लेखिका
" बात को समझ सुमित"
"बहुत समझ लिया मैंने राघव, अब समझाने की बारी है ,उसने मुझे मना किया !अब बस बहुत हो गया ,"।"यार तू एक बार फिर सोच ले।
" सोच लिया और कैसा दोस्त है तू ,तुझे मेरी इज्जत की जरा भी परवाह नहीं"।
सुमित दो कदम आगे बढ़ा
" फिर कह रहा हूं और देख तो ले वही है "राघव ने एक आखिरी कोशिश की|
सुमित हर बात को दरकिनार करता हुआ ,
दिल में बदले की आग लिए हुए और आगे बढ़ा ।
गुस्से से आंखों के सामने अंधेरा छा गया और बस अगले ही पल एक जलता हुआ चेहरा जमीन पर पड़ा था।।
मन में शांति लिए वह जैसे ही मुड़कर आगे बढ़ा ,एक आवाज कानों में पड़ी -"भैया बचाओ"|
तेजाब अपना काम कर चुका था, शिकार से ज्यादा शिकारी जल रहा था॥
टीना सुमन, कोटा, राजस्थान
-------------------------------परिचय
टीना सुमन कोटा राजस्थान की रहने वाली हैं। बचपन से ही साहित्य के प्रति रुचि रही।ये रुचि ब्लॉग, कहानियों के सृजन में बदल गई। आप पिछले तीन-चार वर्षो से कई साहित्यिक समूह से जुड़ी हुई हैं | कविता, कहानी और लघुकथा का सृजन कर रही हैं। आपका एमपी मीडिया पॉइंट पर स्वागत है।
संपादक


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