राजेश शर्मा, इछावर

अब घटना के बाद सबसे बढ़ा सवाल यह उठा रही है पब्लिक कि सीप नदी मे बहकर आखिर निखिल गया कहां!! 
एक अदनी सी नदी मे रेस्क्यू आपरेशन इतने लम्बे समय क्यूँ खिच रहा हैं। क्या संसाधनों की कमी है या गोताखोर कायदे से प्रशिक्षित नहीं!
   
26 घंटे से निखिल लापता है। मुझे लिखने या बताने की जरुरत नहीं कि उसके परिजनों का हाल क्या है। इस मर्म को समझा जा सकता है।

लेकिन अच्छी तरह इस बात का स्मरण कराने मे मुझे कोई संकोच भी नहीं कि 35 वर्ष पहले सीप नदी मे से एक आदिवासी का शव इछावर के गोताखोर स्व. पन्नालाल खाती ने देशी भाषा मे कहें तो (कराड़,भटाड़,कोचर) मे से अकेले के बलबूते पर निकाला था। अकेले ने पूरा आपरेशन को अंजाम दिया था। बरबस ही याद आते हैं पन्नालाल खाती ऐसी परिस्थितियों मे।

और बतादें कि भोपाल के बड़े तालाब से दंगे के बाद जालिमों द्वारा फेकी बंदूके भी निकालकर पन्नालाल ने ही भोपाल पुलिस को सौंपी थी। पुलिस ने उन्हें बाद मे वर्दी देकर 
 नवाजा था। आज रेस्क्यू टीम मे एक भी पन्नालाल नहीं इसे अफसोसजनक माना जा सकता है।
हालांकि पल-पल पर इछावर थाना टीआई अरविंद कुमरे अपने कर्तव्य को अंजाम दे रहे हैं। प्रशासन लगा हुआ है फिर भी एक अदनी सी नदी मे बहकर गया नवयुवक अब भी लापता है यह सोच का विषय है।


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