आदर्श आचरण संहिता का सख्ती से पालन करायें- मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी
सीहोर, एमपी मीडिया पाइंट
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी व्ही.एल. कांता राव ने प्रशासन अकादमी, भोपाल में जिला निर्वाचन अधिकारियों, रिटर्निंग एवं सहायक रिटर्निंग अधिकारियों के प्रशिक्षण को संबोधित करते हुए कहा है कि प्रदेश में लोकसभा निर्वाचन-2019 को भी स्वतंत्र, निष्पक्ष, सुगम, नैतिक, विश्वसनीय एवं समावेशी तरीके से संपन्न कराया जाना है। निर्वाचन में दिव्यांगजन एवं महिलाओं को दिक्कत नहीं हो, इसके लिये सभी व्यवस्थाएँ सुनिश्चित की जायें। आदर्श आचरण संहिता का सख्ती से पालन कराया जाये। संपत्ति विरूपण, वाहनों पर अवैध हूटर, नेमप्लेट के संबंध में प्रभावी कार्यवाही की जाये।
अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी संदीप यादव ने रिटर्निंग एवं सहायक रिटर्निंग अधिकारियों की लोकसभा निर्वाचन में भूमिका की जानकारी दी। श्री यादव ने लोक-प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 एवं 1951 के विभिन्न प्रावधान से अवगत कराया। उन्होंने ई.व्ही.एम. और व्ही.व्ही.पैट की पूर्ण अभिरक्षा एवं सुरक्षा व्यवस्था, मतदान दलों का गठन, मतदान दलों को मशीनों का वितरण, नामांकन-पत्र प्राप्ति और उसकी संवीक्षा, प्रतीक चिन्हों के आवंटन, मत पत्र मुद्रण की भी जानकारी दी। अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी अरूण कुमार तोमर ने कहा कि त्वरित निर्णय लेने में आसानी के लिये निर्वाचन संबंधी निर्देशों का अध्ययन अवश्य करें। संयुक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी राजेश कौल ने निर्वाचन व्यय अनुवीक्षण एवं मीडिया मॉनीटरिंग का प्रशिक्षण दिया। संयुक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी अभिजीत अग्रवाल ने आई.टी. एप्लीकेशन, सी-विजिल, न्यू सुविधा तथा स्वीप गतिविधियों की जानकारी दी।
प्रशिक्षण सत्र में कलेक्टर भोपाल सुदाम खाड़े ने आदर्श आचरण संहिता के पालन, कलेक्टर सीहोर गणेश शंकर मिश्रा ने नवीन तकनीकों के उपयोग, विनायक वर्मा पुलिस अधीक्षक विदिशा ने संवेदनशील मतदान केन्द्रों एवं सुरक्षा बलों की तैनाती, उप मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी प्रमोद शुक्ला ने ई.व्ही.एम. व व्ही.व्ही.पैट. तथा राकेश कुशरे उप मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने मतदान दल, प्रशिक्षण, मटेरियल प्रबंधन एवं मास्टर ट्रेनर डॉक्टर समीरा नईम ने मतगणना के विषय में जानकारी दी।
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प्रचार प्रसार हेतु ईको फेण्डली प्रचार सामग्री उपयोग करने की सलाह
सीहोर, एमपी मीडिया पाइंट
भारत निर्वाचन आयोग द्वारा समस्त मान्यता प्राप्त राजनैतिक दलों तथा मध्यप्रदेश में स्थित गैर मान्यता प्राप्त राजनैतिक दलों सहित लोकसभा निर्वाचन में सम्मिलित होने वाले अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि लोक सभा निर्वाचन 2019 के दौरान प्रचार प्रसार हेतु इको फ्रेण्डली प्रचार सामग्री का ही उपयोग करे। प्लास्टिक से बनी सामग्री मानव तथा पर्यावरण हित में नहीं है। उन्होंने ऐसी सामग्री उपयोग नहीं करने की सलाह दी गई है।
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सोशल मीडिया पर प्रचार से पहले लेनी होगी अनुमति आयोग द्वारा दिशा-निर्देश जारी
सीहोर, एमपी मीडिया पाइंट
सोशल मीडिया और वेबसाइट पर चुनावी प्रचार के लिये भी अनुमति लेनी होगी। भारत निर्वाचन आयोग ने इस संबंध में दिशा निर्देश जारी कर दिए हैं। आयोग ने माना है कि सोशल मीडिया और वेबसाइट भी रेडियो-केबल टीव्ही की तरह इलेक्ट्रोनिक मीडिया हैं। जिस पर किए जाने वाले चुनाव प्रचार को कानूनी रूप में विनियमित करना आयोग का अधिकार है।
भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी दिशा निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि सोशल मीडिया जैसे ट्विटर, फेसबुक, यू-ट्यूब, विकीपीडिया और एप्स पर कोई भी विज्ञापन या एप्लीकेशन देने से पहले इसका प्रमाणीकरण कराकर विधिवत अनुमति ली जाए। यह अनुमति मीडिया सर्टिफिकेशन ऑफ मॉनीटरिंग कमेटी (एमसीएमसी) देगी। इसके लिये राजनैतिक दलों व प्रत्याशियों को निर्धारित प्रपत्र में आवेदन करना होगा। सोशल मीडिया पर दिए जाने वाले विज्ञापन का खर्चा भी राजनैतिक दल अथवा प्रत्याशी के चुनावी खर्च में शामिल होगा। चुनावी खर्चे में उन व्यक्तियों एवं टीम के वेतन व भत्ते भी शामिल होंगे, जो उम्मीदवार या राजनैतिक दल का सोशल मीडिया एकाउण्ट या वेबसाइट संचालित करने का काम करते हैं। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया पर भी आचार संहिता पूरी तरह से लागू रहेगी। साथ ही वेबसाइट और सोशल मीडिया एकाउण्ट पर पोस्ट की जाने वाली सामग्री इसके अधीन रहेगी।
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सीहोर, एमपी मीडिया पाइंट
लेखा-जोखा रखने में अभ्यर्थी कर सकेंगे अतिरिक्त निर्वाचन एजेंट की नियुक्ति
सीहोर 30 मार्च,2019
भारत निर्वाचन आयोग ने चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों के निर्वाचन पर होने वाले खर्च का दैनिक लेखा- जोखा रखने में अपनी सहायता हेतु एक अतिरिक्त निर्वाचन एजेंट (निर्वाचन व्यय अभिकर्ता) की नियुक्ति की अनुमति दी है। हालांकि आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी व्यक्ति को संसद या विधान मण्डल का सदस्य होने अथवा चुने जाने के अयोग्य घोषित किया गया है तो ऐसे व्यक्ति को अभ्यर्थी द्वारा अतिरिक्त निर्वाचन एजेंट के रूप में नियुक्त नहीं किया जाना चाहिए।
निर्वाचन आयोग ने राज्य या केन्द्र के मंत्री, संसद सदस्य, विधायक, पार्षद, स्थानीय निकायों के मेयर, अध्यक्ष या सभापति को भी अतिरिक्त एजेंट के रूप में नियुक्त करने पर रोक लगाई है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि अभ्यर्थी द्वारा नियुक्त अतिरिक्त निर्वाचन एजेंट केवल असांविधिक कार्यों के निष्पादन के लिए ही होते हैं। अतिरिक्त एजेंट, अभ्यर्थी की ओर से नियुक्त निर्वाचन एजेंट की तरह कर्तव्य निष्पादित करने के लिए प्राधिकृत नहीं होंगे।
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