डायरी पंचायत                                    ----------------

जिम्मेदारों की उदासीनता की हकीकत बयान कर रहा ग्राम गोदी

 
अंतिम संस्कार के लिए प्लास्टिक की पन्नी का सहारा...

आष्टा/दिनेशशर्मा                                            एमपी मीडिया पाइंट 

आष्टा जनपद पंचायत की लोरास खुर्द के ग्राम गोदी  को देखने पर अहसास हुआ कि यह गाँव आज भी सभी बुनयादी सुविधाओ से पूरी तरह वंचित है ।
मरने वाले को तरीके से 2 गज छाया वाली जमीन  भी मय्यसर नही है । अन्य मौलिक सुविधाओं के हाल यह है कि बीते कई वर्षों से चुनावी समर मे जनप्रतिनिधियों के मात्र आश्वासन पर ही गांववासी जिंदा है और विकास की राह तक रहे है ।  किंतु नेताओं ने  हर समय अपना स्वार्थ तो हल कर   लिया पर गांव वाले आज भी नारकीय जीवन जीने के लिए मजबूर है ।
भारत देश को आजाद हुए आज 75 वर्ष होने को आये है , पर आष्टा जनपद की लोरास खुर्द ग्राम पंचायत का  800 मतदाताओं वाला बड़ा गांव गोदी आज भी अपनी बुनयादी आवश्यकताओं से महरूम है , बीते दिवस   मूसलाधार बारिश के दौरान गोदी ग्राम में जब गांव वाले एक मुर्दे को जला रहे थे तब देखकर  बहुत आश्चर्य हुआ कि ग्रामीण  एक निजी जमीन पर प्लास्टिक पन्नी की छत्र छाया कर अंतिम संस्कार कर रहे थे , याने की गांव में एक  सार्वजनिक  श्मशान भी नही है , इतना ही नही गांव की सड़कों के हाल यह है  वर्षो से गांव के लोग अपनी बुनयादी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए  गांव से बाहर  जाते है तो उन्हें 13 किलोमीटर का सफर मजबूरी में   करना पड़ रहा है जबकि मात्र 3 किलोमीटर का रास्ता अगर बन जावे तो ग्रामीण कम समय मे तुरन्त  मुख्य रोड हाइवे पर जा सकते है , बैंक, अस्पताल शिक्षा आदि सभी सुविधाओं के लिए गोदी के लोगो को ओर बच्चों को हाइवे के दूसरी तरफ ग्राम मैना जाना पड़ता है , किन्तु गोदी का दुर्भाग्य ही है कि आज तक जनप्रतिनिधियों से  सिर्फ  आश्वासन ही मिला है , ओर गोदी गांव में विकास  क़्या होता है किसी को नही मालूम ।
 गोदी ग्राम वासी आज भी बारिश के समय गांव से बाहर जाने में बहुत परेशानी  महसूस करते है 
गांव के सभी तरफ बने उबड़ खाबड़  कच्चे  पगडंडी रास्ते, ओर छतिग्रस्त नाले रोजाना अनहोनी वाली दुर्घटनाओं को आमंत्रण देते है । सरपंच हो या जनपद प्रमुख, ओर विधायक, सांसद सभी जनप्रतिनिधियों ने अनेको बार भरोसा तो दिया कि आपकी समस्याएं हम दूर करेंगे , पर आज तक दोबारा कोई भी नेता लौटकर गोदी नहीं आया , इस तरह के खुले आरोप अब गांव वाले लगा रहे है ,   इतना ही नही अब ग्रामीणजन खुलकर बोल रहे है कि  अब जब तक हमारी इन विकट समस्याओं का निदान नही होगा हम किसी भी चुनाव में मतदान नहीं करेंगे , चुनाव का बहिष्कार करेंगे । और किसी भी नेता को गांव में घुसने भी नहीं देगे ।
 

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