आर्थिक और मानसिक परेशानियों से गुजर रहे शिक्षकों ने कहावत को चरितार्थ करते हुए भैंस को पढ़कर सुनाया ज्ञापन,

फिर सौंपा उच्चाधिकारियों को...


सीहोर:  एमपी मीडिया पाइंट 

शासन तक अपनी समस्याएं पहुंचाने और उसे हरकत मे लाने के लिए नागरिक व कर्मचारी संगठनों द्वारा विभिन्न तरीके अपनाए जा रहे हैं, बावजूद इसके जब उनकी आवाज नक्कारखाने मे तूति की आवाज ही साबित हो तो दूसरे नुस्खे अपनाना भी लाजमी हो जाता है।

बुधवार को मध्यप्रदेश के सीहोर जिला मुख्यालय पर जो तरीका शिक्षकों ने आजमाया वह सबसे ही भिन्न नजर आया। शिक्षकों ने पहले भैंस को पढ़कर ज्ञापन सुनाया, तत्पश्चात परिसर की साफ-सफाई की इसके बाद ज्ञापन सौंपा।

 बुधवार को प्रांतीय शिक्षक संघ ने नियत तारीख में वेतन नहीं मिलने पर बीईओ कार्यालय मुरली रोड सीहोर पर विरोध प्रदर्शन किया। वहीं भैंस को ज्ञापन पढ़कर सुनाया कि पिछले दो साल से नियत तारीख में वेतन देने की अध्यापक संवर्ग व नवीन शिक्षक संवर्ग मांग कर रहा है, लेकिन इसके बाद भी जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे हैं। वहीं बीईओ कार्यालय परिसर में सफाई की। इसके उपरांत संयुक्त कलेक्टर रवि श्रीवास्तव, जिला पंचायत सीईओ को ज्ञापन दिया।

प्रांतीय शिक्षक संघ जिलाध्यक्ष संजय सक्सेना ने बताया कि अध्यापक संवर्ग व नवीन शिक्षक संवर्ग की वेतन संबंधी समस्या के संबंध में समय-समय पर अगवत कराया गया है। लेकिन संवर्ग की वेतन संबंधी समस्या का निराकरण लगातार लंबित है। शासन के नियमानुसार माह की 1 तारीख को वेतन भुगतान होना चाहिए। लेकिन विगत 2 वर्षों से कभी भी वेतन 1 तरीख को नहीं मिला है। साथ ही 10 तारीख तक वेतन देना एक परंपरा सी बन गई है। इससे अध्यापक संवर्ग आर्थिक और मानसिक रूप से प्रत्येक माह प्रताडित होता है। जिला शिक्षा अधिकारी को पत्र के माध्यम से आदेशित करने के बाद भी कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। ऐसे में आक्रोशित अध्यापकों, शिक्षकों ने बीईओ कार्यालय परिसर में भैंस को आवेदन पढ़कर सुनाया और सफाई की। साथ ही समय पर वेतन दिए जाने की मांग की।

 इस मौके पर संघ के जिलाध्यक्ष संजय सक्सेना, प्रांतीय मीडिया प्रभारी प्रदीप नागिया, राजेंद्र परमार, दिनेश मेवाड़ा, मुकेश बैरागी, हेमलता मालवीय, मनोज श्रीवास्तव, रामबाबू पाटिल, डीसी कीर, राघवेंद्र मालवीय, जीवन वर्मा, बलराम परमार, रजनी राठौर, सजिदा, महेंद्र वर्मा, कवरलाल मीणा, राजेश शर्मा, चंदर वर्मा, शिवदान सिंह, सुमेर सिंह, हेमंत विश्वकर्मा आदि  बड़ी संख्या में पदाधिकारी मौजूद थे।

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