हमारी सरकारे जी हमसे टैक्स वसूलती हैं तो उस राशि से उसकी जिम्मेदारी बन जाती है नागरिकों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना। बिजली, पानी और सड़क ये है आधारभूत आवश्यकताएं...। हमारी सरकारों ने इन तीनों की व्यवस्थाओ को धीरे धीरे निजी हाथों में सौंप कर अपने कर्तव्य की या श्री कर ली। जनता ने भी अपने जनार्दन (सरकार) के इस फैसले को आत्मसात कर लिया। बिजली और सड़कें तो निजी हाथों से संचालित हैं लेकिन पानी की व्यवस्था सरकारी तौर पर की जा रही है। ये अलग बात है कि शुद्ध पेय जल के लिए जनता को खुद ही संघर्ष करना होता है।
इसके बाद सरकारों की जिम्मेदारी होती है कि शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा अपने नागरिकों को उनके द्वारा चुकाये जा रहे करों के एवज में उपलब्ध कराये। सरकार ने ही सार्वजनिक उपक्रमों की स्थापना की। ताकि नागरिकों का पैसा देश हित में लगे, लोगों को रोजगार के अवसर मिले, सरकार का नियंत्रण भी बना रहे। अगर सपा नेता अखिलेश यादव की बात मानी जाए तो यह बजट दिवालिया सरकार का दिवालिया बजट है। सरकार से सरकार के उपक्रम ही नहीं चलाये जा पा रहे हैं। तो सरकार ने फार्मुला इजाद किया पीपीपी का...। यानि प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप का..। जिसको पी 3 भी कहा जाता है या 3पी भी कहते हैं। इसे तहत अब शिक्षा और स्वास्थ्य को शामिल कर लिया गया है।
भारतीय विमान पत्तन प्राधिकरण के छह हवाई अड्डों - अहमदाबाद, जयपुर, लखनऊ, गुवाहाटी, तिरुवनंतपुरम और मंगलुरु को पहले चरण में लीज पर देने का निर्णय लिया गया है।
वित्तमंत्री निर्मला सीतारणम ने वित्त वर्ष 2019-20 का आम बजट पेश करते हुए बजट में रेलवे में पीपीपी (निजी-सार्वजनिक साझेदारी) मॉडल अपनाने पर जोर दिया गया । सरकार की ओर से इस मॉडल को अपनाने के पीछे तर्क दिया गया कि रेलवे को 2018 से 2030 तक 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश की जरूरत है। सरकार के मुताबिक पिछली कमाई को देखते हुए इतनी बड़ी रकम खर्च कर पाना सरकार के लिए अकेले संभव नहीं है। ऐसे में इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए पीपीपी मॉडल को अपनाने की जरूरत है।
देश में योग्य डॉक्टरों की कमी और मेडिकल शिक्षा की खाई को पाटने के लिए नीति आयोग ने सार्वजनिक निजी साझेदारी (पीपीपी) मॉडल की वकालत की है। इसके तहत मौजूदा और नए निजी कॉलेजों को जिला अस्पतालों से जोड़कर मेडिकल सीट को बढ़ाया जा सकता है।
हालांकि इसमे सुरक्षा शामिल नहीं है लेकिन शिक्षा और स्वास्थ्य भी हमारी सरकार अपने नागरिकों को मुहैया कराने में नाकाम है। लेकिन कुछ अर्थ शास्त्रियों का कहना है कि पीपीपी मॉडल लागू होने से सुस्त पड़ी अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।
नतीजा तो भविष्य के गर्भ से प्रसूत होकर सामने आएगा। तब कहीं देर न हो जाए...।
इसके बाद सरकारों की जिम्मेदारी होती है कि शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा अपने नागरिकों को उनके द्वारा चुकाये जा रहे करों के एवज में उपलब्ध कराये। सरकार ने ही सार्वजनिक उपक्रमों की स्थापना की। ताकि नागरिकों का पैसा देश हित में लगे, लोगों को रोजगार के अवसर मिले, सरकार का नियंत्रण भी बना रहे। अगर सपा नेता अखिलेश यादव की बात मानी जाए तो यह बजट दिवालिया सरकार का दिवालिया बजट है। सरकार से सरकार के उपक्रम ही नहीं चलाये जा पा रहे हैं। तो सरकार ने फार्मुला इजाद किया पीपीपी का...। यानि प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप का..। जिसको पी 3 भी कहा जाता है या 3पी भी कहते हैं। इसे तहत अब शिक्षा और स्वास्थ्य को शामिल कर लिया गया है।
भारतीय विमान पत्तन प्राधिकरण के छह हवाई अड्डों - अहमदाबाद, जयपुर, लखनऊ, गुवाहाटी, तिरुवनंतपुरम और मंगलुरु को पहले चरण में लीज पर देने का निर्णय लिया गया है।
वित्तमंत्री निर्मला सीतारणम ने वित्त वर्ष 2019-20 का आम बजट पेश करते हुए बजट में रेलवे में पीपीपी (निजी-सार्वजनिक साझेदारी) मॉडल अपनाने पर जोर दिया गया । सरकार की ओर से इस मॉडल को अपनाने के पीछे तर्क दिया गया कि रेलवे को 2018 से 2030 तक 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश की जरूरत है। सरकार के मुताबिक पिछली कमाई को देखते हुए इतनी बड़ी रकम खर्च कर पाना सरकार के लिए अकेले संभव नहीं है। ऐसे में इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए पीपीपी मॉडल को अपनाने की जरूरत है।
देश में योग्य डॉक्टरों की कमी और मेडिकल शिक्षा की खाई को पाटने के लिए नीति आयोग ने सार्वजनिक निजी साझेदारी (पीपीपी) मॉडल की वकालत की है। इसके तहत मौजूदा और नए निजी कॉलेजों को जिला अस्पतालों से जोड़कर मेडिकल सीट को बढ़ाया जा सकता है।
हालांकि इसमे सुरक्षा शामिल नहीं है लेकिन शिक्षा और स्वास्थ्य भी हमारी सरकार अपने नागरिकों को मुहैया कराने में नाकाम है। लेकिन कुछ अर्थ शास्त्रियों का कहना है कि पीपीपी मॉडल लागू होने से सुस्त पड़ी अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।
नतीजा तो भविष्य के गर्भ से प्रसूत होकर सामने आएगा। तब कहीं देर न हो जाए...।


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