नई दिल्ली , एमपी मीडिया पाइंट

सरस्वती की मूरत,भारत के राजनीति की असली सूरत को आज खो दिया,सुषमा स्वराज अब हमारे बीच नहीं रही। यह खबर लिखने मे दुख होना स्वभाविक है क्योंकि उनकी भारत राष्ट्र को अगले एक दशक जरुरत थी। सुषमा स्वराज जैसी शख्सियत फिलहाल दूर-दूर तक नजर नहीं आती। विदिशा से चुनाव लड़ने के बाद वह इछावर के बेहद करीब आ गई थीं। दलगत राजनीति से हटकर उन्होंने इछावर विधानसभा के लिए काम किया। कई मर्तबा भाजपा के वरिष्ठ नेताओं  की विकास के मुद्दे पर डटाई भी लगाई। मुझे कहने मे झिझक नहीं की वह प्रधानमंत्री पद की असल दावेदार थी। उनकी नेतृत्व क्षमता भाजपा के वर्तमान राष्ट्रीय नेताओं से दस गुना ज्यादा थी। सुषमा जी जानती थी कि उनकी अब सेवाओं का कितना समय बाकी रह गया इसी लिए इसबार चुनाव नहीं लड़ने का उन्होंने अचानक फैसला ले लिया। सुषमा जी नहीं हैं हमारे बीच लेकिन उनके शुद्ध राजनीतिक सिद्धांत तो हैं जिनका परिपालन कर हम उन्हें  सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित  कर सकते हैं।

                               राजेश शर्मा 

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भारत की पूर्व विदेश मंत्री और भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज का निधन हो गया है. उन्हें दिल्ली के एम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था.पिछले ही साल सुषमा स्वराज ने ये ऐलान किया था कि वो साल 2019 का चुनाव नहीं लड़ेंगी. इस घोषणा के बाद सुषमा के पति और पूर्व राज्यपाल स्वराज कौशल ने कहा था, ''एक समय के बाद मिल्खा सिंह ने भी दौड़ना बंद कर दिया था. आप तो पिछले 41 साल से चुनाव लड़ रही हैं.''
66 साल की सुषमा राजनीति में 25 बरस की उम्र में आईं थीं. सुषमा के राजनीतिक गुरु लाल कृष्ण आडवाणी रहे थे.

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट करके सुषमा स्वराज को श्रद्धांजलि दी है.
अपने ट्वीट्स में उन्होंने लिखा है, ''भारतीय राजनीति का एक महान अध्याय ख़त्म हो गया है. भारत अपने एक असाधारण नेता के निधन का शोक मना रहा है, जिन्होंने लोगों की सेवा और गरीबों की ज़िंदगी बेहतर के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया. सुषमा स्वराज जी अनूठी थीं, जो करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत थीं. सुषमा जी अद्भुत वक्ता और बेहतरीन सांसद थीं. उन्हें सभी पार्टियों से सम्मान मिला. बीजेपी की विचारधारा और हित के मामले में वो कभी समझौता नहीं करती थीं. बीजेपी के विकास में उन्होंने बड़ा योगदान दिया.''
सुषमा स्वराज एक प्रखर और ओजस्वी वक्ता, प्रभावी पार्लियामेंटेरियन और कुशल प्रशासक मानी जाती हैं.
एक वक़्त था जब बीजेपी में अटल बिहारी वाजपेयी के बाद सुषमा और प्रमोद महाजन सबसे लोकप्रिय वक्ता थे. फिर बात संसद की हो या सड़क की. सुषमा स्वराज की गिनती बीजेपी के डी(दिल्ली)-फ़ोर में होती थी.
बीते चार दशकों में वे 11 चुनाव लड़ीं, जिसमें तीन बार विधानसभा का चुनाव लड़ीं और जीतीं. सुषमा सात बार सांसद रह चुकी हैं.

तस्वीरों से प्रचार करने वालीं सुषमा

इमरजेंसी के दिनों में बड़ौदा डायनामाइट केस में फंसे जार्ज फ़र्नांडिस ने जेल में ही रहकर मुज़फ़्फरपुर से चुनाव लड़ने का फ़ैसला किया था.
तब सुषमा स्वराज ने हथकड़ियों में जकड़ी उनकी तस्वीर दिखा कर ही पूरे क्षेत्र में प्रचार किया. जब चुनाव परिणाम आया तो जॉर्ज दिल्ली के तिहाड़ जेल में बंद थे.
राजनीतिक विश्लेषक बताते हैं कि साल 2013 में नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री का उम्मीदवार बनने से रोकने की लाल कृष्ण आडवाणी की मुहिम में वे आडवाणी के साथ थीं. इस मुहिम में उन्होंने आखिर तक आडवाणी का साथ दिया. पर 2014 में मोदी की जीत के बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा.
जानकारों और मोदी के आलोचकों का मानना था कि इस अपराध की सज़ा सुषमा को भविष्य में मिलेगी.
इंदिरा गांधी के बाद सुषमा स्वराज दूसरी ऐसी महिला थीं, जिन्होंने विदेश मंत्री का पद संभाला था.
बतौर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ट्विटर पर काफ़ी सक्रिय रहती थीं. फिर चाहे विदेश में फंसे लोगों की मदद करना हो या लोगों का पासपोर्ट बनवाना.
कुछ मौक़ों पर छोटी बातों पर मदद मांगते लोगों को सुषमा ने मज़ाकिया अंदाज़ में डांट भी लगाई थी.
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