शनि कहीं वक्री तो नहीं
देश में आर्थिक मंदी का दौर जारी है जिस पर जानकार अपनी अपनी राय भी जाहिर कर रहे हैं। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की गीता गोपीनाथन ने तो यहाँ तक कह दिया है की भारत की आर्थिक मंदी से केवल भारत ही नहीं बल्कि बाकी दुनियाँ भी प्रभावित होगी। उद्योग के क्षेत्र में नए खुलने की जगह पुराने बंद हो रहे हैं। युवाओं के लिए सरकारी और गैर सरकारी क्षेत्र में नौकरियों के अवसर कम होते जा रहे हैं। हालात यह हैं कि बेरोजगारी अपने 45 सालों के सबसे ऊँचे पायदान पर खड़ी होकर युवाओं को मुँह चिड़ा रही है। मध्यम वर्ग की थाली महंगी दर महंगी होती जा रही है। ऐसे कठिन दौर में हमारी वित्त मंत्री के सामने चुनोतियाँ हैं कि सबको बजट में शामिल करते हुए उनके लिए तोहफा भी दिया जाए। बजट ऐसे समय भी आ रहा है जब कुछ प्रदेशों की विधान सभा के चुनाव आसन्न हैं तो कुछ राज्यों में स्थानीय निकायों के चुनाव भी संपन्न किए जाएंगे।
बजट से मध्यम वर्ग को जरूर राहत की उम्मीद होगी । किन मुद्दो पर फोकस किया जा रहा होगा बजट का खाका। ये देखना भी दिलचस्प होगा कि बजट सत्र में देश के विरोधी जन के मन को जीतने का कौन सा मंत्र संसद में मोदी जी का चमत्कारिक व्यक्तित्व फूंकने वाला है।
हाल फिल्हाल उन बिंदुओं का उल्लेख करते हैं जिन पर सरकार से कदम उठाने की उम्मीद देश लगा रहा है।
पहला बिंदु तो देश के औध्योगिक क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए सरकार क्या कदम उठाने जा रही है। जिससे गिरती जी डी पी को संभाला जा सके। और इस क्षेत्र में विदेशी निवेश को ज्यादा से ज्यादा आकर्षित किया जा सके। यह देखना वाकई दिलचस्प होगा कि सरकार इस बिंदु को लेकर कितनी गंभीर है।
दूसरा बिंदु महंगाई पर नियंत्रण करने का होगा। रोजमर्रा के उपयोग में आने वाली चीजों की कीमतों में हो रही लगातार वृद्धि को लेकर भी जनता में खासा आक्रोश है। इस आक्रोश को काबू में रखने के लिए सरकार मांग और आपूर्ति में कितना सामंजस्य बनाने का प्रयास करती है। जिससे प्याज जैसी चीज उसकी थाली की शान बनी रहे।
तीसरा बिंदु युवाओं को ध्यान में रखकर बजट प्रावधान करना संभव है। जिससे रोजगार के नए अवसर सरकार मुहैया करा सके और युवाओं की हताशा और निराशा को दूर कर सके। बेरोजगारी को लेकर सरकार पर जो आरोप लग रहे हैं उनका मुँह तोड़ जवाब भी इस बजट में दिया जा सकता है।
चौथा बिंदु किसान और कामगारों को लेकर हो सकता है। अभी तक मोदी सरकार इन पर फोकस तो करती आ रही है लेकिन उनकी हालत में कोई उल्लेखनीय तब्दीली नहीं आई है। किसानों को उनकी उपज की सही कीमत दिलाने और खेती की लागत घटाने को लेकर सरकार से क्रांतिकारी कदम उठाया जाना प्रतीक्षित है।
पांचवां बिंदु वेतन भोगी कर्मचारी वर्ग को लेकर है। जिनके द्वारा इनकम टैक्स सिलेब् बढ़ाने की मांग की जा रही है। वेतनभोगी कर्मियों को उम्मीद है कि सरकार इस बार उन्हें कुछ राहत देगी ताकि सैलरी का अधिक हिस्सा उनकी जेब में आ सके। अब तक सरकार ने सप्लाई पर ध्यान दिया है और कंपनियों को कॉर्पोरेट टैक्स में राहत दी है। हालांकि बाजार में तेजी सप्लाई से ज्यादा डिमांड के चलते आती है, जो आम लोगों के पास पैसे की कमी के चलते कमजोर है। ऐसे में सरकार से उम्मीद की जा रही है कि वह डायरेक्ट टैक्स स्लैब में कुछ राहत देगी ताकि लोगों के पास खर्च करने के लिए अधिक पैसे हों।
छोटी छोटी बचतों को प्रोत्साहित करने के कदम भी उठाये जा सकते हैं। जिससे सरकारी खजाने में अस्थाई रूप से ही सही मनी फ्लो बढ़ाया जा सके।
सरकार खुद के खर्च घटाने के बारे में भी विचार कर सकती है जिससे राजकोषीय घाटे को कुछ हो तक कम किया जा सके। बहरहाल यह तय नजर आ रहा है कि बजट मरण मध्यम वर्ग ही लक्ष्य वक्रता होगा। देखते हैं शनिवार को शनि महाराज की दृष्टि केंद्र सरकार के मार्फत जनता पर कैसी पड़ती है? जिन्होंने हाल ही में राशि परिवर्तन किया है।
शैलश तिवारी
शनिवार को संसद में मोदी सरकार आम बजट जब पेश करेगी तो शायद माजरा यही होगा कि आईने के सामने खड़े होकर संवरने का मौका है। खुद को आईने में देखकर मुस्कुराने की वजह भी है। ये वह मौका है जब देश में सरकार के समर्थन और विरोध दोनों के ही प्रदर्शन हो रहे हैं।
देश में आर्थिक मंदी का दौर जारी है जिस पर जानकार अपनी अपनी राय भी जाहिर कर रहे हैं। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की गीता गोपीनाथन ने तो यहाँ तक कह दिया है की भारत की आर्थिक मंदी से केवल भारत ही नहीं बल्कि बाकी दुनियाँ भी प्रभावित होगी। उद्योग के क्षेत्र में नए खुलने की जगह पुराने बंद हो रहे हैं। युवाओं के लिए सरकारी और गैर सरकारी क्षेत्र में नौकरियों के अवसर कम होते जा रहे हैं। हालात यह हैं कि बेरोजगारी अपने 45 सालों के सबसे ऊँचे पायदान पर खड़ी होकर युवाओं को मुँह चिड़ा रही है। मध्यम वर्ग की थाली महंगी दर महंगी होती जा रही है। ऐसे कठिन दौर में हमारी वित्त मंत्री के सामने चुनोतियाँ हैं कि सबको बजट में शामिल करते हुए उनके लिए तोहफा भी दिया जाए। बजट ऐसे समय भी आ रहा है जब कुछ प्रदेशों की विधान सभा के चुनाव आसन्न हैं तो कुछ राज्यों में स्थानीय निकायों के चुनाव भी संपन्न किए जाएंगे।
बजट से मध्यम वर्ग को जरूर राहत की उम्मीद होगी । किन मुद्दो पर फोकस किया जा रहा होगा बजट का खाका। ये देखना भी दिलचस्प होगा कि बजट सत्र में देश के विरोधी जन के मन को जीतने का कौन सा मंत्र संसद में मोदी जी का चमत्कारिक व्यक्तित्व फूंकने वाला है।
हाल फिल्हाल उन बिंदुओं का उल्लेख करते हैं जिन पर सरकार से कदम उठाने की उम्मीद देश लगा रहा है।
पहला बिंदु तो देश के औध्योगिक क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए सरकार क्या कदम उठाने जा रही है। जिससे गिरती जी डी पी को संभाला जा सके। और इस क्षेत्र में विदेशी निवेश को ज्यादा से ज्यादा आकर्षित किया जा सके। यह देखना वाकई दिलचस्प होगा कि सरकार इस बिंदु को लेकर कितनी गंभीर है।
दूसरा बिंदु महंगाई पर नियंत्रण करने का होगा। रोजमर्रा के उपयोग में आने वाली चीजों की कीमतों में हो रही लगातार वृद्धि को लेकर भी जनता में खासा आक्रोश है। इस आक्रोश को काबू में रखने के लिए सरकार मांग और आपूर्ति में कितना सामंजस्य बनाने का प्रयास करती है। जिससे प्याज जैसी चीज उसकी थाली की शान बनी रहे।
तीसरा बिंदु युवाओं को ध्यान में रखकर बजट प्रावधान करना संभव है। जिससे रोजगार के नए अवसर सरकार मुहैया करा सके और युवाओं की हताशा और निराशा को दूर कर सके। बेरोजगारी को लेकर सरकार पर जो आरोप लग रहे हैं उनका मुँह तोड़ जवाब भी इस बजट में दिया जा सकता है।
चौथा बिंदु किसान और कामगारों को लेकर हो सकता है। अभी तक मोदी सरकार इन पर फोकस तो करती आ रही है लेकिन उनकी हालत में कोई उल्लेखनीय तब्दीली नहीं आई है। किसानों को उनकी उपज की सही कीमत दिलाने और खेती की लागत घटाने को लेकर सरकार से क्रांतिकारी कदम उठाया जाना प्रतीक्षित है।
पांचवां बिंदु वेतन भोगी कर्मचारी वर्ग को लेकर है। जिनके द्वारा इनकम टैक्स सिलेब् बढ़ाने की मांग की जा रही है। वेतनभोगी कर्मियों को उम्मीद है कि सरकार इस बार उन्हें कुछ राहत देगी ताकि सैलरी का अधिक हिस्सा उनकी जेब में आ सके। अब तक सरकार ने सप्लाई पर ध्यान दिया है और कंपनियों को कॉर्पोरेट टैक्स में राहत दी है। हालांकि बाजार में तेजी सप्लाई से ज्यादा डिमांड के चलते आती है, जो आम लोगों के पास पैसे की कमी के चलते कमजोर है। ऐसे में सरकार से उम्मीद की जा रही है कि वह डायरेक्ट टैक्स स्लैब में कुछ राहत देगी ताकि लोगों के पास खर्च करने के लिए अधिक पैसे हों।
छोटी छोटी बचतों को प्रोत्साहित करने के कदम भी उठाये जा सकते हैं। जिससे सरकारी खजाने में अस्थाई रूप से ही सही मनी फ्लो बढ़ाया जा सके।
सरकार खुद के खर्च घटाने के बारे में भी विचार कर सकती है जिससे राजकोषीय घाटे को कुछ हो तक कम किया जा सके। बहरहाल यह तय नजर आ रहा है कि बजट मरण मध्यम वर्ग ही लक्ष्य वक्रता होगा। देखते हैं शनिवार को शनि महाराज की दृष्टि केंद्र सरकार के मार्फत जनता पर कैसी पड़ती है? जिन्होंने हाल ही में राशि परिवर्तन किया है।


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