अक्षय तृतीया पर किसानों का पूर्वानुमान . . .
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बारिश होगी अच्छी,सोयाबीन के भाव मिलेगे ज्यादा व गेहूँ की पैदावारी भी सुनिश्चित,

  नहीं पड़ेगा आकाल!

राजेश बनासिया,  भाऊँखेड़ी

अक्षय तृतीया को किसानों के नववर्ष के रुप मे भी जाना जाता है। इस दिन किसान विभिन्न प्राचीन पद्धति से मानसून और आने वाली फसल का पूर्वानुमान लगाते हैं जो सही भी बैठता है।इछावर तहसील के ग्राम धामंदा स्थित हनुमान मंदिर मे इसबार काबेड़ी से जो निकला वह पब्लिक के लिए खुशखबर बन गया! पता चला है कि नववर्ष मे भरपूर बारिश और फसल की अच्छी पैदावारी के संकेत मिले हैं। 

इछावर तहसील के ग्राम धामंदा स्थित हनुमान मंदिर मे अक्षय तृतीया पर आटे के चार लड्डू बनाए जाते हैं। एक लड्डू मे पैसा,दूसरे मे दूब,तीसरे मे गेहूँ और चौथे लड्डू मे कोयला रखा जाता है। फिर इन चारों लड्डूओं को मटके मे रखकर हनुमानजी की पूरे ग्रामवासी पूजा-अर्चना करते हैं। तत्पश्चात एक कन्या से चार बार लड्डू निकलवाए जाते हैं  लड्डू को फोड़कर देखा जाता यदि एकबार भी कोयला निकल आता है तो माना जाता है कि यह आकाल पड़ने का संकेत है। शेष तीनों के पूर्वानुमान अलग-अलग होते हैं।

मंगलवार 7 मई को इसबार दो बार दूब निकली इसका मतलब है कि चारा अधिक पैदा होगा जो अच्छी बारिश का संकेत है। एक बार पैसा निकला जो इसबात का संकेत देता है कि फसल के भाव भी किसानों को अच्छे मिलने वाले हैं। एक बार गैहूं निकला जो बताता है कि गेहूँ फसल की पैदावारी भी सुनिश्चित है।

ग्रामीण बताते हैं कि काबेड़ी के माध्यम से निकले पूर्वानुमान कभी फेल नहीं होते हैं इसी वजह से इस पद्धति पर लोगों की अटूट आस्था आज भी कायम है।
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