अंतिम इच्छा पूछने के बाद फांसी पर लटकने से बच गया यह शख्स, जानिए कैसे
                                                           
इछावर, एमपी मीडिया पाइंट 

मप्र के सीहोर जिले के इछावर तहसील अंतर्गत ग्राम कनेरिया में रहने वाले मगनलाल की दो पत्नियां थीं। 11 जून 2010 को पत्नियों से संपत्ति को लेकर उसका झगड़ा हुआ था। शराब के नशे में उसने दो साल से छह साल तक की पांच मासूम बेटियों को कुल्हाड़ी से काट दिया था। इसके बाद वह खुद भी फांसी लगाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन ग्रामीणों ने उसे पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। सिहोर जिला न्यायालय ने उसे फांसी की सजा सुनाई। राष्ट्रपति और सुप्रीम कोर्ट ने भी यह सजा बरकरार रखी थी। फांसी देने के लिए उसे पहले भोपाल सेंट्रल जेल लाया गया, यहां से जबलपुर सेंट्रल जेल भेजा गया था।मगनलाल को जबलपुर की सेंट्रल जेल में फांसी देने की खबर सुनकर पूर्व एडिशनल सॉलिसिटर जनरल विवेक तन्खा, ऋषभ संचेती और समीर सोढ़ी तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश पी सदाशिवम के पास गए। उन्होंने इस केस में अर्जेंट सुनवाई की अपील की। दोनों वकीलों ने पक्ष रखते हुए पहला तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट ने पहली ही सुनवाई में मगनलाल की अपील खारिज कर दी है। दूसरा तर्क यह दिया कि मगनलाल आर्थिक रूप से बेहद कमजोर है, उसे विधिक सहायता नहीं मिली है, इसलिए संभव है कि उसका कानूनी पक्ष पूरी मजबूती के साथ नहीं रखा गया है। इस पर तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश ने अपने विशेषाधिकार का उपयोग करते हुए जबलपुर कलेक्टर को फोन करके फांसी रोकने के आदेश दिए। तत्काल जबलपुर के केंद्रीय जेल में फांसी रोकने का सुप्रीम कोर्ट का ऑर्डर फैक्स कर दिया गया और फांसी रोक दी गई।
मगनलाल को फांसी देने के लिए लखनऊ से वह जल्लाद भी जबलपुर पहुंच गया था, जिसने कसाब को फांसी के तख्ते पर लटकाया था। जल्लाद अहमद ने फांसी की रिहर्सल भी कर ली थी। इसके लिए 61 किलो के लकड़ी के पुतले को फांसी पर लटकाया गया था, जिसे राम सिंह नाम दिया गया था।

आगे की खबर भोपाल से

भोपाल। तारीख 7 अगस्त 2013। रात के 11.45 बजे। नई दिल्ली में भारत के मुख्य न्यायाधीश का बंगला। दो वकील चीफ जस्टिस से गुहार लगाते हैं कि आतंकवादी कसाब के बाद जिस शख्स को फांसी पर लटकाए जाने की तैयारी पूरी कर ली गई है, अगले दिन सुबह सूरज उगने से पहले जिसे फांसी के तख्ते पर लटकाया जाना है, उसकी फांसी को टाल दिया जाए। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने पूरे केस को ध्यान से पढ़ा और फांसी के महज 5 घंटे पहले आधी रात को आदेश जारी किया कि अपनी पांच बेटियों की हत्या के आरोप में सजा काट रहे मगनलाल बारेला की फांसी रोक दी जाए। मगनलाल से जबलपुर की जेल में उसकी आखिरी इच्छा तक पूछी जा चुकी थी और उसका मेडिकल चेकअप करके एक अलग वार्ड में रखा गया था।
याकूब मेमन की ही तरह सुप्रीम कोर्ट ने दूसरी बार मगनलाल बारेला की दया याचिका पर सुनवाई की थी। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने दोनों की दया याचिका ठुकरा दी थी। दूसरी बार में मगनलाल को तो राहत मिल गई थी, लेकिन याकूब मेमन इतना खुशकिस्मत नहीं रहा। गुरुवार सुबह उसे फांसी पर चढ़ा दिया गया।
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