मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार ने मध्यप्रदेश के लगभग एक करोड़ बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देने जा रही है। 100 यूनिट और 150 यूनिट बिजली खपत करने वाले उपभोक्ताओं को 325 रुपए मासिक में बिजली मिलेगी। कमलनाथ सरकार ने इस बार बिजली खपत को आधार बनाकर सभी वर्गों के उपभोक्ताओं को राहत पहुंचाने का काम किया। इससे निम्न एवं मध्यम वर्ग के लगभग एक करोड़ परिवार लाभान्वित होंगे। अभी पूर्व क्षेत्र बिजली वितरण कम्पनी के 45 लाख उपभोक्ताओं में से 21 लाख उपभोक्ताओं का 100 रुपये में 100 यूनिट बिजली खपत का लाभ मिल रहा था। सरकार के निर्णय से 31 लाख उपभोक्ता लाभान्वित होंगे। मध्यक्षेत्र वितरण कम्पनी के 27 लाख उपभोक्ताओं को अभी लाभ मिल रहा था। अब 39 लाख उपभोक्ताओं को कम दरों पर बिजली मिलेगी। इसी तरह पश्चिम क्षेत्र वितरण कम्पनी के 31 लाख सभी वर्ग के बिजली उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा। 100 यूनिट 100 रुपया की इंदिरा गृह ज्योति योजना में कुछ विशेष वर्ग को ही इस योजना का लाभ मिल रहा था।
कमलनाथ सरकार ने सामाजिक समरसता को ध्यान में रखते हुए बिना किसी भेदभाव के भाव 100 यूनिट और 150 यूनिट तक खपत के बिजली उपभोक्ताओं के बिल में राहत दी है। 100 यूनिट तक बिजली खपत करने वाले सभी वर्गों के उपभोक्ताओं को 100 मासिक पर बिजली मिलेगी। वहीं 150 यूनिट तक बिजली खपत करने वाले उपभोक्ताओं को अब 50 यूनिट पर 4 रुपया 50 पैसे यूनिट की दर से भुगतान करना होगा। इसका आशय यह हुआ कि 150 युनिट की खपत करने वाले उपभोक्ता को 325 रुपया प्रतिमाह का भुगतान करना होगा। अभी ऐसे उपभोक्ताओं को 105 यूनिट का बिल 485 रुपया आता था। जो अब घटकर 325 रुपया रह जायेगा। इसी तरह 151 यूनिट का बिजली बिल 105 रु. होगा। वहीं 150 यूनिट की विजली खपत पर 325 रु. का बिल अदा करना पड़ेगा। बिजली बिल की इस योजना के लागू होने पर 1 करोड़ 38 लाख 50 हजार उपभोक्ताओं में अब 1 करोड़ लोगों को 100 युनिट पर 100 रु. तथा 150 यूनिट खपत पर 325 रु. चुकाना होगा। इस योजना से प्रदेश के सभी वर्गों के 1 करोड़ परिवारों को लाभ मिलेगा। 
कमलनाथ सरकार की इस योजना का लाभ एक करोण परिवारों को मिलेगा। जब हर माह बिजली रीडिंग की व्यवस्था हो। बिजली वितरण कम्पनी के अधिकारियों की लापरवाही तथा कुप्रबंधन के कारण बिजली उपभोक्ताओं को सबसे महंगी बिजली मिल रही है। बिजली कम्पनियों के मीटर रीडर हर माह मीटर की रीडिंग नहीं लेते है। एवरेज बिल उपभोक्ताओं को हर माह जारी किए जाते है। दो से लेकर तीन माह में एक बार बिजली मीटर की रीडिंग होती है। ऐसी अवस्था में बिजली उपभोक्ताओं को ज्यादा टेरिफ के बिजली बिल का भुगतान करना होता है। सरकार इस योजना को बेहतर ढंग से लागू करना चाहती है, तो हर माह मीटर की रीडिंग अनिवार्य हो। बिद्युत वितरण कम्पनी के उपर इसकी अनिवार्यता हो। जिस क्षेत्र में मीटर रीडिंग प्रतिमाह ना हो, उसके लिए अधिकारियों एवं कर्मचारियों को जिम्मेदार बनाकर उन पर कार्यवाही करने का नियम भी बनाया जाना जरुरी है।
बिजली कम्पनियों को किसान एवं अन्य उपभोक्ताओं के लिए सरकार हजारों करोण रुपयों की सब्सिडी देकर भरपाई करती है। बिजली वितरण कम्पनियों में कोयला चोरी, कुप्रबंधन भ्रष्टाचार एवं रिश्वतखोरी लगातार बढ़ रही है। जिसके कारण बिजली उत्पादन एवं वितरण कम्पनियों का घाटा बढ़ता जा रहा है। पिछली सरकार के समय निजी पावर कम्पनियों से बिजली खरीदने के अनुबंध कर उन्हें निश्चित राशि का भुगतान किया जा रहा है। जबकि निजी पावर प्लांट अनुबंध के अनुसार बिजली की सप्लाई नहीं करते है। पिछली सरकार द्वारा निजी पावर प्लांट को फायदा पहुंचाने वाले अनुबंध अभी भी चल रहे हैं। जिसके कारण मध्यप्रदेश के ईमानदार बिजली उपभोक्ताओं को महंगी दरों पर बिजली खरीदना पड़ रही है। सबसे ज्यादा खराब हालत कारोबारियों, मध्यम एवं लघु उद्योगों को भारी नुकसान हो रहा है। हजारों उद्योग महंगी बिजली के कारण मध्यप्रदेश में बंद हो गए हैं। मुख्यमंत्री कमलनाथ यदि मध्यप्रदेश की बिजली आपूर्ति बेहतर करना चाहते हैं। इस स्थिति में बिजली वितरण एवं उत्पादन कम्पनी के कामकाज को बेहतर बनाने के लिए, उन पर नियंत्रण जरुरी है। दिल्ली सरकार ने बिजली की दरें कम करके सारे राज्यों के लिए प्रतिस्पर्धा के नए द्वार खोल दिए है।
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