लेखिका

सिद्धहस्त बाबा . .


विधि एक वीडियो देख रही थी बैठकर , तभी नलिनी उसके पास जाकर पूछती है।
 
" क्या देख रही हो विधि"
"मौसी यह वीडियो देख रही हूँ, ये बहुत फनी है, ये बता रहे हैं कि शरीर के सभी अंग फड़कते हैं तो बहुत अपशकुन होता है।"
 
"अरे ये तो बहुत प्रसिद्ध बाबा है इनका नाम है आचार्य शारदेप्रसाद, मैं इनकी बहुत सारी वीडियो देखती हूँ और ये जो बताते हैं बिल्कुल सही बताते है"।
 
"मौसी कुछ भी अंधविश्वास में विश्वास करती हो, ऐसे बाबाओं की बात मानकर ही आधे लोग अपना घर बिगाड़ लेते हैं"
 
"अरे नही इन्होंने एक वीडियो डाली थी मैंने उस पर कॉमेंट भी किया देखो इनका रिप्लाई भी आया है।"
 
मिनी कॉमेंट पढने लगती है,
 
"बाबाजी आपने बहुत सही बात बताई है, मेरी एक बेटी है इंजीनिरयिंग कर चुकी है उसे नौकरी नही मिल रही कृपया कोई उपाय हो तो बताइए"
 
मोबाइल बन्द करते हुए
"मौसी बाबा क्या किसी कंपनी के मैनेजर हैं जो उसे नौकरी दिला देंगे, आप भी कहीं भी कुछ भी लिख देते हो"
 
तभी निशा मुस्कुराते हुए,
"माँ अभी एक कम्पनी से कॉल आया है, उन्होंने मुझे अगले हफ्ते से काम पर बुलाया है मेरा जॉइनिंग लेटर वो लोग इस हफ्ते से भेज देंगे"
 
नलिनी हाथ जोड़कर खुश होते हुए,
"जय हो बाबा शारदे प्रसाद की, उन्ही का चमत्कार है जो तुझे नौकरी मिल गयी, चल तुझे कुछ अच्छा बनाकर खिलाती हूँ"
 
उधर विधि आश्चर्य से दोनो को देख रही थी और मन ही मन सोच रही थी।
 
न जाने कब यह अंधविश्वास खत्म होगा सबका, पढ़ लिखकर भी सबकी मति भृष्ट हो जाती है यहां। अब किसे दोष दूँ उन बाबा को या इन्हें या खुद को!

- नेहा शर्मा, दुबई

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परिचय


: समीक्षा


अंधविश्वास.... इसकी जड़ें हमारे देश में गहरे तक जमीं हुई हैं..। उन्हीं का फायदा समय समय पर अवसरवादी या फिर कहीं भी सफल नहीं हो पाए लोग... सफलता का मंत्र बनाने का व्यवसाय खोल लेते हैं...। बाजारवाद के इस दौर में.. शानदार मार्केटिंग की दम पर कुछ भी बेचा जा सकने की सभावनाओं को.. ऐसे लोग नकद करा लेते हैं....। सवाल उठता है कि.. इनकी कही बातें सच कैसे होती हैं...। इसका गणित होता है... दस को बताओ... कुछ तो सही होगी... जो सही हुई उसका प्रचार प्रसार शुरू.....। इतना सा खेल.. और बाकी सब आराम सहज सुलभ हो जाते हैं...। ये हैं नेहा शर्मा जी के कथानक... "सिद्धहस्त बाबा".... में छुपे निहितार्थ भाव....। जो भारतीय समाज की मनोदशा भी चित्रित करते हैं.... और आगाह भी कराते हैं कि... विज्ञान के युग में... ज्ञान के प्रकाश से.. अंधविश्वास के अंधकार को दूर करने की महती आवश्यकता है....। सीधा सरल और एक ही दृश्य में समाया हुआ कथानक... सहजता से अपना संदेश दे जाता है.... बधाई हो नेहा शर्मा जी....।
शैलेश तिवारी, संपादक

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