पशु स्वास्थ्य सेवाएँ लड़खड़ाईं..., जिम्मेदार गायब,
मामले पर चिकित्सक बोले--झूठ बोल रहें लोग
इछावर 14 फरवरी, 2020 एमपी मीडिया पाइंट
शासन ने पशुओं की देखरेख को लेकर अरबों का खजाना खाली किया। लेकिन पशु चिकित्सालयों का पुरसान-ए-हाल नहीं है। चिकित्सा सेवा के अभाव मे अनगिनत बेज़ुबान पशु लगातार दम तोड़ते जा रहे है जिसका जिम्मेदार कौन!
बात इछावर ब्लाक की है जहां ग्राम्यांचलों के पशु औषधालायों के ताले तक नहीं खुलते,सबसे बड़ी बात यह है कि ब्लाक मुख्यालय इछावर का पशु चिकित्सालय भी लावारिस नजर आता है। यहां पदस्थ पशु चिकित्सक हमेशा लापता रहता है। पशुपालक अपने बिमार पशुओं को अस्पताल लेकर जाते हैं। लेकिन कोई नहीं होने के कारण निराश होकर वापस लोट जाते हैं। अपने पशुओं काे असमय दम तोड़ने का दंश झेलते हैं। पशु चिकित्सालय पूरी तरह बदहाल स्थिति में है। जब ग्रामीण अपने बीमार पशु को लेकर आते हैं तो पशु चिकित्सक नहीं होने का खामियाजा पशु पालकों को भुगतना पड़ता है।
ग्रामीण सोनू वर्मा,गजेंद्र सेन, सचिन मीणा,सूरज वर्मा,आदि ने बताया कि पदस्थ चिकित्सक का कोई समय नहीं है। कब आता है, कब जाता है। हमें तो यहां अक्सर ताले लगे डले मिलते हैं। और अस्पताल पूरी तरह खंडर जैसा दिखता है। जैसे मानो सालों साल नहीं खुला हो। पशु चिकित्सक यहां पहुंचते ही नहीं है। अस्पताल खुलने का समय तो दर्शाया गया है। लेकिन दर्शाए समय के अनुसार आते हैं तो ताले लगे मिलते हैं। पदस्थ कर्मचारी का नाम व नंबर पर काली रीप से नंबर मिटा दिया ताकि कोई फोन नहीं लगा सके। अस्पताल के गेट पर अक्सर ताले लगे मिलते हैं।
वही लसूडियाकांगर निवासी गजेंद्र सेन,और सोनू वर्मा,ने बताया कि हमारे गाँव मे आधिकांश पशुओं में इस समय पशु पागल जैसे हो रहे हैं। पिछले 8 दिनों में आठ दस के लगभग पशु मर चुके हैं। और यह स्थिति गांव में बढ़ती ही जा रही है। गांव के आवारा पशुओं से होते होते घर के पशुओं में भी पागलपन का दौर चालू हो गया है। ऐसे में पशु चिकित्सक को बुलाने के लिए इछावर अस्पताल के कई बार चक्कर लगा चुके हैं लेकिन संबंधित सुनने को तैयार ही नहीं है।
ग्रामीण बताते हैं कि हमने बैंकों से समूह के द्वारा लोन लेकर मवेशी को अपने घर लाये हैं। और उनका दूध बेचकर अपने घर का पालन पोषण कर रहे हैं। और लिए गए लोन की किस्तो के रूप में दे रहे है। ऐसे में यह बीमारी चल रही है। इससे ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। लेकिन संबंधित विभाग को कई बार अवगत कराया गया लेकिन संबंधित विभाग सुनने को तैयार नहीं। पदस्थ डाक्टर अक्सर ड्यूटी से गायब रहता है।
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आपके द्वारा बात संज्ञान में लाई है,जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।
,आरएस मरावी तहसीलदार इछावर,
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समय सीमा पर अस्पताल खुलता है। अस्पताल में कोई असुविधा नहीं है ग्रामीण झूठ बोल रहे हैं।
पशु चिकित्सक पवन सिसोदिया,
मामले पर चिकित्सक बोले--झूठ बोल रहें लोग
शासन ने पशुओं की देखरेख को लेकर अरबों का खजाना खाली किया। लेकिन पशु चिकित्सालयों का पुरसान-ए-हाल नहीं है। चिकित्सा सेवा के अभाव मे अनगिनत बेज़ुबान पशु लगातार दम तोड़ते जा रहे है जिसका जिम्मेदार कौन!
बात इछावर ब्लाक की है जहां ग्राम्यांचलों के पशु औषधालायों के ताले तक नहीं खुलते,सबसे बड़ी बात यह है कि ब्लाक मुख्यालय इछावर का पशु चिकित्सालय भी लावारिस नजर आता है। यहां पदस्थ पशु चिकित्सक हमेशा लापता रहता है। पशुपालक अपने बिमार पशुओं को अस्पताल लेकर जाते हैं। लेकिन कोई नहीं होने के कारण निराश होकर वापस लोट जाते हैं। अपने पशुओं काे असमय दम तोड़ने का दंश झेलते हैं। पशु चिकित्सालय पूरी तरह बदहाल स्थिति में है। जब ग्रामीण अपने बीमार पशु को लेकर आते हैं तो पशु चिकित्सक नहीं होने का खामियाजा पशु पालकों को भुगतना पड़ता है।
ग्रामीण सोनू वर्मा,गजेंद्र सेन, सचिन मीणा,सूरज वर्मा,आदि ने बताया कि पदस्थ चिकित्सक का कोई समय नहीं है। कब आता है, कब जाता है। हमें तो यहां अक्सर ताले लगे डले मिलते हैं। और अस्पताल पूरी तरह खंडर जैसा दिखता है। जैसे मानो सालों साल नहीं खुला हो। पशु चिकित्सक यहां पहुंचते ही नहीं है। अस्पताल खुलने का समय तो दर्शाया गया है। लेकिन दर्शाए समय के अनुसार आते हैं तो ताले लगे मिलते हैं। पदस्थ कर्मचारी का नाम व नंबर पर काली रीप से नंबर मिटा दिया ताकि कोई फोन नहीं लगा सके। अस्पताल के गेट पर अक्सर ताले लगे मिलते हैं।
वही लसूडियाकांगर निवासी गजेंद्र सेन,और सोनू वर्मा,ने बताया कि हमारे गाँव मे आधिकांश पशुओं में इस समय पशु पागल जैसे हो रहे हैं। पिछले 8 दिनों में आठ दस के लगभग पशु मर चुके हैं। और यह स्थिति गांव में बढ़ती ही जा रही है। गांव के आवारा पशुओं से होते होते घर के पशुओं में भी पागलपन का दौर चालू हो गया है। ऐसे में पशु चिकित्सक को बुलाने के लिए इछावर अस्पताल के कई बार चक्कर लगा चुके हैं लेकिन संबंधित सुनने को तैयार ही नहीं है।
ग्रामीण बताते हैं कि हमने बैंकों से समूह के द्वारा लोन लेकर मवेशी को अपने घर लाये हैं। और उनका दूध बेचकर अपने घर का पालन पोषण कर रहे हैं। और लिए गए लोन की किस्तो के रूप में दे रहे है। ऐसे में यह बीमारी चल रही है। इससे ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। लेकिन संबंधित विभाग को कई बार अवगत कराया गया लेकिन संबंधित विभाग सुनने को तैयार नहीं। पदस्थ डाक्टर अक्सर ड्यूटी से गायब रहता है।
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,आरएस मरावी तहसीलदार इछावर,
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समय सीमा पर अस्पताल खुलता है। अस्पताल में कोई असुविधा नहीं है ग्रामीण झूठ बोल रहे हैं।
पशु चिकित्सक पवन सिसोदिया,


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