गायक
दिल का आलम बताने की मशक्कत...
अस्सी के दशक का उत्तरार्ध था.... जब गीतकार समीर और निर्देशक महेश भट्ट पहुंचे ... टी सीरीज के मालिक गुलशन कुमार के पास... वो समीर के गीतों की एल्बम बनाने को तो तैयार थे... लेकिन महेश भट्ट की फिल्म पर इंकार था... तब महेश भट्ट ने कहा कि... इस फिल्म का न केवल गीत संगीत हिट होगा.. बल्कि फिल्म भी सुपर हिट होगी.... और अगर ऐसा नहीं हुआ तो मैं फिल्मों के निर्देशन से... सन्यास ले लूंगा... गुलशन कुमार ने यह सुना और हाँ कर दी... फिल्म बनाने की...। फिल्म बनी... और इसकी मार्केटिंग भी जबरदस्त की गई... याद कीजिए... उस पोस्टर को... जिसमें एक कोट या जर्किन के पीछे छिपे हुए नजर आते हैं... एक युवक और एक युवती.... लोगों में जिज्ञासा जाग गई... इस सीन को लेकर.... जो नवोदित कलाकार राहुल रॉय और अनु अग्रवाल को शूट किया गया था....। फिल्म रिलीज हुई 1990 में..आशिकी के नाम से...। प्रेम कहानी पर आधारित इस फिल्म ने उस साल सर्वाधिक कमाई की बॉक्स ऑफिस पर...। इसी फिल्म का गीत है... दिल का आलम मैं क्या बताऊँ तुझे.....। गीतकार हैं अमृतसर के मदन पाल... जिन्होंने शब्दों को.... उन भाव में ढाला है कि... दिल की बेकरारी को बयाँ करने के इनसे उम्दा शब्द हो ही नहीं सकते थे... कल्पना कीजिए... जिससे मिलना हो वो सामने बैठा हो लेकिन बात न हो पाए... और इशारा करने पर आशिक को दोनों की रुसवाई का डर सताने लगे....। सोच कर देखिये ... दिल को कैसे करार पहुंचे...। इस गीत को संगीत से सजाया है नदीम सैफ और श्रवण राठौर की 1973 में मिली जोड़ी ने....। इनको भी आशिकी ने ही हिट किया... नदीम श्रवण.. के रूप में....। वाद्य यंत्र की थाप से दिल की धड़कन सुना देने का अजूबा भी आपको इस गाने को सुनने में आपको मिलेगा...। और जैसे ही गाने की यह पंक्ति आती है.... "एक चेहरे ने.. " नदीम श्रवण के संगीत का यह कमाल सुनिए... जैसे पूरी कायनात झंकृत हो जाती है....। इस गीत को गाया है.... केदारनाथ भट्टाचार्य ने... जी हाँ आपके हमारे कुमार शानू ने....। किशोर कुमार को अपना आदर्श मानने वाले... कुमार शानू... शास्त्रीय संगीत में भी निपुण हैं... और सुगम संगीत में भी...। इनके नाम एक ही दिन में 28 गाने रिकार्ड कराने का अनूठा रिकार्ड दर्ज है..। इन्होनें इस गाने को इतनी कौमार्य से भरी आवाज में गाया है कि.. सुनकर एक ताजगी का अहसास हो जाता है...। जैसे फूलों पर जमी शबनम को देखकर दिल ताजगी से भर उठे। और गाने को सुनकर वह दौर आँखों के सामने फिल्म की रील की तरह चलने लगे....जिस दौर में प्यार का यह अद्भुत मंजर फिल्माया गया था...। गाने का फिल्मांकन भी दोनों बार अजब और गजब है... ये कमाल निर्देशक महेश भट्ट का है....।
हमारे लिए इस गाने को लेकर आए हैं... रेलवे के किशोर कुमार..... यानि सीहोर के कराओके गायक विजय पालीवाल...। इन्होंने भी मूल गायक कुमार शानू.. के उस अंदाज को जिंदा रखा है... जिसके लिए कुमार शानू इस गाने के लिए जाने गए...। आइये आप और हम मिलकर... इस गाने का आनंद उठाते हैं..।
दिल का आलम बताने की मशक्कत...
अस्सी के दशक का उत्तरार्ध था.... जब गीतकार समीर और निर्देशक महेश भट्ट पहुंचे ... टी सीरीज के मालिक गुलशन कुमार के पास... वो समीर के गीतों की एल्बम बनाने को तो तैयार थे... लेकिन महेश भट्ट की फिल्म पर इंकार था... तब महेश भट्ट ने कहा कि... इस फिल्म का न केवल गीत संगीत हिट होगा.. बल्कि फिल्म भी सुपर हिट होगी.... और अगर ऐसा नहीं हुआ तो मैं फिल्मों के निर्देशन से... सन्यास ले लूंगा... गुलशन कुमार ने यह सुना और हाँ कर दी... फिल्म बनाने की...। फिल्म बनी... और इसकी मार्केटिंग भी जबरदस्त की गई... याद कीजिए... उस पोस्टर को... जिसमें एक कोट या जर्किन के पीछे छिपे हुए नजर आते हैं... एक युवक और एक युवती.... लोगों में जिज्ञासा जाग गई... इस सीन को लेकर.... जो नवोदित कलाकार राहुल रॉय और अनु अग्रवाल को शूट किया गया था....। फिल्म रिलीज हुई 1990 में..आशिकी के नाम से...। प्रेम कहानी पर आधारित इस फिल्म ने उस साल सर्वाधिक कमाई की बॉक्स ऑफिस पर...। इसी फिल्म का गीत है... दिल का आलम मैं क्या बताऊँ तुझे.....। गीतकार हैं अमृतसर के मदन पाल... जिन्होंने शब्दों को.... उन भाव में ढाला है कि... दिल की बेकरारी को बयाँ करने के इनसे उम्दा शब्द हो ही नहीं सकते थे... कल्पना कीजिए... जिससे मिलना हो वो सामने बैठा हो लेकिन बात न हो पाए... और इशारा करने पर आशिक को दोनों की रुसवाई का डर सताने लगे....। सोच कर देखिये ... दिल को कैसे करार पहुंचे...। इस गीत को संगीत से सजाया है नदीम सैफ और श्रवण राठौर की 1973 में मिली जोड़ी ने....। इनको भी आशिकी ने ही हिट किया... नदीम श्रवण.. के रूप में....। वाद्य यंत्र की थाप से दिल की धड़कन सुना देने का अजूबा भी आपको इस गाने को सुनने में आपको मिलेगा...। और जैसे ही गाने की यह पंक्ति आती है.... "एक चेहरे ने.. " नदीम श्रवण के संगीत का यह कमाल सुनिए... जैसे पूरी कायनात झंकृत हो जाती है....। इस गीत को गाया है.... केदारनाथ भट्टाचार्य ने... जी हाँ आपके हमारे कुमार शानू ने....। किशोर कुमार को अपना आदर्श मानने वाले... कुमार शानू... शास्त्रीय संगीत में भी निपुण हैं... और सुगम संगीत में भी...। इनके नाम एक ही दिन में 28 गाने रिकार्ड कराने का अनूठा रिकार्ड दर्ज है..। इन्होनें इस गाने को इतनी कौमार्य से भरी आवाज में गाया है कि.. सुनकर एक ताजगी का अहसास हो जाता है...। जैसे फूलों पर जमी शबनम को देखकर दिल ताजगी से भर उठे। और गाने को सुनकर वह दौर आँखों के सामने फिल्म की रील की तरह चलने लगे....जिस दौर में प्यार का यह अद्भुत मंजर फिल्माया गया था...। गाने का फिल्मांकन भी दोनों बार अजब और गजब है... ये कमाल निर्देशक महेश भट्ट का है....।
हमारे लिए इस गाने को लेकर आए हैं... रेलवे के किशोर कुमार..... यानि सीहोर के कराओके गायक विजय पालीवाल...। इन्होंने भी मूल गायक कुमार शानू.. के उस अंदाज को जिंदा रखा है... जिसके लिए कुमार शानू इस गाने के लिए जाने गए...। आइये आप और हम मिलकर... इस गाने का आनंद उठाते हैं..।


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