इछावर के नादान जंगल मे मिला सागौन सिल्लियों का जखीरा,
वन विभाग का अमला मौके पर

राजेश शर्मा 


कल बुधवार को नादान के जंगल अंदर कीचड़ मे फंसा एक ट्रक मिला था जिसमे बेशकीमती सागौन की 40 नग सिल्लियां भरी हुई थीं। माल और आयशर ट्रक जब्त कर वन विभाग उसका मूल्यांकन भी नहीं कर पाया था कि आज गुरुवार को फिर नादान के जंगल से सागौन की सिल्लियों का जखीरा बरामद किया गया है। फिलहाल वन विभाग का अमला मौके पर मौजूद है।

समझा जा रहा है कि कल सागौन माफिया का ट्रक पकड़ाया था उन्हीं ने इन लकड़ियों को काट कर अलग-अलग हिस्से मे पटक दिया था। दूसरी खेप मे सागौन की यह सिल्लियां परिवहन करने की योजना थी।
ट्रक यदि कीचड़ मे नहीं फंसता तो सागौन माफियाओं की इतन बड़ी करतूत का खुलासा नहीं हो पाता। 


दोनों मामले ट्रेस होने से एक बात तो उजागर हो ही गई कि वन विभाग की लापरवाही के चलते किस कदर सागौन माफिया "जंगल मे मंगल" कर रहे हैं। जंगल साफ होता जा रहा है और अवैध सागौन से भरे ट्रक पर ट्रक बेखौफ चेक-पोस्ट से निकलते जा रहे हैं। 
ग्रामीण बताते हैं कि इछावर का रमणीक स्थल नादान कभी सनसनाते जंगलों से पहचाना जाता था। नादान,वीरपुरा, धाईंखेड़ा,बालुपार्ट,समापुरा,बोरदी कला,वीरपुरा,मंगलगढ़,अलीपुर,जामली आदि गांवों के आसपास सिर्फ जंगल ही जंगल था लेकिन वह पिछले वर्षों मे या तो मैदान मे या फिर खेतों मे तब्दील हो गए।
ग्रामीण बताते हैं कि वन विभाग कर्मचारियों की सांठगांठ से जंगलों का सफाया हुआ। लोगों ने अतिक्रमण कर वन विभाग की जमीन पर ईंट के भट्ठियाँ तक लगा ली और अवैध धंधा आरंभ कर दिया लेकिन वन विभाग कुंभकरणीय नींद सोता रहा। खासबात यह है कि दोषी अधिकारियों के खिलाफ विभाग कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर पाया! जंगलों का सफाया कैसे हो रहा हैं ? क्या सिर्फ सागौन या खेर लकड़ियों के माफिया ही दोषी हैं !!...वन विभाग का कोई कर्मचारी या अधिकारी इसके लिए दोषी नहीं है क्या?
पिछले एक दशक का रिकार्ड खंगाला जाए तो वन विभाग ने कितने आरोपियों को पकड़ा तो जवाब सुनकर पर्यावरण प्रेमियों का सिर शर्म से झुक जाएगा। हर बार केवल लकड़ी और वाहन जब्त करने की रस्मादायगी विभाग करता रहा और आरोपी फरार होते रहे। बात सिर्फ नादान की ही नहीं है। वनपरिक्षेत्र इछावर के अंतर्गत  सबरेंज दौलतपुर और खेरी के भी यही हाल हैं वहां भी सागौन फाफिया रुपी सांप  को वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी ही दूध पिला  रहे हैं। ग्रामीण बताते हैं कि सागौन और  खेर के वृक्षों का कत्ल-ए-आम करने वाले माफियाओं के गिरेबां मे हाथ डालना और वन विभाग के कर्मचारियों-अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होना अब समय की मांग बन चुका  है।
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