इच्छावर के ब्रिटिश कालीन पुराने भवन का टीआई अरविंद कुमरे ने कराया कायाकल्प,
सन् 1881 मे बना था रेस्ट हाउस उसमे चलता था आजादी के बाद पुलिस थाना,
पहले
बाद मे
आप ही संभाले हुए हैं इस ढहती हुई दीवार को,
शायर की यह पंक्तियाँ इछावर मे थाना टीआई अरविंद कुमरे ने चरितार्थ की हैं।
सरकारी नौकरी मे यूं तो कई अफसर आते और अपने किरदार निभाकर चले जाते है लेकिन मौजूदा हालात मे पुरानी चीजो को सहेजकर उसे उपयोगी बनाना मजबूत इच्छा शक्ति से ही संभव है। इछावर मे अंग्रेजो के जमाने मे बने पुराने थाना भवन को टीआई अरविंद कुमरे ने खूबसूरत किरदार निभाते हुए उसका कायाकल्प कर उपयोगी बना दिया अब यहां बिजली व्यवस्था उपलब्ध होने के बाद ड्यूटी मे तैनात जवान रुकते है। पहले थाने मे जब्त पुराने वाहनो के कबाड़ से भरा रहता यह भवन अब मरम्मत के बाद उपयोगी हो गया।

गत वर्ष 28 सितंबर 2018 से यहा टीआई अरविंद कुमरे की तैनाती के बाद थाना भवन मे रंगरोगन मरम्मत के सांथ व्यापक स्तर पर कार्य कराया गया स्टाफ भी यही बताता है कि थाना स्तर पर पहले कभी इस स्तर पर प्रयास नहीं हुए। इच्छावर थाना भवन के पास ही पुराना थाना भवन पहले जब्त वाहनो के कबाड़ से भरा था वही थाने के सामने बडे़-बडे़ गड्डे थे टीआई अरविंद कुमरे ने पुराने भवन की मरम्मत कर एतिहासिक धरोहर के संरक्षण को लेकर व्यापक कार्य कराये, इछावर के नागरिक बताते हैं कि टीआई अरविंद कुमरे के आने के बाद पुराना भवन मरम्मत, रंगरोगन के पश्चात बाद अपने एतिहासिक स्वरूप में आ गया |
जानकारी के मुताबिक इछावर थाने के पुराने भवन को पीडब्ल्यूडी ने 12 वर्ष पूर्व कंडम घोषित कर दिया था, बीते 8 माह के अल्प कार्यकाल मे टीआई अरविंद कुमरे ने वर्तमान भवन के रंगरोगन के सांथ पुराने एतिहासिक भवन को संरक्षित करने का बीड़ा उठाया।
जानकारो के मुताबिक भोपाल नवाब शाहजहां बेगम ने सन 1881 में रेस्ट हाउस का निर्माण कराया था। नवाब हमीदउल्ला खां जब भी इछावर के दौरे पर आते थे तो इसी रेस्ट हाऊस में ही रुकते थे। बाद में इस रेस्ट हाऊस में थाना शिफ्ट कर दिया गया था। तभी से यहां थाना संचालित होता रहा। इसके बाद थाने का नया भवन बनने के बाद इस भवन में पुलिस थाने मे खडे वाहन भर दिये गये थे।
खासबात यह कि वर्षों पूर्व पीडब्ल्यूडी इस भवन की देखभाल करता था, 12 वर्ष पहले पीडब्ल्यूडी द्वारा इस भवन को कंडम घोषित कर दिये जाने के बाद से इसकी मरम्मत व पुताई बंद कर दी गई और धीरे-धीरे यह भवन अपनी रंगत खोता जा रहा था।
थाना प्रभारी अरविंद कुमरे ने बताया कि थाने का पुराना भवन की साफ सफाई कराने के बाद उसकी मरम्मत करायी गई यहां के वाहनों को अन्यत्र रखने के बाद बिजली व्यवस्था करायी गयी अब यहां जवान रुकते है। हमारा प्रयास है कि ब्रिटिशकालीन रेस्ट हाउस भवन को पुराने स्वरूप में लाकर संरक्षित किया जाए। जनसहयोग से मरम्मत कराकर एतिहासिक भवन का पुराना सौंदर्य लौटाते हुए उसे उपयोगी बनाने का प्रयास किया गया
सीहोर जिले के इछावर का पुराना पुलिस थाना भवन वर्ष 1881 में बना था | यह ब्रिटिश कालीन भवनों की तरह रेस्ट हाऊस भवन बना हुआ है। जहां सामने बरामदे हैं, वहीं कमरों के साथ ही खिड़की-दरवाजों पर नक्काशी की गई है। कमरों में ठंडक बनी रहे इसके लिए मोटी-मोटी दीवारों के साथ ही इनकी ऊंचाई का ध्यान रखा गया था। सर्दी में कमरों को गर्म रखने के लिए चिमनी भी लगी हुई है। रेस्ट हाऊस में मेहमानों के ठहरने के लिए कमरों के साथ ही भोजन बनाने वाले खानसामा के लिए पीछे क्वार्टर बना हुआ है। मरम्मत बिजली व्यवस्था के बाद अब इसमें अभी भी पुलिस जवान रहने लगे हैं। आजादी के बाद रेस्ट हाउस में थाना शिफ्ट कर दिया गया था, बाद में यह सालो अनुपयोगी रहा इस पुराने भवन ब्रिटिशकालीन रेस्ट हाऊस के सामने घोड़ों को बांधने के लिए अस्तबल भी बना हुआ था। बाद में इसे तोड़ दिया गया। पुरानी धरोहर संरक्षण को लेकर टीआई अरविंद कुमरे के कार्यो की नगर ने सभी लोग प्रशंसा करते देखे जा रहे हैं।
सन् 1881 मे बना था रेस्ट हाउस उसमे चलता था आजादी के बाद पुलिस थाना,
पहले
बाद मे
इछावर, एमपी मीडिया पाइंट
नए कमरों मे अब चीज़ें पुरानी कौन रखता है,अब स्वयं परिंदों के लिए कुंडों मे पानी कौन रखता है . . . .
आप ही संभाले हुए हैं इस ढहती हुई दीवार को,
वरना सलीके से बुजुर्गों की निशानी कौन रखता है. . .
शायर की यह पंक्तियाँ इछावर मे थाना टीआई अरविंद कुमरे ने चरितार्थ की हैं।सरकारी नौकरी मे यूं तो कई अफसर आते और अपने किरदार निभाकर चले जाते है लेकिन मौजूदा हालात मे पुरानी चीजो को सहेजकर उसे उपयोगी बनाना मजबूत इच्छा शक्ति से ही संभव है। इछावर मे अंग्रेजो के जमाने मे बने पुराने थाना भवन को टीआई अरविंद कुमरे ने खूबसूरत किरदार निभाते हुए उसका कायाकल्प कर उपयोगी बना दिया अब यहां बिजली व्यवस्था उपलब्ध होने के बाद ड्यूटी मे तैनात जवान रुकते है। पहले थाने मे जब्त पुराने वाहनो के कबाड़ से भरा रहता यह भवन अब मरम्मत के बाद उपयोगी हो गया।

गत वर्ष 28 सितंबर 2018 से यहा टीआई अरविंद कुमरे की तैनाती के बाद थाना भवन मे रंगरोगन मरम्मत के सांथ व्यापक स्तर पर कार्य कराया गया स्टाफ भी यही बताता है कि थाना स्तर पर पहले कभी इस स्तर पर प्रयास नहीं हुए। इच्छावर थाना भवन के पास ही पुराना थाना भवन पहले जब्त वाहनो के कबाड़ से भरा था वही थाने के सामने बडे़-बडे़ गड्डे थे टीआई अरविंद कुमरे ने पुराने भवन की मरम्मत कर एतिहासिक धरोहर के संरक्षण को लेकर व्यापक कार्य कराये, इछावर के नागरिक बताते हैं कि टीआई अरविंद कुमरे के आने के बाद पुराना भवन मरम्मत, रंगरोगन के पश्चात बाद अपने एतिहासिक स्वरूप में आ गया |
जानकारी के मुताबिक इछावर थाने के पुराने भवन को पीडब्ल्यूडी ने 12 वर्ष पूर्व कंडम घोषित कर दिया था, बीते 8 माह के अल्प कार्यकाल मे टीआई अरविंद कुमरे ने वर्तमान भवन के रंगरोगन के सांथ पुराने एतिहासिक भवन को संरक्षित करने का बीड़ा उठाया।
जानकारो के मुताबिक भोपाल नवाब शाहजहां बेगम ने सन 1881 में रेस्ट हाउस का निर्माण कराया था। नवाब हमीदउल्ला खां जब भी इछावर के दौरे पर आते थे तो इसी रेस्ट हाऊस में ही रुकते थे। बाद में इस रेस्ट हाऊस में थाना शिफ्ट कर दिया गया था। तभी से यहां थाना संचालित होता रहा। इसके बाद थाने का नया भवन बनने के बाद इस भवन में पुलिस थाने मे खडे वाहन भर दिये गये थे।
खासबात यह कि वर्षों पूर्व पीडब्ल्यूडी इस भवन की देखभाल करता था, 12 वर्ष पहले पीडब्ल्यूडी द्वारा इस भवन को कंडम घोषित कर दिये जाने के बाद से इसकी मरम्मत व पुताई बंद कर दी गई और धीरे-धीरे यह भवन अपनी रंगत खोता जा रहा था।
थाना प्रभारी अरविंद कुमरे ने बताया कि थाने का पुराना भवन की साफ सफाई कराने के बाद उसकी मरम्मत करायी गई यहां के वाहनों को अन्यत्र रखने के बाद बिजली व्यवस्था करायी गयी अब यहां जवान रुकते है। हमारा प्रयास है कि ब्रिटिशकालीन रेस्ट हाउस भवन को पुराने स्वरूप में लाकर संरक्षित किया जाए। जनसहयोग से मरम्मत कराकर एतिहासिक भवन का पुराना सौंदर्य लौटाते हुए उसे उपयोगी बनाने का प्रयास किया गया
ब्रिटिश शैली में बना था पहला रेस्ट हाऊस–
सीहोर जिले के इछावर का पुराना पुलिस थाना भवन वर्ष 1881 में बना था | यह ब्रिटिश कालीन भवनों की तरह रेस्ट हाऊस भवन बना हुआ है। जहां सामने बरामदे हैं, वहीं कमरों के साथ ही खिड़की-दरवाजों पर नक्काशी की गई है। कमरों में ठंडक बनी रहे इसके लिए मोटी-मोटी दीवारों के साथ ही इनकी ऊंचाई का ध्यान रखा गया था। सर्दी में कमरों को गर्म रखने के लिए चिमनी भी लगी हुई है। रेस्ट हाऊस में मेहमानों के ठहरने के लिए कमरों के साथ ही भोजन बनाने वाले खानसामा के लिए पीछे क्वार्टर बना हुआ है। मरम्मत बिजली व्यवस्था के बाद अब इसमें अभी भी पुलिस जवान रहने लगे हैं। आजादी के बाद रेस्ट हाउस में थाना शिफ्ट कर दिया गया था, बाद में यह सालो अनुपयोगी रहा इस पुराने भवन ब्रिटिशकालीन रेस्ट हाऊस के सामने घोड़ों को बांधने के लिए अस्तबल भी बना हुआ था। बाद में इसे तोड़ दिया गया। पुरानी धरोहर संरक्षण को लेकर टीआई अरविंद कुमरे के कार्यो की नगर ने सभी लोग प्रशंसा करते देखे जा रहे हैं।



Post A Comment: