देवबड़ला में बिखरे पड़े नक्काशीदार पत्थरों से आकार ले रहा 40 फिट ऊचा मंदिर

अक्षत पाठक


आष्टा आखिर देवबड़ला में मौजूद विशालकाय नक्कासीदार प्रस्तरखंडों को देखकर इस बात का अंदाजा सहज लगाया जा सकता है कि यह क्षेत्र कभी धार्मिक दृष्टिकोण से एक बहुत बड़ा स्थान रहा होगा। सरकारी उपेक्षा के बाद भी देवबड़ला शिवभक्तों की आस्था का केंद्र है। शेषशायी भगवान विष्णु की एक मात्र प्रतिमा भी यहीं पर मौजूद है। शिवरात्रि पर यहा हजारों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन हेतु पहुचते हैं। रास्तों के तमाम कष्ट श्रद्धालु उस वक्त भूल जाते हैं, जब वह मंदिर परिसर में पहुचते हैं और यहा मौजूद कुंड के शीतल जल का आचमन करते हैं।

    बीते अनेक वर्षाे से पुरातत्व के प्रति जागरूकता रखने वाले और तहसील के विभिन्न ऐतिहासिक एवं पुरातत्वीय महत्व के स्थानों को लेकर विभिन्न जानकारियां प्रकाशित करने वाले वरिष्ट पत्रकार और अधिवक्ता सुधीर पाठक के द्वारा अनेक समाचार प्रकाशित किए गए हैं, जिसका परिणाम यह निकला कि शासन स्तर से देवबडला में खुदाई की गई, जिसमें मंदिरों की श्रंखला निकली, वही पर्यटन विभाग भी इस दिशा में सक्रीय हुआ हैं। इधर मंदिर की देखरेख में अपना जीवन समर्पित करने वाले औंकारसिंह भगत की सक्रीयता और सजगता का परिणाम हैं कि अनेक कीमती प्रस्तरखंड और प्रतिमाए यहा से अन्यत्र जाने से बच गई। अब यहा बिखरे पडे नक्कासीदार विशालकाय प्रस्तरखंडों को जोडकर मंदिर का निर्माण किया जा रहा हैं।     इस संबंध में मंदिर समिति अध्यक्ष औंकार सिंह भगतजी एवं विजेंद्रसिंह भाटी बताते हैं कि यहा उपलब्ध प्रस्तरखंडों से मंदिर निर्माण का कार्य चल रहा हैं। कोई 40 फिट ऊचे मंदिर का निर्माण राजस्थान से आए भूरा जाट की देखरेख में चल रहा हैं। श्री भाटी बताते हैं कि 40 फिट से भी अधिक ऊंचाई होने का अनुमान हैं। जिस प्रकार बिखरे पडे पत्थरों को एकत्रित कर मंदिर बनाया जा रहा है, वह तो अपने आप में बडा काम हैं। लेकिन इससे ज्यादा बडा काम हैं नक्कासीदार विशालकाय प्रस्तरखंडों को क्रम में जमाने का जिस प्रकार इस काले पत्थरों से मंदिर का निर्माण हो रहा हैं और जिस प्रकार की नक्काशी मंदिर पर दिखाई दे रही हैं, वह मंदिर समिति और इस कार्य में लगे लोगों की कडी मेहनत का परिणाम हैं। अभी  मंदिर की ऊचाई लगभग 25 फिट के आसपास हो गई हैं तथा निर्माण कार्य जारी हैं।

तत्कालीन कलेक्टर डॉ. सुदाम खाडे ने भेजी थी टीम
पुरातत्वीय दृष्टिकोण से यह क्षेत्र अपने आप में महत्वपूर्ण क्षेत्र है। लेकिन स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा के चलते इस क्षेत्र का विकास नही हो पाया। देवांचलधाम के महत्व को लेकर वरिष्ट पत्रकार सुधीर पाठक ने अनेक वर्षो से जो अलख जगाई और इसके महत्व को प्रतिपादित किया, उसी का परिणाम था कि तत्कालीन कलेक्टर डॉ. सुदाम खाडे ने पुरातत्व की टीम को यहा खुदाई हेतु भेजा।  पुरातत्व विभाग द्वारा की जा रही खुदाई में एक के बाद एक सात मंदिरो की श्रृंखला निकली है। जो इस क्षेत्र के पुरातत्वीय महत्व को स्वयं रेखांकित करती  है।
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