समझ पा रहे हैं कि नियमित शिक्षा न होने से बच्चों का विकास बाधित होगा और विद्यालयों की ट्यूशन फ़ीस भी नही दे रहे हैं, इस प्रकार अभिभावकों का रवैया असहयोग पूर्ण हैं। जिसके कारण विद्या के मंदिर बंद होने के कगार पर आ गए और शिक्षक वर्ग लाचारी के। इसी बात को ध्यान में रखते हुए तथा समाज में शिक्षा एवं शिक्षकों के महत्व को समझते हुए, देहली वल्र्ड पब्लिक स्कूल आष्टा के संचालकों सैय्यद परवेज़ अली, बहादुर सिंह सेंधव तथा ज्ञान सिंह ठाकुर ने एक मिसाल पेश की है। विद्यालय के संचालकों की इस त्रीमूर्ति ने आष्टा के सरस्वती विद्या मंदिर को आर्थिक मदद करते हुए 51 हजार रुपए की राशि का चेक़ प्रदान किया ताकि इस सहयोग से विद्यालय के शिक्षकों के वेतन में कोई व्यवधान न हो। यह चेक़ को देहली वल्र्ड पब्लिक स्कूल स्कूल के संचालकों की और से विद्यालय की प्राचार्या श्रीमती संगीता सूद ने दो सहयोगी शिक्षकों के साथ स्वयं सरस्वती विद्या मंदिर स्कूल पहुचकर वहाँ मौजूद शिक्षकों के समक्ष प्राचार्य दिनेश शर्मा को सौंपा। जिसे उन्होंने सहर्ष आभार व्यक्त करते हुए ग्रहण किया। आपसी समन्वयता से हर परिस्थिति से पार पाया जा सकता है। संचालकों ने सहृदयता दिखाते हुए शिक्षा के क्षेत्र में इसप्रकार एक और क़दम बढ़ाया है। डीडब्लूपीएस ने जो रास्ता दिखाया हैं उस पर धन्नासेठ भी चल सकते हैं। बशर्ते वे यह कर सके।
सुधार पाठक
-----------लेखक मध्यप्रदेश के आष्टा निवासरत होकर मालवा क्षेत्र के श्रेष्ठ लेखक एवं विचारोत्तेजक कलमकारों मे विशिष्ट स्थान रखते हैं। समय-समय पर आपके लेख विभिन्न पत्र-पत्रकारिता मे भी प्रकाशित होते रहते हैं। एमपी मीडिया पाइंट पर आपका स्वागत है।
संपादक


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