बोल के लब आजाद हैं तेरे
क्या बंदूकों की गोलियां करेंगी फैसला??? 

शैलेश तिवारी 


बोल के लब आजाद हैं तेरे... इन पंक्तियों से अभिव्यक्त होती हमारी अभिव्यक्ति की आजादी..। जो संविधान ने भारत के हर नागरिक को सौंपी है। इसके साथ ही बताये गए हैं मूल कर्तव्य..। जो शायद गिनती के लोगों को ही याद हों..? फिर भी जब अधिकारों पर गोलियां चलने गांधी के देश में...। वो भी उनकी पुण्य तिथि पर..। तब विचार आना लाजिमी है कि क्या अब गोलियां करेंगी फैसला??? 
सीएए एक ऐसा मुद्दा, जिस पर देश स्पष्ट रूप से दो धड़ों में बँट हुआ नजर आ रहा है। एक पक्ष समर्थन में तो दूसरा विरोध में। दोनों पर ही गोलियां चलती हैं। बिहार के एक गाँव में सीएए के समर्थन में रैली निकलती है और गोली निकलती है बंदूक की नली से... जान ले लेती है एक युवक की...। इसी एक्ट के विरोध में जामिया में मार्च निकलने की तैयारी हो रही है फिर एक पिस्टल से गोली निकलती है जो एक युवक को घायल कर देती है। उसके तुरंत बाद शाहीन बाग के विरोध प्रदर्शन स्थल पर सुरक्षा की तीन तीन परतों को पार कर एक युवक हवा में गोली दाग देता है। शुक्र है न कोई मरा न कोई घायल हुआ। लेकिन ये घटनाएं छोड़ देती है सवाल.??? 
सवाल यह कि देश क्या अराजकता की गिरफ्त में आता जा रहा है? सवाल यह भी है कि देश में मुद्दों का फैसला क्या अब गोलियों से होगा। गोलियां जो भी चला रहा है वो यह भी तय कर रहा है कि शांति और अमन की बयार में बारूदी गंध घोलने का निंदनीय काम किया जा रहा है। कभी केशर की घाटी की फिजाओं में ही बारूद की गंध आती थी लेकिन वहाँ अब बंदूकें मौन होती जा रही हैं परंतु देश के दिल दिल्ली में बंदूक के फायर की आवाज शांति को भंग कर रही हैं। 
विचार ये भी करना होगा कि इन गोली चलाने वाले युवकों को प्रेरणा कौन दे रहा है। गोली समर्थन में चले या विरोध में..... निंदा दोनों की होना चाहिए। सरकार को एक कदम इस दिशा में भी उठाना चाहिए कि एक्ट का समर्थन हो या विरोध... दोनों ही मोर्चों पर बोल वचन नियंत्रित हों। दो हिस्सों को बांटती लकीर कहीं इतनी गहरी खाई में तब्दील न हो जाए कि हम एक अनचाहे गृह युद्ध की तरफ बढ़ जाएं। इस तरफ सरकार ने चिंतन भी किया है और मंथन भी... तभी नतीजे में आया है कि सरकार एक्ट का विरोध करने वालों से बात करने को तैयार है। बात होगी तो हल भी निकलेगा। लेकिन गोली चलने से तो हल निकलने से रहा। बातचीत किन बिंदुओं पर होगी? किस किस के बीच होगी? यह निकट भविष्य में तय हो जाएगा। तय होने की उम्मीद इसलिए भी है कि जब बोड़ो आंदोलनकारियों से बात चीत की सकती है जिनके कारण देश के कई जवान शहीद हो गए तो इनसे मन की बात करने में माहिर हमारे पी एम जरूर बात करेंगे और किसी नतीजे पर बात पहुंचेगी ही।
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